Divya Drishti Written Update 4 January 2020 In Hindi

Divya Drishti Written Update 4 January 2020 Today Episode एपिसोड में अब तक आपने देखा दिव्या और दृष्टि चिंकी पर शक करती है और उसके पीछे डिग्री में चली जाती है वहां पर जाकर देखती है कि पिशाचनी चिंकी को मार रही होती है दिव्य दृष्टि वहां पर आकर चिंकी को बचाते हैं और पिशाचनी को मारने लगती हैं तभी दिव्या की नेचर वहां पर पड़े अपनी मां की किताब के का एक पन्ने पर पड़ जाती है दिव्या उस पन्ने को उठाने के लिए जैसे ही आगे बढ़ती है तभी पिशाचनी उसके पास चली जाती है और उसे पहले ही उठा लेती है और उसे खा जाती है दिव्य दृष्टि यह सब देखकर गुस्से में आ जाती है और पिशाचनी पर हमला कर देती हैं सीता को हवा में उड़ा कर नीचे फेंक देती हैं और वहां से चिंकी को लेकर चली जाती है दिव्य दृष्टि चिंकी को स्विमिंग पूल के पास लेकर जाती हैं और चिंकी से दृष्टि पूछती है कि क्या तुम पर सचमुच लाल चकोर ने हमला किया था

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जिनकी कहती है कि हम उसने मुझ पर सचमुच में हमला किया था दिव्या कहती है कि इसलिए तुम्हें उस तलवार की जरूरत पड़ी चिंकी घबराने लगती है और घबराते हुए जवाब देती है कि हां हां लेकिन जब मैंने उस तलवार को उठाया था तभी वहां पर पिशाचनी आ गई थी और उसने मुझे डरा कर और धमका कर उस तलवार को चोरी करवाया था दिव्या उस किताब के बारे में कहती है कि तो तुमने उस किताब को भी इसलिए चोरी किया क्योंकि पिशाचनी ने तुमसे कहा था चिंकी और भी ज्यादा घबरा जाती है और घबराते हुए लड़खड़ाते हुए जवाब देती है कि नहीं मैंने उस किताब के बारे में सुना था वह तुम्हारी मां की किताब है यह बात सुनकर दृष्टि गुस्से में आ जाती है और चिंकी पर हमला कर देती है।

दिव्य दृष्टि को जब चिंकी पर शक हो जाता है और उसे अपनी शक्तियों की मदद से हवा में उड़ा देती है और उसे कहती है कि अब हमें तेरे बारे में सब कुछ पता लग चुका है कि तू पिशाचनी और उस लायक ओर से मिली हुई है आखिर तू ही हमें अब लालपुर तक पहुंचाएगी और तू यह सोच रही होगी कि तुझ पर हमें सब कैसे हुआ तभी दिव्या उसके कंधे से कपड़े को हटा देती है तभी वहां पर लाल चकोर का निशान बना होता है चिंकी यह सब देख कर चौक जाती है दिव्य दृष्टि चिंकी को सुमिंग पुल के ऊपर लेकर जाती है और उससे कहती है कि तेरे तो हाथ हमने पहले ही बांध दिए हैं अब हम तुझे सुमिंग पूल में डूबा डूबा कर मारेंगे दिव्या और दृष्टि चिंकी को जब स्विमिंग पूल में डाल रही होती हैं तभी वहां पर चित्र पहुंच जाती है और उन दोनों से कहती है कि हां हम दोनों मिले हुए हैं उस लाल चकोर से दिव्य दृष्टि चित्र को देखकर भी गुस्सा हो जाती है और उस पर हमला कर देती है दिव्य दृष्टि से लाल चकोर के बारे में पूछती है लेकिन चीन की कुछ भी जवाब नहीं दे पाती तभी वहां पर लाल चकोरा जाती है दिव्यदृष्टि उसे देख कर चौक जाती हैं और उस पर शक्तियों का इस्तेमाल कर रही होती है लेकिन लाल चकोर पर दिव्य दृष्टि की शक्तियां काम नहीं कर पाती यह सब देखकर पिशाचनी कहती है कि क्या हुआ तुम दोनों की शक्तियां लाल चकोर के आगे काम नहीं कर रही है लाल चकोर की शक्तियां सबसे बड़ी शक्तियां हैं तुम सोच भी नहीं सकते कि वह क्या-क्या कर सकती है।

