Divya Drishti Written Update 8 December 2019 In Hindi

Divya Drishti Written Update 8 December 2019 Today Episode में आप सब देखेंगे कि कैसे यह विकी का रात होते ही जब रूप बदलता है तब वहां पर रक्षित की चाची आ जाती है और विकी से बात करने की कोशिश करती है लेकिन विकी अपने चेहरे को छुपा रहा होता है तभी वह चाची से कहता है कि हम सुबह बात करेंगे और वह आकर बढ़ जाता है इतने दिन में चाची उसके सामने आकर खड़ी हो जाती है तभी विकी लाइट को बंद कर देता है जिससे उसका चेहरा दिखाई नहीं देता चाची इतनी देर में वहां से चली जाती है विकी अपने रूप को छुपाने के लिए बाहर जंगल में चला जाता है इस बात का पता जब दिव्य दृष्टि को लगता है कि घर में कोई ना कोई तो है तभी वह बार देखने के लिए आती है और जानवर की आवाज बाहर से आ रही होती है दिव्यदृष्टि सारे घरवालों को सोता हुआ देती है और कहती है कि इन्हें सोने दो हम बाहर जा कर देख लेते हैं।

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दिव्य दृष्टि जानवर को देखने के लिए चली जाती है और बाहर जा कर दे जंगल में देख रही होती है लेकिन वहां पर कोई भी दिखाई नहीं देता तभी दे वहां पर वह जानवर अपने आप को पूरी तरह से बदल लेता है और जानवर बन जाता है विकी वहां पर दिव्य दृष्टि को देख लेता है और मौका पाकर वह दोबारा घर में चला जाता है दिव्य दृष्टि कहती है कि कहीं ऐसा तो नहीं हम जहां पर उसे ढूंढ रहे हैं वह घर के अंदर हो दिव्य दृष्टि इतना कहकर घर के अंदर चली जाती है वहां पर पैरों की आवाज आ रही होती है दिव्या कहती है कि मुझे लगता है कोई अंदर है तभी उधर जाती है और नीचे की तरफ देख लेती है कि कोई भी नहीं है तभी दिव्या कहती है कि हमें ऊपर चल कर देखना चाहिए।

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दिव्य दृष्टि जब उस जानवर को ढूंढ रही होती है तभी उन्हें एक परछाई दिखाई देती है उस पर चाय का जब दोनों फॉलो कर रही होती है तभी वह पढ़ चाहिए शेखर के कमरे में चली जाती हो दरवाजे बंद कर लेती है दिव्य दृष्टि से देखती है कि इस कमरे का भी दरवाजा बंद हुआ है तभी वह दरवाजे को खोलकर अंदर जाकर देखती है लेकिन वहां पर कोई भी दिखाई नहीं देता वहां पर शेखर भी नहीं होता है तभी दोनों कहती हैं कि आखिर जी सीकर है कहां थोड़ी देर के बाद बाहर से आवाज आने लगते हैं तबीयत दिव्य दृष्टि कमरे को छोड़कर बाहर की तरफ आ जाती हैं थोड़ी देर के बाद ही विकी अपना इंसानी रूप लेता है और कमरे के बाहर आ जाता है कमरे के बाहर जबकि आ रहा होता है तभी शेखर विकी को कमरे से बाहर निकलते हुए देख लेता है और कहता है कि मेरे कमरे में क्या कर रहा था और वह भाड़ देखने के लिए आता है इतनी देर में बिकी वहां से चला जाता है।

