Divya Drishti Upcoming Spoilers 30 November 2019 in Hindi

Divya Drishti Upcoming Spoilers 30 November 2019 में आप सब देखेंगे कि कैसे दिव्या नरक लोक में जब बंद होती है दृष्टि दिव्या को बचाने के लिए कोशिश करती है और नरक लोक में चली जाती है उसे बचाने के लिए लेकिन वह भी वहां पर मुसीबत में फंस जाती है और उसे भी बंदी बना लिया जाता है और उसे भी सजा देने का फरमान कर दिया जाता है दृष्टि दिव्या को बचाने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन नरक लोक में दृष्टि की शक्तियां काम नहीं आती।

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दृष्टि को विजन जब दिखाई देता है कि दिव्या को पिंजरे में बंद कर के ऊपर की तरफ लटका दिया जाता है और जंजीर को काट दिया जाता है वह पिंजरा सीधे लावे में गिरा होता है दृष्टि जब यह विजन देखती है तो वह चौक जाती है और दिव्या को बचाने की जिद ठान लेती है लेकिन रक्षत दृष्टि को समझाने की कोशिश करता है कि हम कुछ ना कुछ जरूर करेंगे लेकिन दृष्टि उसकी एक भी नहीं मानती और मजबूरी में रक्षत को दृष्टि को गैरोस करके बाथरूम में बंद करना ही पड़ता है।

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पिशाचनी मुरारी के पास आती है और मुरारी से कहती है कि तुम्हें मेरा एक काम करना होगा तो मैं दृष्टि को होश में लाकर नरक लोक में ले कर जाना होगा और वहां पर एक रहस्य दरवाजा है उसे वैसे दरवाजा मैं तुम्हें दृष्टि को डाल देना होगा तभी मुरारी यह बात सुनकर चौक जाता है और वह जिला से कहता है कि फिर वहां से कैसे निकलेगा तभी सीधा कहती है कि वहां पर एक दरवाजा और है तुम्हें मैं उस दरवाजे के पास मिलूंगी और उसी दरवाजे से मैं तुम्हें निकाल लूंगी मुरारी उसकी बातों में आ जाता है वह दृष्टि के कमरे में जाकर उसे घोष में ले आता है और उससे नरक लोक में जो सेना होती है उसकी तरफ भेष बदलकर दोनों उस नरक लोक में पहुंच जाते हैं।

दिव्या को नर्क में सबके सामने लाया जाता है और दिव्या पर इल्जाम लगाए जाते हैं कि तुम पर झूठ बोलने का एग्जाम है और सच्चाई छुपाने का भी इल्जाम है और तुम्हारे ऊपर कत्ल का इल्जाम है जिसकी वजह से तुम्हें सजा-ए-मौत दी जाती है दृष्टि अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने की कोशिश करती है तभी मुरारी उसे रोक लेता है और दृष्टि से कहता है कि जहां पर तुम्हारी शक्तियां कुछ भी काम नहीं करेंगे तभी दृष्टि चल जाती है और मुरारी से कहती है कि तुम्हें कैसे पता मुरारी कहता है कि मैंने नरक लोक के बारे में किताबों में पढ़ा है।

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दृष्टि की नजर वहां पर रखे पिंजरे पर पड़ जाती है तभी वह कहती है कि यह तो वही पिजरा है जो मैंने विजन में देखा था दृष्टि मुरारी से कहती है कि हमें जल्लाद का कमरा ढूंढना होगा वह जला से बात करनी होगी तभी दोनों जल्लाद का कमरे को ढूंढने के लिए वहां से चले जाते हैं तभी दृष्टि कमजोर होने लगती है और वह मुरारी से कहती है कि पता नहीं मुझे क्या हो रहा है तभी मुरारी कहता है कि तुम यहां पर हो इसलिए यह नरक लोक तुम्हारी एनर्जी कॉल खत्म करने की कोशिश कर रहा है इसलिए तुम कमजोर पड़ रही हो और तुमने तो गैरों से कि बिल दवाई ली है जिसकी वजह से ही तुम पर ज्यादा असर कर रही है मुरारी दृष्टि से कहता है कि अब हमें आगे चलना चाहिए और आगे जाकर यह उस जल्लाद का कमरा है दृष्टि जेवर सुनकर चौक जाती है तभी मुरारी से कहती है कि तुम्हें कैसे पता कि वहां पर उजाला का कमरा है मुरारी दृष्टि से कहता है कि मैंने वहां पर कुछ सैनिकों को बात करते हुए सुना था जल्लाद का कमरा इधर ही है।