दिव्य दृष्टि लाल चकोर पर फिर भी हमला कर रही होती है तभी लाल चकोर घर के अंदर चली जाती हैं और वहां पर दिव्यदृष्टि लाल चकोर को देखकर गुस्से में आ जाती हैं और उस ऊपर घर के सामानों को फेकने लगती है थोड़ी देर के बाद रक्षित और शिखर दिव्य दृष्टि को रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन दोनों में से कोई भी रुकने के लिए तैयार नहीं होता तभी दिव्य दृष्टि के ऊपर सामान जब गिरने वाला होता है तभी रक्षित और शिखर दिव्य दृष्टि को बचा लेते हैं दिव्या की नजर वहां पर पड़े लाल चकोर के पंख पर पड़ जाती है दिव्य दृष्टि से कहती है कि लाल चकोर हो रही दिव्य दृष्टि जैसे ही वहां पर जाती है वहां पर जाकर देखते हैं कि वह तो सिर्फ एक लाल चकोर का पंख होता है तभी वह हवा में उड़ने लगता है और उस पंक्ति की मदद से वहां पर लिख जाता है कि इसका जवा तो जरूर मिलेगा दिव्य दृष्टि यह सब देख कर चौक जाती है तभी पिशाचनी चिंकी के पास जाती है और उसे वहां से अपने देवरी में ले जाती है रक्षित और शिखर दिव्य दृष्टि के पास जाते हैं और उनसे बात करने की कोशिश करते हैं दिव्यदृष्टि लाल चकोर के भाग जाने पर बहुत ही अदा दुखी होती है तभी वह दोनों से कहती हैं कि हम दोनों को अकेला छोड़ दो हम कुछ टाइम के लिए अकेला रहना चाहते हैं दिव्यदृष्टि वहां खड़े होकर बहुत ही ज्यादा दुखी होती है रक्षित और शिखर कमरे में जाते हैं तभी रक्षित दृष्टि और दिव्या को लेकर बहुत ही अदा परेशान होता है तभी शिखर रक्षित से कहता है कि वह दोनों इसलिए अकेले रहना चाहती हैं क्योंकि वह वह दोनों बहुत ही ज्यादा दुखी हैं यह मैं अच्छी तरीके से समझ सकता हूं क्योंकि बचपन से भी मैं अकेला रहा हूं वह अपनी मां की किताब को जलने की वजह से ही दुखी हैं इसलिए मुझे लगता है हम दोनों को जाकर उन दोनों से बात करनी चाहिए रक्षित कहता है कि तुम यहीं पर रुको मैं खुद जाकर बात करूंगा यह बात सुनकर शिखर कहता है कि नहीं मैं भी दिव्या से बात करने जरूर जाऊंगा।