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विकी रक्षित की मां के कमरे में जाता है और उनसे कहता है कि आप ही मेरे लिए एक अच्छी सी लड़की ढूंढ दीजिए तभी वह कहती है कि नहीं हम तो तुम्हारे लिए लड़की ढूंढ लेंगे लेकिन तुम्हें कोई ना कोई तो पसंद होगी तभी वह कहती है कि तुम्हें तो बिल्कुल दृष्टि की छाया चाहिए तो इसका मतलब दिव्य ही उसकी छाया है तो तुम दिव्या की बात तो नहीं कर रहे थे तभी विकी शर्मा जाता है और रक्षित की मां उसकी बात समझ जाती है और उससे कहती है कि मैं दिव्या से जरूर बात करूंगी मैं तुम्हारी बात चलाती हूं वही शरमाते हुए वहां से चला जाता है दिव्य दृष्टि जब अपने कमरे में सो रही होती है तभी यह दृष्टि को एक सपना दिखाई देता है उस सपने में दिव्या दुल्हन की ड्रेस में जंगल में भाग रही होती है और दिव्या का कोई जानवर पीछा कर रहा होता है यह सब देखकर दृष्टि डर जाती है और चिल्लाते हुए दिव्या को आवाज लगाने लगती है दिव्य दृष्टि से कहती है कि दी मैं यहीं पर हूं तभी दृष्टि अपने सपने के बारे में दिव्या को बताती है तभी दिव्या दृष्टि से कहती है कि यदि ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि वह शायद आपको विजन नहीं था बल्कि वह सपना ही था वरना मैं तो शादी के जोड़े में सिर्फ शादी से ही बचकर भाग सकती हूं।

दिव्य दृष्टि डिसाइड करती है कि वह सारी बातें रख को बता देंगे औरत को बताने के लिए दोनों ही रक्षक के कमरे में जा रही होती है तभी रक्षक के कमरे में उससे पहले ही विकी और रक्षित की मां दिव्या के बारे में बात करने के लिए उसके पास पहुंच जाती हैं दृष्टि और दिव्या जैसे ही रक्षा के कमरे के बाहर आती है तभी दृष्टि डिसाइड करती है कि वह अभी रक्षित को कुछ भी नहीं बताएंगे और वह दिव्या से कहती है कि मुझे नहीं लगता कि हमें अभी रक्षित को यह सारी बातें बता दी नहीं चाहिए क्योंकि वह अभी हम जानते भी नहीं कि वह सच्चाई भी थी या हमारे एक सपना था हमें तो सारी चीजें पता लगा लेनी चाहिए तभी दिव्या कहती है कि तो हम पता लगा लेते हैं और गुफा में जाकर तबियत दिव्यदृष्टि बाहर जब जा रही होती हैं तभी दिव्य कहती है कि क्या हमें इस बात को शेखर को बता देना चाहिए लेकिन दृष्टि को शिखर पर शक होता है तभी वह दिव्या से मना कर देती है कि नहीं हमसे कर को भी यह सारी बातें नहीं बताएंगे।

दिव्य दृष्टि उस गुफा के पास जैसे ही हैं तभी वहां पर किसी जानवर की आवाज आ रही होती है दिव्य दृष्टि जाती है और उसके जाने के बाद वह दोबारा बाहर आ जाती है इतनी देर में दृष्टि को ठोकर लग जाती है उसका हाथ दीवार पर लग जाता है दीवार पर उसके हाथों के निशान की वजह से ही उसके हाथों पर चमक आने लगते हैं तभी दिव्या कहती है कि आपके हाथों पर चमक कैसी आ रही है तभी दृष्टि अपने हाथ को हटाती है तो वहां पर चाल निशान होते हैं दो बड़े और छोटे दृष्टि यह सब देख कर चौक जाती है दिव्य दृष्टि से कहती है कि आप एक और बार हाथ के निशान पर हाथ लगाइए हो सकता है इसकी वजह से ही दरवाजा खुल जाए ठीक है कि नहीं तू भी दीवार पर हाथ लगा इस छोटे वाले निशान पर दिव्य दृष्टि जब पंजू पर अपना हाथ रखती हैं लेकिन वह फिर भी दरवाजा नहीं खुलता तभी दृष्टि कह दिया है कि आखिर ये दरवाजा क्यों नहीं खुल रहा है मुझे तो लगता है इन दोनों इंसानों पर भी हमें हाथ रखना चाहिए दिव्य दृष्टि उन दोनों निशानों पर हाथ रख देती है लेकिन उनमें थानों पर चमक नहीं आती तभी दिव्या अपने सीधे हाथ का इस्तेमाल करती है लेकिन फिर भी वह पर चमक नहीं आती तभी दृष्टि कहती है कि इसका मतलब यह निशान किसी बड़े का है।

