ये रिश्ता क्या कहलाता है – 24 अक्टूबर 2019 – आज का एपिसोड

ये रिश्ता क्या कहलाता है – 24 अक्टूबर 2019 – आज का एपिसोड

ये रिश्ता क्या कहलाता है कि आज के एपिसोड में आज आप देखेंगे कि कैसे नायरा जब अपने कमरे में होती है तभी वहां पर वेदिका आ जाती है तभी नायरा वेदिका फिर कहती है कि मुझे अच्छा लगा कि मैंने आपको बुलाया तो आप मेरे कहने से यहां पर आ गई मुझे आपसे कुछ बात करनी थी तभी वेदिका नायरा से माफी मांगती है जो भी घर में परेशानियां आई थी वह मेरी वजह से ही आई थी अगर मैं डिवोर्स की बात नहीं करती तो शायद आज सब को इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती|

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नायरा वेदिका से कहती है कि इसमें आपकी कोई गलती नहीं थी अगर आप यह बात नहीं कहती तो जरूर कोई ना कोई कह देता और डिवोर्स तो हम दोनों के बीच में कभी ना कभी तो होना ही था फिर आज क्यों नहीं मैंने तो सिर्फ आपको इसलिए बुलाया है ताकि मैं आपको यह बात बता सकूं मैंने एक फैसला लिया है कि मैं राम को अब यहां से कहीं नहीं लेकर जाऊंगी मैं राम के साथ यहीं पर रुकूंगा मैं कार्तिक को और परेशान नहीं करना चाहती तभी विधि का कहती है कि जब आपने फैसला ले ही लिया है तो आप मुझसे क्या पूछ रही है|

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वेदिका इतने में वहां से जा रही होती है तभी उसकी नजर नायरा राम और कार्तिक की फोटो पर पड़ जाती है तभी नायरा यह देख कर चौक जाती है वेदिका की आंखों में उस फोटो को लेकर आंसू आने लगते हैं और वेदिका वहां से रोते हुए चली जाती है नायरा अपने घर वालों के पास जाती है और उन्हें अपनी फैसले के बारे में बता देती है कि वह अब राम को लेकर जहां से गोवा नहीं जाएगी तभी दोनों दादी बहुत ही ज्यादा खुश हो जाती हैं और नायरा से कहती है कि तुमने ही बहुत ही अच्छा फैसला किया है|

नक्श नायरा और राम की टिकट को निकालता है और कहता है कि मैं अब इन्हें कैंसिल करवा देता हूं इतनी देर में वहां पर किसी का फोन आ जाता है और नक्श उस फोन को रिसीव करके वहां से उन टिकट को छोड़कर चला जाता है इतने में वहां पर राम अब आता है और उसकी नजर उन टिकट पर पड़ जाती है राम यह टिकट को देख कर डर जाता है और कहता है कि मैं गोवा वापस नहीं जाऊंगा इस टिकट में तो पापा का नाम है ही नहीं बस मेरा और मम्मा का नाम है मैं गोवा नहीं जाऊंगा|

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राम अपने भाई वंश को कॉल लगाता है और उसे सारी बातें बता देता है कि मां मुझे लेकर गोवा जा रही हैं लेकिन मैं गोवा नहीं जाना चाहता मेरी माई जब से यहां पर आई है वह रोती ही रहती हैं जब हम दोनों गोवा में थे तो मां परेशान तो होती थी लेकिन कभी रोती नहीं थी लेकिन जब से वह यहां पर आई हैं तब से वह रो ही रही है वंश राम से कहता है कि इसका मतलब तुम जा रहे हो राम कहता है कि मैं गोवा नहीं जाऊंगा मुझे यहीं पर रहना है पूरे परिवार के साथ मेरे पापा सबसे तो अच्छे से बात करते हैं पता नहीं मेरी मां को ही रुलाते रहते हैं|