दिव्य दृष्टि के पास शिखर की मां और सिमरन की मां वहां पर आ जाते हैं सिमरन भी वहां पर होती है तभी दिव्य दृष्टि को दुखी देखकर सिमरन उन दोनों से कहती है कि हम तो यहां पर सिर्फ आवाज को सुन कर आए थे किसी के तोड़फोड़ की आवाज आ रही थी यहां पर इतना सामान बिखरा हुआ है हम सोच रहे हैं कि हमेशा मन को समेट लेते हैं सिमरन एक चीज को उठाती है अचानक से वो टूटने लगती है तभी दिव्या सारे सामान को सेट करने लगती है और दिव्य दृष्टि उन तीनों से कहती है कि आप चिंता मत कीजिए यह सामान हम नहीं खराब किए हैं और हमें इन सब को सेट कर देंगे दिव्यदृष्टि अपनी शक्तियों की वजह से सारे घर को दोबारा सेट कर देते हैं तब तीनो दोनों के पास आते हैं उन्हें संभालने की कोशिश करते हैं सिमरन कहती है कि रक्षित भैया और शिखर भैया आप दोनों को कमरे में बुला रहे हैं आप दोनों से बात करना चाहते हैं दिव्यदृष्टि कहते हैं कि हम अभी उनसे कोई भी बात नहीं करना चाहते क्योंकि हम अकेले रहना चाहते हैं दिव्यदृष्टि स्विमिंग पूल के पास चली जाती है और वहां पर जाकर अपनी मां की किताब को जलने की वजह से बहुत ही अदा दुखी होती है दिव्या कहती है कि एक ही तो चीज थी जिसकी वजह से हम अपनी मां से मिल सकती थी लेकिन वह भी उस पिशाचनी की वजह से हमारे पास नहीं है हम मुझे तो मन कर रहा था कि मैं उस पिशाचनी को मार ही डाला इसलिए मैं इतने गुस्से में आ गई थी दृष्टि भी कैसी है किसी बात के लिए गुस्से में आ गई थी और मैंने अपना कंट्रोल खो दिया ।

दिव्य दृष्टि एक दूसरे का हाथ पकड़ती हैं तभी वहां पर रहस्य तारा आ जाता है दृष्टि उसे देखकर दिव्या से कहती है कि वह सितारा हमसे कुछ कहना चाहता है रहस्य तारा में से आवाज आती है तुम्हारे पास उस गुफा में जाने के लिए ज्यादा वक्त नहीं है तो मैं जल्द से जल्द गुफा में जाना होगा पूर्णमासी की रात तक अगर तुम उस गुफा में नहीं गई तो तुम उस गुफा में जाने की सारी शक्तियां खो दोगी यह बात सुनकर दृष्टि अपने हाथों में रहस्य तारा ले लेती है और दिव्या से कहती है कि यह बात हमें रक्षित को बता देनी चाहिए की हमें उस गुफा में जाना ही होगा दृष्टि रक्षित के पास जाती है और उससे रहस्य सतारा के बारे में बताती है कि हमें उस गुफा में जाना ही होगा हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है पूर्णमासी की रात तक अगर हम उस गुफा में नहीं गए तो हम उस घुमा में कभी भी नहीं जा पाएंगे और हमें सच्चाई पता लगाने के लिए उस गुफा में जाना ही होगा रक्षित अपनी बहन के बारे में सोचने लगता है और दृष्टिकोण से कहता है कि तुम भूल गई हो कि हमने मां से वादा किया है कि हम उस गुफा में कभी भी नहीं जाएंगे दृष्टि लेकिन फिर भी जिसे पड़ती है कि नहीं हम उस गुफा में नहीं जा सकते रक्षित अपनी बहन की बात करता है कि तुम भूल गई हो कि उस गुफा में जाने से कितना खतरा है हम पहले जब गए थे तो मैंने अपनी बहन खो दी थी इसलिए मैं कुछ भी और खोना नहीं चाहता इसलिए हम उस गुफा में नहीं जाएंगे दृष्टि कहते हैं कि तुम मेरी बात समझने की कोशिश करो मैं समझ सकती हूं कि तुम्हारे दिल पर क्या गुजर रही है उसके लिए सॉरी लेकिन मुझे ऐसा लग रहा है अगर हम उस गुफा में नहीं गए तो बहुत कुछ गलत हो सत्ता है।