दृष्टि डिसाइड करती है कि इस दरवाजे को खोलने के लिए हमें चार जनों की जरूरत पड़ेगी दिव्य दृष्टि इतना कहकर वहां से चली जाती है रक्षित की मां इतनी देर में सारे घरवालों को विकी के बारे में बता देती है कि विकी दिव्या से शादी करना चाहता है इस बात से रक्षा तो मना करता है और कहता है कि यह कैसे हो सकता है अभी तू हमने दिव्या से बात भी नहीं की है और हमने अभी यह सारी बातें शेखर को भी नहीं बताई है तभी रक्षित की मां कहती है कि तुझे क्या लगता है कि शेखर को बताना जरूरी है तुझे क्या लगता है कि शेखर के दिल में दिव्या है रक्षित कहता है कि मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं लेकिन एक बार तो हमें दिव्या को यह सारी बातें बता देनी चाहिए बाकी का फैसला दिव्या का ही होगा मैं दिव्या से खुद बात करूंगा कोई बात को आगे नहीं बनाएगा इतनी देर में सारे घर वाले से निकल रहे होते हैं तभी वहां पर दृष्टि आ जाती है और रक्षा दृष्टि से कैसा है कि मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है इतनी देर में ही वहां पर दिव्या और साथ आ जाते हैं तभी सारे घर वाले उन दोनों को एक साथ आता हुआ देखकर और भी अदा खुश हो जाते हैं और और मैं अपने मन में ख्वाब बनने लगते हैं।

दिव्या के सामने सारी सच्चाई बता देते हैं कि विकी और दिव्या की शादी की बातें चल रही है इस बात से दिव्य बहुत ही ज्यादा परेशान हो जाती है तभी रक्षित की मां दिव्या से कहती है कि यह फैसला तुम्हारा होना चाहिए क्योंकि हम विकी को अच्छी तरीके से जानते हैं और रक्षित भी विकी को बचपन से जानता है तभी विक्की शरमाते हुए वहां से चला जाता है सारे घर वाले कहते हैं कि वैसे तो लड़कियां शर्म आती है लेकिन यहां पर तो लड़का ही शर्म आ रहा है रक्षित अपनी मां से कैसा है कि दिव्या को कोई इस बात के लिए फोर्स नहीं करेगा दिव्या की मर्जी होगी तो यह शादी होगी वरना नहीं होगी तभी रक्षित की मां कहती है कि अगर तुम इस रिश्ते के लिए हां करती हो तो मुझे पंडित जी ना कल का मुहूर्त बहुत ही अच्छा बताया है तो हम कल ही शादी कर देंगे रक्षित कहता है कि अभी उसे सोचने का वक्त दीजिए कल के ही देना शादी करवाना चाहते हैं रक्षित की मां कहती है कि मुझे पंडित जी ने कल का मुहूर्त बहुत ही अच्छा बताया है क्योंकि कल का दिन काफी बरसों के बाद आता है रक्षित की मां दिव्या से कहती है कि तू इस बारे में सोचेगी ना दिव्या रक्षित की मां को जवाब देती है कि हमें इस बारे में जरूर जरूर सोचूंगी।

दिव्य दृष्टि जब अपने कमरे में जाती है तबीयत दृष्टि बहुत ही ज्यादा गुस्से में होती है और कहती है कि ऐसे कैसे तू से शादी कर लेगी तू उसे अच्छी तरीके से जानती भी नहीं है अभी अभी तो तू उससे मिली है और उसे तुझसे प्यार भी होगा तभी वहां पर रक्षिता जाता है और दिव्या को बताता है कि मैं उसे अच्छी तरीके से जानता हूं अगर जानने की बात है तो मैं उसे बचपन से ही जानता हूं बहुत ही अच्छा लड़का है इसलिए मैं और सारे घर वाले उस लड़के को पसंद करते हैं और लेकिन अगर तुम उसे पसंद करती हो तो ही बात आगे बढ़ेगी वरना अगर तुम इस रिश्ते के लिए मना करती हो तो हम इस रिश्ते को यहीं खत्म कर देंगे तभी दिव्या कोई भी जवाब नहीं दे पाती दृष्टि कैसी है कि ऐसे कैसे दिव्या की शादी किसी से भी हो जाएगी रक्षित जब दिव्या को यह सारी बातें समझा होता है तभी दिव्या कहती है कि मुझे थोड़ा सा वक्त चाहिए सोचने का और वहां से इतना कह कर चली जाती है।

