Nazar Aaj Ka Episode 31 October 2019 – मोहना के सामने चैताली का सच

नजर सीरियल के आज के एपिसोड में आप सब देखेंगे के कैसे मोहना सारे घरवालों को बताने की कोशिश करती है कि मैं आपसे जो भी कह रही हूं मैं सच कह रही हूं बगल के घर में कोई और नहीं बल्कि एक डायन रहती है मैंने वहां पर उसे खुद देखा है तभी सारे घर वाले मोहना की बात पर यकीन नहीं करते मोहना उन्हें समझाने की बहुत कोशिश करती है लेकिन सारे घर वाले कहते हैं कि लेकिन हमने वहां पर जाकर देखा था वहां पर तो कोई भी नहीं था बल्कि चेताली तो वहां पर दिवाली की शुभकामनाएं देने के लिए गई थी लेकिन चेताली ने कहां कि वहां पर कोई भी नहीं है मोहना कहती है कि लेकिन मैंने वहां पर उस डायन को देखा था वहां पर कोई ना कोई तो जरूर है|

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चेताली मोहना को देखकर कहती है कि इस घर में डायन है तो सही और कोई नहीं बल्कि आप है इसके बाद सारे घर वाले मोहना की बातों पर और भी ज्यादा भरोसा नहीं करते और मोहना को वहां पर छोड़ कर चले जाते हैं तभी मोहना कहती है कि इस चेताली को क्या सुनाई देगा यह तो खुद कुछ नहीं सुन सकती इसके बाद चेताली मोहना की बात सुन लेती है और उससे कहती है जो भी कुछ कहना चाहिए वह मुंह पर कहना चाहिए पीठ पीछे नहीं करना चाहिए यह गलत बात होती है इसके बाद मुंह ना यह सब देख कर चौक जाती है तभी चेताली जब वहां से जा रही होती है तभी वह अपनी आंखों को ग्लो करने लगती है और वहां से चली जाती है मोहना कहती है कि यह जो चेताली को जोर से कही बात से सुनाई नहीं देती थी आज मैंने इतनी हौले से बात कही और इसे सुनाई भी दिए गया।

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मोहना इतनी देर में चेताली के कमरे में जाती है और तक जाग करना शुरू कर देती और कहती है कि मुझे चेताली पर भरोसा नहीं है कुछ तो गड़बड़ है जो चेताली मुझसे इतना डरती थी आज वह मेरे सामने खड़ी हुई है इतनी देर वहां पर चेतानी डायन का रूप रखकर वहां पर आ जाती है मोहना उसे देख कर चौक जाती है और उससे पूछती है कि आखिर यह कैसे हो सकता है तभी चेताली कहती है कि क्यों मुझे डायन के रूप में देखकर आप चौक गई जब भी मैं आपको डायन बनता हुआ देखती थी तुम मैं कहती थी कि आपके पास इतनी पावर है और मैं आपसे इतना डरती हूं तभी मोहना जॉब जाती है और कहती है कि तुम डायन कैसे बन सकती हूं।

मोहना को इतनी देर में समझ आ जाता है कि आखिर चेताली एक डायन कैसे बन सकती है मोहना चेताली डायन से कहती है कि इसका मतलब उसे डायन ने उस काले धुएं से एक डायन शीशा बनाया चेताली डायन कहती है कि वह भाभी डायन आपको तो सब कुछ पता है तभी चैताली की बातें सुनकर मोहना उससे पूछती है कि चैताली कहां पर है चेताली डायन बताती है कि चेताली कहीं और नहीं बल्कि उसे डायन शीशे के अंदर है मोहना उससे कहती है कि तुम अभी नई नई डायन बनी हो और नई डायन को चोटिला नी के सिवा कुछ आता ही नहीं है शैतानी डायन कहती है कि आपको मैं बताती हूं कि मुझे क्या आता है तभी चेताली डायन वहां पर सारे घरवालों को इकट्ठा कर लेती है और उनके सामने ड्रामा करने लगती है कि मोनू उसे मारने की कोशिश कर रही है तभी ताली पर सारे घरवाली यकीन कर लेते हैं और मोहना को डालना शुरू कर देते हैं।