सिमरन की मां इतनी देर में वहां पर आ जाती है और दृष्टि उन्हें देख कर चौक जाती है उसे ऐसा लगता है कि कहीं ऐसा ना हो चाची ने हमारी बात सुन ली हो लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं सुना होता और वह दृष्टि से कहती है कि मैं तुम्हारे लिए पानी लेकर आई हूं मैं इसे रख देती हूं दृष्टि उनके पास जाती है और उनसे कहती है कि आपको यह सब करने की जरूरत नहीं थी मैं छोटी हूं तो मुझे को ही सारे काम करने चाहिए थे रक्षित की चाची कहती है कि कोई बात नहीं मैंने कर दिया तो इतना कहकर रक्षित की चाची वहां से चली जाती है दृष्टि कहती है कि अच्छा हुआ इन्होंने हमारी बात नहीं सुनी तभी वो रक्षित के पास जाती है और उस गुफा के बारे में बात कर रही होती है तभी अचानक दृष्टि को नींद आने लगती है रक्षित दृष्टि से कहता है कि अभी एक काम करो तुम सो जाओ तुम्हें बहुत ही तेजी से नींद आ रही है इतना कहकर रक्षित दृष्टि को सुला देता है और खुद भी वहीं पर सो जाता है दिव्या जब अपने कमरे में होती है तभी उसे अचानक लाल चकोर की आवाज आने लगती है और वह खिड़की के पास जाती है लेकिन वहां पर कोई भी नहीं होता दिव्या अपने बेड पर आती है और लाइट बंद करके लेट जाती है और कहती है कि लाल चौक और अगर तुझ में हिम्मत है तो सामने से बाहर करना इतना कहकर दिव्या सो जाती है तभी वहां पर लाल चकोर आती है और देखती है कि दिव्या भी सो रही है इतना देखकर वहां से वह चली जाती है।

पिशाचनी और चिंकी जैसे ही देवरी में जाते हैं वहां पर लाल चकोरा जाती है और उन दोनों से पूछती है कि आखिर इसकी सच्चाई सारे घर वालों के सामने आई कैसे थोड़ी देर के बाद लाल चकोर पिशाचनी को अपने वश में कर लेती है और लाल चकोर पर हमला कर देती है और उससे कहती है कि तुझे एक काम दिया गया था तुझ पर वह भी नहीं हुआ तुझे इस तरह से उस तलवार को लेकर नहीं घूमना चाहिए था अब तुम्हारी सच्चाई सबके सामने आ गई है और मैं आगे क्या करना है यह बात मैं तुम्हें आज रात को बताऊंगी पिशाचनी और चिंकी रात को जंगल में जाते हैं और वहां पर जाकर लाल चकोर की कही हुई जगह पर एक पेड़ को गाड़ देते हैं पिशाचनी चिंकी से कहती है कि अब आगे तुम्हारा काम है चिंकी उस पेड़ पर रोने लगती है जिससे वह पेड़ बढ़ने लगता है पिशाचनी कहती है कि अब जैसे ही सुबह होते ही इस पर पहली सूरज की रोशनी पड़ेगी वैसे ही से पेड़ बड़ा होता जाएगा और इसमें से लाल कलर के बीज नीचे गिरने लगेंगे और बीज से क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा सुबह होते ही रक्षित और दृष्टि कमरे में जब सो रहे होते हैं तभी अचानक रक्षित और दृष्टि के मुंह पर सूरज की रोशनी पड़ने लगती है जिसकी वजह से रक्षित नींद से उठ जाता है और दृष्टि को उस रोशनी की वजह से परेशान होते हुए देखता है और वह खिड़की को बंद करने के लिए चला जाता है कितनी देर में वहां पर लाल चकोरा जाती हैं रक्षित उस लाल चकोर को देखता है और कहता है कि यह तो दृष्टि के पास ही जा रही है जैसे ही वह अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने वाला होता है तभी लाल चकोर बेड पर उसी बीच को डाल कर चली जाती है।

