Nazar Written Update 2 December 2019 In Hindi

Nazar Written Update 2 December 2019 Today Episode में आप सब देखेंगे कि कैसे मोहना जब अपने कमरे में सामान को बैग में लगा रही होती है तभी वहां पर बहुत ज्यादा है और मोहना अंश को देख कर चौक जाती है तभी उससे कहती है कि तुम यहां पर मरने के लिए आ गई अंश मोहना से कहता है कि हां मैं तुम्हारे सामने खुद ब खुद आ गया तभी अंश अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करता है और वहां पर डायन वृक्ष को बुला लेता है मुंह ना जैसे ही अंश को डायन वृक्ष को बुलाते हुए देखती है तभी वह चौक जाती है अंश जैसे ही वहां पर डायन वृक्ष को बुलाता है और डायन वृक्ष के अंदर अक्षत होता है और उसे बाहर निकाल कर मोहना के सामने आता है ।

मोहना अंत से कहती है कि तुम्हें अक्षत को मारने के बाद भी तुम उसे परेशान करना नहीं छोड़ रही हो इतनी देर में अंश अंगद को लेकर वहां से चला जाता है मोहना अंश को देख कर चौक जाती है और अपने सामान के साथ ही अंश का पीछा करने लगती है अंश अंगद को ले जाकर पाताल केतकी झरने के पास चला जाता है और उस धरने के बीच में जाकर खड़ा हो जाता है मोहना भी उसी जगह पहुंच जाती है तभी वहां पर जो पुल बना होता है वह टूटने लगता है मोहना आन से से कहती है कि तुम अंगद पूजा पर लाकर तुमने गलती कर दी है तभी आन संगत को मोहना के सामने फेंक देता है और मोहना से कहता है कि मैं अंगद को यहां पर लेकर ही नहीं आया बल्कि मैं तो तुम्हें यहां पर अपने पीछे लाना चाहता था ।

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मोहना अच्छे से कहती है कि तुम जानते हो ना कि कौन सी जगह है इस जगह से मैं क्या तो तुम भी बाहर नहीं जा सकते क्योंकि तुम नहीं अपने पंखों को अंगद के मारने में निकाल कर फेंक दिए थे तभी अंश कहता है कि हां मैं जानता हूं कि तुम्हारे साथ साथ मैं भी यहां से नहीं जा सकता इसलिए तो मैंने तुम्हें यहां पर लेकर आया हूं क्योंकि मैं यह अच्छी तरीके से जानता हूं कि मुझ पर एक गलती हुई है मैंने एक बेकसूर की जान ली है और उसी गलती का पश्चाताप करने के लिए मैं तुम्हारे सामने खड़ा हूं तुम मुझे मारना चाहती हूं तो मार सकती हूं इससे तुम्हारा बदला भी पूरा हो जाएगा और मेरा पश्चाताप भी पूरा हो जाएगा।

मोहना कहती है कि तुम मुझे पाताल झरने के पास इसीलिए लेकर आए हो क्योंकि तुम मुझे अच्छी तरीके से जानते हो कि मैं तुमसे बदला लेने के बाद तुम्हारे घरवालों को नहीं छोडूंगी और तुम मुझे चाहते हो कि मैं तुमसे बदला लूं और घर वालों के पास पहुंच ही ना पाऊं तभी अंश कहता है कि हां मैं यह जानता हूं कि तुम अपना बदला पूरा करने के लिए मेरे घर वालों को हम करने की कोशिश करोगी इसलिए तो मैं तुम्हें यहां पर ले कर आया हूं ताकि तुम अपना बदलाव सिर्फ मुझसे ले सकूं मेरे घर वालों से नहीं पिया अपने दोनों बच्चों से पूछती है कि मैं जानती हूं कि तुम दोनों को सब कुछ पता है कि आखिर तुम्हारे पापा कहां है लेकिन तुम मुझे बता नहीं रहे हो तुम मुझे बताओ कि आखिर अंश है कहां तभी दोनों बच्चे मना कर देते हैं ।

कुछ भी बताने से क्योंकि उन्होंने अंश को वादा किया होता है तभी वह पिया से कहते हैं कि नहीं मां हम तुम्हें कुछ भी नहीं बता सकते क्योंकि हमने पापा से वादा किया है तभी पिया उनके सामने रोने लगती है आदि से कहती है कि हम मां को कुछ नहीं बता सकते क्योंकि हम दोनों ने पापा से वादा किया है मैं अगर जो तुम्हें बताऊं तुम अगर वह बातें मां को बता दूं इससे पापा का वादा भी नहीं टूटेगा तभी फरियादी को बताती है कि तुम मां को बता दो कि पापा पाताल झरने के पास गए हैं आदि अपनी मां को बता देता है कि पापा पाताल झरने के पास गए हैं पिया यह सब सुनकर चौक जाती है निशांत जी और सेबी दिलरुबा का वेट कर रहे होते हैं अब तुम रहोगे ।