वंश कहता है कि मेरे पापा भी सब से बहुत ही अच्छे से बात करते हैं लेकिन जब मेरी बारी आती है तो मुझसे हमेशा गुस्से में बात करते हैं राम कहता है कि क्या सारे पापा ऐसे ही होते हैं वंश मुझे कैसे पता होगा मेरे तो पापा एक ही है राम वंश से पूछता है कि अब आप मुझे बताइए कि मैं कैसे गोवा जाने से रुकूं वंश कायरा को आईडिया देता है कि वह बीमारी का बहाना लगा सकता है और फिर मासी तुम्हें लेकर गोवा नहीं जाएंगे राम कहता है कि यह बहाना कैसे लगाते हैं वंश कहता है कि अगर मुझे भाना लगाना ही आता तू मैं स्कूल जाने के टाइम पर बाना नहीं लगा देता तभी राम कहता है कि फिर मुझे क्या करना चाहिए वंश राम को बताता है कि तुम एक काम करो अपने आप को चोट लगा लो फिर मासी तुम्हें कहीं नहीं लेकर जाएंगे राम यह सारी बातें सुनकर सोचने लगता है|

दादी सारे घरवालों को बताती है कि नायरा के घरवालों ने हमें रात के डिनर के लिए इनवाइट किया है और वहां पर दशहरा भी हम बनाएंगे सारे घर वाले यह बात सुनकर बहुत ज्यादा खुश हो जाते हैं तभी दादी कहती है कि नायरा के घरवालों ने हमसे सुला करने की पहल कर दी है लेकिन पता नहीं हम नायरा से नजर कैसे मिला पाएंगे क्योंकि नायरा को हमने जाने कितना बुरा भला कहा है उसे कितना गलत समझा था लेकिन हम अपने रिश्ते को पुराने जैसा फिर से बनाएंगे तभी कार्तिक के पिता कहते हैं कि हम आप सही कह रही हैं हम अपने इस रिश्ते को दोबारा एक और चांद देंगे और इस बार कोई गलती नहीं होगी|

इतने में कार्तिक के बाद नायरा का मैसेज आ जाता है कि वह राम को लेकर नहीं जा रही है तभी कार्तिक बहुत ही ज्यादा खुश हो जाता है और यह खुशखबरी सारे घरवालों को देता है और सारे घर वाले यह बात सुनकर बहुत ही ज्यादा खुश हो जाते हैं कार्तिक कहता है कि अब वह बहुत ही ज्यादा खुश हूं मन कर रहा है कि आज ही सारे त्यौहार बना लूं तभी गायु कहती है कि इस बीच में हमने एक भी बार विधि का के बारे में नहीं सोचा|

दादी कहती है कि वेदिका को क्या परेशानी होगी वह भी बहुत ही ज्यादा खुश होगी जब कार्तिक उतना खुश देखेगी तो मुझे लगता है विधि का को इससे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए तभी दादी कार्तिक से कहती है कि अब तुम्हारी सारी समस्याएं खत्म हो चुकी है अब तुम वीरिका को थोड़ा टाइम भी दे पाओगे लेकिन काटते कुछ जवाब नहीं दे पाता और वहां से कहता हुआ निकल जाता है कि मुझे दशहरे की तैयारी भी करनी है तभी कार्तिक के पिता दादी से कहते हैं कि कार्तिक ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया|

दादी कहती है कि पीछे सब कुछ ठीक हो जाएगा वेदिका कहती है कि मुझे सारे घर वालों को सब कुछ बता देना चाहिए क्योंकि मुझे सारी घरवालों का मूड सही लग रहा है तभी वेदिका कार्तिक की मां के पास जाती है और कार्तिक की मां पूजा की तैयारी कर रही होती है अभी कहां पर आती है और बात करने की कोशिश करती है लेकिन कार्तिक की मां से तैयार होने के लिए बोल देती है और उससे कहती है कि हमें सिंघानिया उस जाना है जल्दी से तैयार होकर वहां पर पहुंच जाना|