रक्षित और दृष्टि इस बात को लेकर झगड़ा करना शुरू कर देते हैं रक्षित दृष्टि को समझाने की कोशिश करता है कि यह फैसला मेरा नहीं था तब इस दृष्टि रक्षित पर इल्जाम लगाती है कि यह जो भी हो रहा है उसमें आपकी ही मंजूरी होगी इसलिए यह सब कुछ हो रहा है शेखर जब अपने कमरे में होता है तभी वह अपने कमरे को खोल कर बाहर आ रहा होता है इतनी देर में उसके ऊपर एक बालों का जुगाड़ उसके मुंह पर उड़कर आ जाता है तभी शेखर जैसे उस बालों को उठाता है और कहता है कि यह तो बाल एक कुत्ते के लग रहे हैं और वह आगे बढ़ता है और उसे और भी ज्यादा बाल दिखाई दे जाते हैं तभी शेखर की नजर विकी पर पड़ जाती है और वह कहता है कि जे विकी चोरी छुपे कहां जा रहा है शेखर विकी का पीछा करने लगता है और पीछा करते हुए वहां पर रक्षित की मां आ जाती है और शेखर को रोक लेती है शेखर कैसा है कि हमें किस का पीछा क्या करूं वह तो मेरा हाथ से ही निकल गया मुझे पता चल जाती कि आखिर वह करना क्या चाहता है।

रक्षित की मां शेखर को बताती है कि तू दिव्या का बहुत ही अच्छा दोस्त है शेखर कहता है कि हां मैं दिव्या का बहुत ही अच्छा दोस्त तो एक बार उससे बात करके देखिए विकी से वह शादी करना चाहती है या नहीं और तू ही है जो दिव्या कोई शादी के लिए बना सकता है शेखर जब जी सारी बातें सुनता है तभी वह चौक जाता है और वह सीधे दिव्या के कमरे में चला जाता है दिव्या चिप्स खा रही होती है और शेखर को देखकर चिप्स ऑफर करती है तभी शेखर दिव्या को दुल्हन का जोड़ा देकर उससे कहता है कि क्या तुम शादी करोगी यह बात सुनकर दिव्या मन में बहुत ही ज्यादा खुश हो जाती है और सोचती है कि शायद शेखर अपने लिए शादी के लिए पूछ रहा है और वहां कर देती है तभी शेखर चौक जाता है और उससे कहता है कि तो चलो तुम विकी से शादी करने के लिए तैयार हो तो मेरा मनाना तो काम ही नहीं आएगा तुम तो पहले ही इस रिश्ते के लिए राजी हो दिव्या यह सब देख कर चौक जाती है शेखर से पूछती है कि क्या तुम इस रिश्ते को लेकर खुश हो शेखर कहता है कि सारे घर वाले यह बात सब चाहते हैं तो सब खुश हैं तो मैं भी खुश हूं दिव्या कैसी है कि मैं सब के बारे में नहीं पूछ रही हूं मैं सिर्फ तुम्हारे बारे में पूछ रही हूं क्या इस रिश्ते को लेकर तुम खुश हूं शेखर दिव्या से कहता है कि तुम इतने मेरे करीब मत आओ वरना यह सारी बातें तुम्हारे होने वाले पति को अच्छी नहीं लगेगी हो सकता है उसे कुछ गलतफहमी हो जाए दिव्या यह बात सुनकर हैरान हो जाती है।

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