रक्षत ने देवरी में गिद्ध को देखा होता है तभी उसकी फोटो को देखकर अपनी मां और रोमी को दिखा रहा होता है और उसमें दीदी के बारे में सोच रहा होता है तब यह रक्षत की मां कहती है कि यह तो वह गीत है जो झील के किनारे पाए जाते हैं यह बहुत ही ज्यादा खतरनाक होते हैं इनके अंदर शक्तियों के ताकत भी बहुत होती है रक्षित अपनी मां से पूछता है कि यह बात आपको कैसे पता है तभी रक्षत की मां बताती है कि मेरे पिता ने मुझे इस गिद्ध के बारे में बताया था रक्षत बताता है कि मुझे लगता है इंदु के पास ही पाताली का दिल हो सकता है क्योंकि पाताली अभी तक जिंदा है मैंने जब पाताली को पहली बार देखा था वह तो उसके पैरों में कोई भी चप्पल नहीं थी लेकिन मैंने जब पाताली को दूसरी बार देखा तो उसके पैरों में चप्पल थी इसका मतलब पाताली अब तक जिंदा है और उसका दिल इन गिद्ध के पास ही है हमें झील के किनारे जाना ही होगा।

रक्षत रोमी उन गधों के पास दिल की रानी चले जाते हैं तभी रक्षित को दिल की धड़कन सुनाई सुनाई देती हैं तभी वह वहां पर दिल को देख लेता है और उसके पास जाने की कोशिश करता है तभी वहां पर एक गिद्दा जाता है और वह रक्षित और उन पर हमला कर देता वहां पर कभी सारे गिद्दे भी आ जाते हैं उन दोनों पर हमला कर देते हैं तभी रक्षित अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करता है और अपने हाथों में तलवार ले लेता है और वहां पर काफी सारे गीत आ जाने की वजह से ही रक्षत वहां पर काफी धारी तलवार एक जादू से खड़ी कर देता है और उनको दे को मारना शुरू कर देता है तभी रक्षित अपने हाथों में दो तलवारों को लेता है और उन पर हमला कर देता है तभी वह हमसे कहता है कि यह बहुत बड़ा कहते हैं सबसे पहले हमें इसको ही मारना होगा लेकिन वह दोनों जितने गिद्धों को मारते हैं उतने गिद्ध वहां पर आ जाते हैं।

बड़ा वाला गिद्ध रक्षत पर हमला कर देता है तभी रोमी सोचता है कि मुझे गिद्ध को भटका ना होगा तभी यह गिर सकता है तभी रूम में अपने हाथों को काट लेता है और बाघ नहीं लगता है तभी वह विद्रोही के पीछे पड़ जाता है और उम्मीद रखते कहता है कि मैंने इसका ध्यान बैठ कर दिया है आप इस पर हमला कर दीजिए रक्षा तो उस पर हमला कर देता है जिसकी वजह से वह वहीं पर खत्म हो जाता है दृष्टि और मुरारी जैसे ही उस जल्लाद का कमरा देखते हैं और उस कमरे के पास जाने की दृष्टि कोशिश कर रही होती है तभी वह उस रहस्य दरवाजे के ऊपर जाकर खड़ी हो जाती है तभी मुरारी उसे ऐसे दरवाजे का गेट खोल देता है जिससे दृष्टि उस दरवाजे के अंदर गिर जाती है और सीधे दिव्या के पास जाल चली जाती है मुरारी कहता है कि मैं अभी मदद लेकर आता हूं और वहां से चला जाता है और जैसे ही उस दूसरे दरवाजे के पास जाता है और देखता है कि वहां पर पिशाचनी नहीं है।

दृष्टि जैसे ही दिव्य के पास पहुंचती है तभी वहां पर दृष्टि और दिव्य एक दूसरे को देख कर एक दूसरे को गले से लगा लेती हैं और वह बहुत ही ज्यादा खुश होती हैं तभी वहां पर सैनिक आ जाते हैं और दृष्टि को बंदी बना लेते हैं और कहते हैं कि तुम यहां पर क्या कर रही हो मुरारी जैसे उस दरवाजे के पास खड़ा होता है तब वहां पर काल देवता आ जाते हैं और मुरारी से कहते हैं कि तुम कौन हो और तुम यहां पर क्या कर रहे हो तभी मुरारी चौक जाता है और काल देवता मुरारी से कहते हैं कि चलो मेरे साथ तभी मुरारी वहां पर एक मुखौटा और कुछ कपड़े देख लेता है तभी उस जल्लाद के मुखोटे और कपड़े को पहन लेता है और अपने हाथों में कुल्हाड़ी को ले लेता है और उसके साथ चलने लगता है दृष्टि को बंदी गृह में बंद कर दिया जाता है दृष्टि अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके वहां से निकलने की कोशिश करती है लेकिन उसकी शक्तियां काम नहीं करती तभी वह दिव्या से कहती है कि तू चिंता मत कर मैं आ रही हूं।