दिलरुबा निशांत जी के हाथों में हथियारों को देखती है उन दोनों से कहती है कि आप दोनों हमें मारना चाहते हुए भी कहती है कि तुम यह बताओ कि आखिर तुम इतने दिनों से कहां और नमन के साथ क्यों लौटी हो और नमन की हालत इस तरह क्यों है तभी दिलरुबा कहती है कि मैं अपने पति के साथ घूमने के लिए गई थी तभी निशांत जी दिलवा से कहते हैं कि मैं जानता हूं कि तुम झूठ बोल रही हो तुम सच बताओ क्या फिर तुम ठीक कहां दिलरुबा डर के मारे सब कुछ बता देती है कि वह अपने पति को छुड़ाने की तैयारी कर रही थी क्योंकि उसे मोहना ने बंदी बना लिया था और मुझे धमकी दी थी अगर मैं उसका साथ नहीं दूंगी तो वह मेरे पति को मार देगी ।

निशांत जी कहते हैं कि तुमने यह सारी बातें पहले मुझे क्यों नहीं बताई दिलरुबा कहती है कि मैं बहुत ज्यादा डर गई थी इसलिए मैंने मोहना की मदद करने के लिए उसे धातु हथियार दे दिया था निशांत जी यह बात सुनकर जाते हैं निशांत जी और दिलरुबा उसके पास जाने के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं क्योंकि पुल टूट चुका है पिया कहती है कि वहां पर जाने का कोई और दूसरा रास्ता नहीं है निशांत जी कहते हैं कि वहां पर कोई और दूसरा रास्ता जाने का नहीं है पिया डर जाती है और कहती है कि फिर वहां से अंश कैसे लौटेगा निशांत जी कहते हैं कि मुझे लगता है अंश जान पूछ कर मोहना को वहां पर लेकर गया है वह जानता है कि वह मोहना को अगर वहां पर लेकर जाएगा तो वह दोनों वहां से लौट कर नहीं आ सकती मुझे लगता है।

मोहना वहीं पर अंश पर हमला करेगी उसी त्रिकूट धातु से दिलरुबा इसके बाद बताती है कि मोहना अंश को मारना नहीं चाहती बल्कि मैंने जो बाल मोहना को ला कर दिया था वह अंशिका नहीं था बल्कि परीकथा निशांत जी यह बात सुनकर चौक जाते हैं और कहते हैं कि यह बात तुमने हमें पहले क्यों नहीं बताई पिया कहती है कि परी को बचाने का कोई और रास्ता नहीं है निषाद जी कहते हैं कि नहीं एक बार धातु के ऊपर जिसका भी बाल बांध दिया जाता है वह तीर सिर्फ उसी को जाकर लगता है और उस तीर को कोई भी नहीं रोक सकता दिलरुबा बताती है कि उस तीर को रोकने के लिए हमें बहुत बड़े चुम्मा की जरूरत पड़ेगी क्योंकि वह धातु लोहे का बना हुआ है निशांत जी कहते हैं कि दिलरुबा पूरी तरह से ठीक कह रही है हमें मौत बड़े चमक की जरूरत पड़ेगी और वह चमक लाने के लिए दिलरुबा और निशांत जी भेज देते हैं और पिया से कहते हैं कि हमें घर चलना चाहिए ।

परी के रक्षा कवच बना देना चाहिए ताकि वह कहती है कि मैं आपके साथ नहीं चल सकती क्योंकि मैं जानती हूं कि अब क्या करने वाला है और मैं मुझे यही पर रुकना होगा की मदद करने के लिए अंश को जब पता चलता है कि मोहना के इरादे कुछ और ही हैं तभी मोहना अंश को सारी सच्चाई बता देती है कि वह उसे मारने के लिए नहीं आई है बल्कि वह परी को मारेगी अंतर जाता है और मोहना से कहता है कि तुम ऐसा नहीं कर सकती तभी मोहना कहती है कि मेरे अंगत ने भी तो तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगड़ा है फिर भी तुम ने उसकी जान ली थी इसलिए मैं भी तुम्हारी जान जाने की परी की जान ले लूंगी तब तुम्हें पता चलेगा कि अपनों का दूर जाने का दर्द क्या होता है ।

मोहना इतनी देर में तीर चला देती है निशांत जी घर पहुंचते और सारी सच्चाई घर वालों को बता देते हैं और कहते हैं कि लेकिन हमें उससे पहले यह पता लगाना होगा कि आखिर वह तीर किस जगह से आने वाला है तभी मुनीर को छोड़ देती है और वही दे लगने के लिए वहां पर पहुंचने वाला होता है तभी आदि तीर को देख लेता है और सारे घरवालों को स्टील के बारे में बता देता है कि वह तीर उस जगह से आने वाला है सारे घर वाले तीर को आते देख डर जाते हैं।

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