रक्षित कहता है कि यह लाल चकोर यहां पर आई क्यों थी और बिना कुछ करे चली क्यों गई रक्षित दृष्टि के पास जाता है अचानक से उसका हाथों से लाल बीज पर पड़ जाता है रक्षित दृष्टि को रजाई जब उड़ा रहा होता है तभी अचानक उसे म्यूजिक की आवाज आने लगती है और वह उसके पीछे वहां से चला जाता है देखने के लिए कि आखिर ये आवाज आकाश रही है तभी सीढ़ियों से शिखर भी वहां पर आ जाता है और रक्षित से कहता है कि आखिर जी आवाज किस चीज की है हम चल कर देखते हैं रक्षित और शिखर उस आवाज का पीछा करते हुए स्टोर रूम में चलाए जाते हैं दृष्टि जब सो रही होती है तभी वहां पर रक्षित का डुप्लीकेट दृष्टि के बगल में सो जाता है और शिखर का डुप्लीकेट सीढ़ियों से नीचे उतरने लगता है और उसके ऊपर भी लाल कलर का भी जुड़ जाता है रक्षित और शिखर स्टोर रूम में जाते हैं और वहां पर जाकर देखते हैं कि सारे घर के फोटो फ्रेम क्या कर रहे हैं शिखर अपनी और रक्षित की फोटो देखता है तभी वह रक्षित से कहता है कि यह फोटो सबसे ज्यादा अच्छी लग रही है अचानक से दरवाजा बंद हो जाता है रक्षित उसे खोलने की कोशिश करता है बाहर चिंकी होती है जिसमें दरवाजा बंद किया होता है दिव्या अपने कपड़ों को जब ढूंढ रही होती है तभी वहां पर से करा जाता है और वहां पर गंदे कपड़े पटक देता है दिव्या कहती है कि सारे धुले हुए कपड़े हैं यह गंदे कपड़े नहीं है शिखर दिव्या से पूछता है कि क्या हुआ तुम क्या ढूंढ रही हो दिव्या बताती है कि मैं यहां पर अपना एक लाल कलर का टॉप देख रही हूं वह मुझे यहां पर नहीं मिल रहा है सीकर कहता है कि तो ठीक है मैं उसे किसी और की कमरे में देख लेता हूं हो सकता है किसी और के कमरे में चला गया हो शिखर से पहले तो दिव्या मना कर देती है लेकिन शिखर कहता है कि नहीं मैं तुम्हारा टॉप देखी लेता हूं इतना कहकर से कर वहां से चला जाता है।

दृष्टि अपने कमरे में जब सो रही होती है तभी अचानक उसकी नींद खुल जाती है और वह देखती है कि सारी रजाई को रक्षित ने ले लिया है और वह रक्षित से लड़ने लगती है और उसे कहती है कि तुम इतने सेल्फिश कब से हो गए जो सिर्फ अपने बारे में सोच रहे हो तुमने पूरी रजाई क्यों ली रक्षित का बढ़ता कुछ अलग ही होता है तभी वह दृष्टि से कहता है कि मेरी वैसे भी बहुत तेज तबीयत खराब है तुम यहां से जा सकती हो मेरा दिमाग खराब मत करो लिस्ट कहती है कि क्या करूं मैं तुम्हारे पैर दबा दूं या कोई और फरमाइश है वह भी बता दो तभी वहां पर रक्षित की चाची आ जाती है और दृष्टि से कहती है कि क्या हुआ तुम दोनों क्यों लड़ रहे हो नीचे हमें पार्टी की भी तैयारी करनी है दृष्टि कहती है कि हम दोनों तो ऐसे ही लड़ रहे थे पता नहीं सुबह उठते ही इनका मूड कैसे खराब हो गया है रक्षित की चाची कैसी है कि हमें पार्टी की तैयारी करनी है इसलिए मैं तुम्हें यहां नीचे बुलाने के लिए आई हूं चाची रक्षित से चलने के लिए कहती है रक्षित चलने से मना कर देता है और उन दोनों को वहां से जाने के लिए कह देता है दृष्टि और सारे घर वाले मिलकर जब पार्टी की तैयारी कर रहे होते हैं तभी अचानक वहां पर रक्षित आ जाता है और सारे घर वालों से कहता है कि यहां पर पार्टी की तैयारियां हो रही है और मेरे बगैर सारे घर वाले रक्षित को वहां पर देख कर चौक जाते हैं तभी दृष्टि कहती है कि आप ही ने तो मना किया था कि आप यहां पर नहीं आना चाहते रक्षित कहता है कि मैं भी इस तैयारी में शामिल होगा तभी वहां पर शिखर भी आ जाता है दिव्या शिखर से पूछती है कि क्या हुआ तुम्हें लाल टॉप नहीं मिला सीकर कहता है कि मैं तुम्हारा लाल टॉप क्यों दूंगा मैंने तुम्हारा लाटॉप नहीं सुना है इतना कहकर दिव्या चौक जाती है।