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मोहना सारे घरवालों से कहती है कि आप इसकी बातों पर भरोसा मत कीजिए कोई और नहीं बल्कि एक डायन है चेताली यह नहीं है बल्कि चेताली तो एक आईने के अंदर बंद हो चुकी है उसे वहां से निकालना होगा सारे घर वाले मोहना की बातों पर भरोसा नहीं करते मोहना से कहते हैं कि हम तुम्हारी बातों पर क्यों भरोसा करें मोहना बताते हैं कि मैंने देखा था कि इसे घर में से जो सारे दिए एक साथ मुझे थे उनमें से एक काला धुआं घर के बाहर बगल वाले घर में गया था तो और उसी काले धुएं से कुछ और नहीं बल्कि एक डायन शीशा बनाया गया है और चेताली जैसे ही उस आईने के सामने गई तो उसमें से एक डायन चेताली निकल कर आए और चैताली उसकी आईने के अंदर यह है मैं चैताली को ढूंढना चाहिए लेकिन सारे घर वाले चेताली की बातों पर भरोसा करते हैं मोहना कि नहीं।

सारे घर वाले मोहनाको उसी कमरे में कैद करके चले जाते हैं और मोहना से कह देते हैं कि तुम इस घर से अगर जाना चाहती हो तो जा सकती हो लेकिन इस घर में आने का कोई और दूसरा रास्ता नहीं होगा इतनी देर में सारे घर वाले वहां से चले जाते हैं मोहना सारे घरवालों से कह रही होती है कि मेरी बात पर यकीन करो यह कर खतरे में है मैं खतरे को हटाने के लिए ही जहां पर आई हूं तभी आदि और परिवार आ जाते हैं और मोहना की बातें सुन लेते हैं तब याद ही कहता है कि बार-बार मोहना दादी यह कह रही है कि बगल के घर में कोई डायन रह रही है परी कहती है कि लेकिन पापा और मां ने हमसे मना किया है कि हम होना दादी के आसपास नहीं रहेंगे और उनकी बातों को इग्नोर करेंगे तभी आदि कहता है कि अगर बगल के घर में वाकई में कोई डायन है तू यह तो हमारे घर के लिए खतरे की बात है और मां ने हमसे एक और बात कही थी कि देव अंकल के साथ कोई और डायन भी मिली हुई थी कहीं ऐसा तो नहीं वही डायन बगल के घर में रह रही हो और दादी बिल्कुल ठीक नहीं है तभी परी कहती है कि हमें वहां पर जाकर चेक कर लेना चाहिए।

आदि और परी वहां से चले जाते हैं तभी थोड़ी देर के बाद मोहना के कमरे में पिया आ जाती है पिया मोहना से कहने लगती है कि तुम ऐसा क्यों कर रही हो तभी मोहना बताती है कि मैं ऐसा कुछ भी नहीं कर रही हूं बल्कि मैं तुम दो सबकी मदद करना चाहती हूं कि यहां पर कोई ना कोई तो डायन है लेकिन तुम सब मेरी बात नहीं सुन रहे हो लेकिन जब तुम्हें पता चलेगा तो तुम बहुत ही ज्यादा पछताओगे पिया कहती है कि हमने तुम पर काफी बार भरोसा किया है लेकिन तुमने हमेशा हमें धोखा देने की कोशिश की है चेताली डायन द्वारा उसे घर में जाती है और दोबारा हुसायनी के सामने आकर खड़ी हो जाती है और वहां पर चेताली को देखकर उसे कहने लगती है कि तुम्हारा गर्व भरा हुआ है और तुम यहां पर अकेली हो तुम्हारा मन कैसे लग रहा होगा तुम्हारा मन नहीं लग रहा होगा मैं यह बात जानती हूं इसलिए मैंने सोचा है कि तुम्हारा परिवार बढ़ा देती हूं ।

चैताली डायन उस आईने पर एक काला कपड़ा डाल देती है इतनी देर में घर में आदि और परी आ जाते हैं इतनी देर में चेताली डायन उस आईने को लेकर वहां से चली जाती है आदि और परी जैसे घर के अंदर आते हैं और कहते हैं कि जहां पर तो कोई भी नहीं है वेदश्री की हमशकल आदि और परी को वहां पर देख लेती और कहती है कि यह बच्चे यहां पर क्या कर रहे हैं थोड़े से मैं मजे ले लेती हूं तभी वेद सर की हमशक्ल वहां पर आ जाती हो और उन बच्चों के सामने वेदश्रीका बेस रखकर उन बच्चों के सामने आकर खड़ी हो जाती है तभी बच्चे डर जाते हैं और दादी से कहते हैं कि दादी हम यहां पर खेलते हुए आ गए थे तभी दादी कहती है कि वह तुम मुझे तुम जहां पर आते हुए दिख गए थे इसलिए मैं यहां पर तुम्हारे पीछे आ गई तुम यहां से चलो इसके बाद वेद श्री डायन वहां से उन बच्चों को ले जाती है।