कार्तिक की मां इतना कहकर वहां से चली जाती है वेदिका वहां पर एक पेपर पर अपनी सारी बातें लिख रही होती है तभी वहां पर उसी आदमी का कॉल आने लगता है थोड़ी देर के बाद सारे घर वाले नायरा के घर पहुंच जाते हैं राम जैसे ही वहां पर सारे घरवालों को देखता है तभी वह बहुत ही खुश हो जाता है और भागते हुए अपने भाई से मिलता है तभी कार्तिक और उसे एक कार्तिक के हाथों में दे देते हैं तब ही राम को पुरानी बातें याद आने लगती है कि वह हमेशा उसकी मां को रुलाते ही रहते हैं और राम कार्तिक को घूरने लगता है|

कार्तिक जैसे ही राम से बात करने की कोशिश करता है लेकिन राम वहां से उतर कर चला जाता है कार्तिक सारे घरवालों से कहता है कि आखिर इसे हुआ क्या है तभी कार्तिक के पिता कहते हैं कि तुम भी बचपन में इसी तरह मुझे बहुत ही अदा परेशान करते थे अब तुम्हारा बेटा तुम्हें परेशान कर रहा है अब तुम देखो कि कैसा लगता है तभी नायर आगे बढ़ती है और दादी के पैर छू लेती है और उन्हें दशहरे की बधाई देती है दादी नायरा से माफी मांगती है और उससे कहती है कि मैंने जो भी तुमसे कहा मुझे इस तरह से तुमसे कहना नहीं चाहिए था नायरा कहती है कि दादी गलती दोनों तरफ से ही हुई थी कुछ मैंने गलती की और कुछ आपने गलती की लेकिन हमें इस बारे में नहीं सोचना चाहिए और एक नई शुरुआत कर लेनी चाहिए

सारे घर वाले अंदर आ जाते हैं नायरा कार्तिक सेविका के बारे में पूछती है कार्तिक दीदी का के बारे में बताता है कि वह किसी काम से बाहर गई है कुछ टाइम के बाद वहां पर पहुंच जाएगी तभी नायरा कार्तिक से बाहर रावण के पुतले को ठीक करने के लिए बोल देती है कार्तिक वहां से चला जाता है तभी कार्तिक की मां भाभी मां से कहती है कि आपने पहल करके अपना बड़प्पन दिखा दिया है अब हम सब को भी पुरानी बातें भूल कर आगे बढ़ना चाहिए|

कार्तिक जब रावण के पुतले को ठीक कर रहा होता है नायरा कार्तिक की हेल्प करने के लिए आ जाती है कार्तिक नायरा को देखकर पुरानी बातें याद करने लगता है नायरा कार्तिक को कहती है कि इस पर टेप चुकाना है क्या तुम टेप दे सकते हो कार्तिक नायरा के ख्यालों में खोया रहता है और टैब को उठाकर नायरा के हाथों समय उस पतली पड़ चुका देता है नायरा कार्तिक को देखकर कहती है कि यह तुमने क्या किया नायरा जैसे ही अपने हाथ को उठाती है तब उतने पर जितनी भी डेकोरेशन की होती है वह छूट जाती है|

कार्तिक यह सब देख कर खुश हो जाता है और नायरा की हंसी उड़ाने लगता है नायरा कार्तिक से कहती है कि तुम मुझे भी क्या हंसी उड़ा रहे हो मैं तो एक तो तुम्हारी यहां पर मदद करने के लिए आई हूं कार्तिक नायरा से कहता है कि मैं तुम्हारी मदद कर रहा हूं कि तुम मेरी मदद करने के लिए आई हूं नायरा कार्तिक से कहती है कि इसमें क्या बात है दोनों बात ही तो एक ही है नायरा कार्तिक से कहती है कि हम दोनों इस तरह से लड़ते रहते हैं हम एक काम करते हैं आज के दिन इस रावण के पुतले के जलने के साथ-साथ अपने अंदर की सारी कड़वाहट भी इसमें जला देते हैं|

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