सारे घर वाले ही मिलकर कहते हैं कि हमें इस घर में सारे फोटो फ्रेम को लगा देना चाहिए करके सारी लेडीस कहती हैं कि सारे फोटो तो स्टोर रूम में रखे हैं हमें वहां से सारे फोटो लेकर आने होंगे तभी तो रूम में चले जाते हैं और वहां पर सारे फोटो फ्रेम को लेकर बाहर आ जाते हैं दिव्य दृष्टि उनको साफ करते हैं और उन्हें अच्छी तरह से टांग देती है पिशाचनी और चिंकी देवरी में जाते हैं तभी वहां पर लाल चकोरा जाती है दोनों ही लाल चकोर को बताती है कि हमने आपका काम कर दिया है रक्षित और शिखर के इतने सारे रूप बन जाएंगे कि वह भी समझ नहीं पाएंगे दिव्यदृष्टि की आखिर असली कौन से हैं और उन्हें समझने में इतना टाइम लग जाएगा और वक्त भी निकल जाएगा उस गुफा में जाने का और वैसे भी वह दोनों रक्षित और शिखर तक नहीं पहुंच सकते क्योंकि हम दोनों ने उन्हें ऐसी जगह छुपाया है उनकी सोच भी वहां तक नहीं पहुंच सकती दिव्या अपने टॉप के बारे में पूछने के लिए शिखर के रूम में जाती है और वहां पर जाकर देखती है कि शिखर खड़ा होता है और एक शिखर दिव्या के पीछे आ रहा होता है दिव्य जैसे ही पीछे पलटकर देखती है लेकिन इतने में शिखर वहां से गायब हो जाता है दिव्या कमरे मैं खड़े हुए शिखर से पूछती है कि क्या तुम्हें मेरा लाइट ऑफ मिला या नहीं शिखर कहता है कि कौन सा लाल टॉप मैं तुम्हारा लाल स्टॉप क्यों ढूंढ लूंगा दिव्या कहती है कि तुम नहीं तो मुझसे नीचे कहा था कि शायद तुम्हारा लाल टॉप किसी और रूम में होगा मैं जाकर लेकर आता हूं इसलिए मैं पूछ रही हूं क्या वह तुम्हें टॉप मिलाया नहीं शिखर कहता है कि मैं तुम्हारा कोई भी नहीं लगता और मैं तुम्हारा टॉप क्यों ढूंढ लूंगा लेकिन तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारा टॉप ढूंढ तो तुम मुझे अपना बॉयफ्रेंड बना सकती हो अगर मैं तुम्हारा बॉयफ्रेंड बन जाता हूं तो मैं तुम्हारा तो ढूंढने में मदद कर सकता हूं और हम गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड रहेंगे तो कुछ भी कर सकते हैं कुछ भी शेयर कर सकते हैं तुम मेरे कपड़े पहन सकती हो और मैं तुम्हारे कपड़े पहन सकता हूं इस बदतमीजी को लेकर दिव्या चौक जाती है और शिखर को धक्का मार देती है और उसे वार्निंग दे देती है कि अब तुम मुझसे दूर रहना मेरे पास आने की जरूरत नहीं है दृष्टि जैसे ही अपने कमरे में जाती है वहां पर जाकर देखती है कि रक्षित अपनी जगह पर ही सोने जा रहा है दृष्टि से पूछती है कि तुम तो बाहर थे लेकिन तुम दोबारा यहां पर सोने के लिए कैसे आ गए क्या तुम्हारे सिर में दोबारा दर्द हो रहा है रक्षित के बर्ताव को देखकर दृष्टि चौक जाती है और कहती है कि आखिर चल क्या रहा है।