पिया जैसे ही अपने कमरे में जाती है तभी वहां पर चैताली की चाबियां रखी रहती है तभी वह कहती है कि यह तो चाची की चाबियां है मैं उन्हें दे देती हूं तभी पंजाबियों को उठाती और चैताली के कमरे में चली जाती है लेकिन वहां पर चेताली नहीं होती तभी पिया पूरे घर में चेताली को ढूंढने लगती है चेताली डायन इतनी देर में उस आईने को लेकर घर में आ जाती है और वहीं पर उस आईने को रख देती हो और उस काले कपड़े को उसने पर से काले कपड़े को हटा देती है और चैताली से कहती है कि वह देखो सामने से कौन आ रहा है पिया के पास इतनी देर में अंसा जाता है और पिया से बात करने लगता है और पिया को वहां से ले जाता है ।

थोड़ी देर के बाद वहां पर अविनाश आ जाता है और उस आईने को देख लेता है और उस आईने में चेताली को भी देख लेता है और चेताली से कहता है कि तुम इसके अंदर क्या कर रही हो जी ताली इशारे से अविनाश को उस आईने के सामने से हटने के लिए बोल देती है लेकिन अविनाश कुछ भी समझ नहीं पाता इतनी देर में अभी ना जब उस आईने को देख रहा होता है उस आईने के अंदर एक और छवि अविनाश की बन जाती है और वह अविनाश को घूरने लगती है और वह आईने के बाहर आ जाती है बिना जी सब देख कर चौक जाता है और इतनी देर वहां पर चैताली डायन आ जाती है अविनाश कहता है कि इसका मतलब होना बिल्कुल ठीक कह रही थी तुम असली चेताली नहीं हो बल्कि कोई डायन हो मैं यह बात सारे घर वालों को बता दूंगा अविनाश जैसे ही वहां से जा रहा होता है तभी आईना अविनाश कुशवाहा अपने अंदर खींच लेता है चेताली के साथ-साथ अविनाश भी उस आईने के अंदर कैद हो जाता है तभी वहां पर वेद श्री की हमशक्ल बच्चों को लेकर आ जाती हैं।

सनम और उसकी मां नमन को जैसे ही ढूंढ लेती है नमन पूरा सोने का बना होता है सनम उसे देखकर बहुत ही ज्यादा खुश होती है और कहती है कि मेरे पति देव कितने सुंदर लग रहे हैं इतने में सनम की मां उससे कहती है कि तुम ज्यादा मत बोलो वरना यह छोटा पहलवान उठ जाएगा सनम यह बात सुनकर चुप हो जाती है तब उसकी मां कहती है कि पहले हमें नमन के ऊपर से सारे गहने उतार नहीं चाहिए सनम कहती है कि इसकी क्या जरूरत है पतिदेव जी को यह नहीं पसंद है इसलिए तो उन्होंने यह गहने पहने हैं सनम की मां कहती है कि हमें नैनो को साथ नहीं ले जा सकते वरना छोटा पहलवान हमें भी सोने का बना देगा इसके बाद सनम उन दोनों को नमन के ऊपर से उतार देती हो और उस नमन को वहां से ले जाती है इतनी देर में छोटे पहलवान को होश आ जाता है और वह दोनों तीनों को जाते हुए देख लेता है सनम जैसे ही नमन को घर लेकर जाती है तब वहां पर सेबी को बुला लिया जाता है ऐसे ही जैसे ही नमन को साथ में देखती है और वह चौक जाती है सनम बताती है कि वह तो अच्छा हुआ कि हमने लिख के सारे गहने उतार दिया वरना छोटे पहलवान को पता चल जाता कि नमन जी कहां पर है रवि कहती है कि वह तो फिर भी पता चल ही जाएगा क्योंकि तुमने सुनना मन के ऊपर से तो गहने उतार दिए लेकिन नमन को सोने का बनाने वाला कोई और नहीं बल्कि छोटा ही पहलवान है वहां पर आता ही होगा इतनी देर में वापस छोटा पहले माना जाता है नमन को लेने के लिए फांसी चढ़े की मदद से नमन को ले जाने लगता है।

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