रक्षत पिशाचनी को ब्लैकमेल करता है कि तुमने दिव्य दृष्टि को स्वर्ग लोक से नहीं निकाला तो मुझे मजबूरी में इस दिल को मारना ही होगा तभी बिजासनी कहती है कि तुम जानते हो ना कि एक बार तुमने इस दिल को मारने की कोशिश की थी तो क्या हुआ था तभी रक्षत कहता है कि मैं जानता हूं कि क्या हुआ था चाहे मेरी जान क्यों ना चली जाए लेकिन मैं इस दिल को खत्म करके ही रहूंगा तभी पिज्जा से नहीं कहती है कि जो भी तुम चाहे वह कर सकते हो लेकिन मैं उन दोनों को वहां से नहीं निकाल लूंगी तभी पाताली उसमें आ जाती है और कहती है कि नहीं मेरी तरफ कुछ मत करना पिशाचिनी कहती है कि चाहे तुम जो भी करना चाहती हो तुम कर सकती हो लेकिन मैं तुम्हारी बात नहीं मानूंगी तभी रक्षित अपने हाथों में एक चाकू लेता है और उस दिल पर वार कर देता है तभी उस दिन पर जैसे ही बार करता है तभी पाताली कमजोर हो जाती है।

पिशाचनी रक्षित की बात मान लेती है और उसके साथ चलने के लिए राजी हो जाती है काल देवता मुरारी कौन जल्लाद बनाकर वहां पर ले जाते हैं और जल्लाद बनकर मुरारी ऊपर खड़ा हो जाता है और उस जंजीर को काटने की कोशिश करता है और वह जंजीर में कुल्हाड़ी फस जाती है और मुरारी को निकालने की कोशिश कर रहा होता है तभी दृष्टि का जादू काम कर जाता है और वह वहां से बाहर निकल जाती है और वहां पर सारे सैनिकों को मानना शुरू कर देती है तभी दृष्टि उस जल्लाद को भी अपनी शक्तियों से पीछे की तरफ कर देती है तभी उसको लड़ाई करने की वजह से ही दिव्य नीचे गिर रही होती है तभी दृष्टि अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करती है और उसे बचा लेती है तभी वहां पर कुछ सैनिक आ जाते हैं और दृष्टि पर हमला कर देते हैं तभी वहां पर रक्षा का जाता है और दिव्या को अपनी शक्तियों से बचा लेता है तभी दृष्टि भी अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करती है और वहां से दिव्या को बचा लेती है।

काल देवता रक्षत कहते हैं कि तुमने यहां आ कर अच्छा नहीं किया तुम्हें इसकी सजा जरूर मिलेगी तभी रक्षित कहता है कि आप ही गलती कर रहे हैं दृष्टि को और दिव्या को सजा देकर क्योंकि वह दोनों बेकसूर है पाताली अभी तक जिंदा है और पूछा सनी ने आपसे झूठ बोला है तभी पाताली की दिल को देखकर काल देवता वहां से गायब हो जाते हैं और सैनिकों को हमला करने के लिए बोल देते हैं तभी सैनिक सारे हमला कर रहे होते हैं तभी वहां पर मुरारी आ जाता है और मुरारी के हाथों में खुद को देखकर दिव्या कहती है कि यह तो उसी जल्लाद का मुकुट है जिसने मुझ पर हमला किया इसका मतलब तुम ही थे जिसने मुझ पर हमला किया तब रक्षित कहता है कि अब इस बात का कोई मतलब नहीं है पहले मेरा हाथ पकड़ हम सब यहां से चलते हैं तभी वह सब जा रहे होते हैं तभी रक्षत के पैरों में मुरारी के लापता होने की एक प्लेट पैरों में जाती है निकल जाते हैं सारे घर वाले उन तीनों चारों को देख कर बहुत ही अलग खुश होते हैं तभी काल देवता पिशाचनी नहीं के पास जाते हैं और उसे सजा देने लगते हैं और उसे कहते हैं कि तुझ पर एक काम भी नहीं हुआ मैंने तुझसे दिव्यदृष्टि को खत्म करने के लिए कहा था लेकिन तू काम में ना कामयाब रही।

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