Divya Drishti Written Update 29 December 2019 In Hindi

Divya Drishti Written Update 29 December 2019 Today Episode में आप सब देखेंगे कि कैसे दिव्य दृष्टि अतीत में जब जा रही होती है लाल चकोर के बारे में पता लगाने के लिए और वह उस किताब में चली जाती है और वहां जाकर उसे परछाई का पीछा करती है तभी एक आदमी लाल लिबाज मैं वहां से जा रहा होता है दिव्य दृष्टि उसका पीछा करने लगती है उसके बारे में पता लगाने के लिए दृष्टि कहते हैं कि हमें इसके आगे आना होगा इसकी शक्ल देखने के लिए दिव्य दृष्टि उसके आगे आकर खड़े हो जाती है पिशाचनी जब अपनी डिग्री में होती है तभी वहां पर लाल चकोर आ जाती है और पिशाचनी के सारे जनों को भर देती है और वहां पर पिशाचनी के सामने आकर खड़ी हो जाती है पिशाचनी लाल चकोर के सामने अपना सिर झुका देती है और उससे कहती है कि लाल चकोर आपका धन्यवाद मेरे जख्मों को ठीक करने के लिए लाल चकोर उससे एक काम करने के लिए कहती है पिशाचनी दिव्य दृष्टि के कमरे में जाती है।

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और उस किताब को ढूंढने की कोशिश करती है पिशाचनी की नजर उस किताब पर पड़ जाती है उस किताब में आग लगा देती है और वहां से चली जाती है उस कमरे से निकलकर जब पिशाचनी वहां से जा रही है होती है तभी वहां पर शिखर आ जाता है और पिशाचनी को देख लेता है दिव्या के कमरे से निकलता हुआ शिखर कहता है कि यह दिव्या के कमरे में क्या कर रही थी मुझे जाकर पता लगाना होगा जैसे ही उस किताब में आग लगती है अचानक से दिव्य दृष्टि नीचे गिर जाती हैं और उनकी आंखों की रोशनी भी चली जाती है और पूरे जगह पर आग लगने लगती है दिव्य दृष्टि कहती है कि मुझे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है दिव्या यह सब देखकर डरने लगती है दृष्टि कहती है कि हमारे आसपास ऐसा क्यों महसूस हो रहा है कि आग लगी हुई है।

दिव्या कहती है कि हां मुझे भी बहुत तेजी से गर्मी लग रही है दिव्या यह सब देखकर डरने लगती और दृष्टि से कहती है कि दी हमें यहां से चलना चाहिए यहां पर मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है दिव्य दृष्टि बाहर निकलने की कोशिश करती है लेकिन वह बाहर निकल नहीं पाती दिव्य दृष्टि और भी ज्यादा डर जाती है और दिव्य दृष्टि से कहती है कि मुझे बहुत ही ज्यादा डर लग रहा है मैं और आप इस जगह से कभी भी नहीं निकल पाएंगे दृष्टि कहती है कि तू चिंता मत कर कोई ना कोई रास्ता निकल ही आएगा थोड़ी देर के बाद वह लाल लिबाज वाला आदमी एक संदूक के पास जाता है और उसको खोल कर उसके अंदर चला जाता है दिव्य दृष्टि को संदूक की आवाज आ जाती है तभी दिव्या कहती है कि दी मैंने अभी किसी की आवाज सुनी है दिव्या आगे जाने की कोशिश करती है दृष्टि दिव्या को पकड़ लेती है और कहती है कि मैंने मना किया है कि मेरा हाथ मत छोड़ आगे आग लगी हुई है हमारे चारों तरफ शिखर दिव्या के कमरे में आ रहा होता है तभी रक्षित शिखर को देख लेता है हड़बड़ी में भागता हुआ रक्षित कहता है कि आखिर ये इतनी जल्दी में कहां जा रहा है मुझे इसका पीछा करना चाहिए रक्षित जब उसका पीछा कर रहा होता है तभी अचानक रक्षित को संगीत की आवाज आने लगती है और रक्षित संगीत के पीछे चला जाता है उसके बारे में पता लगाने के लिए शिखर दिव्या के कमरे में जाता है और वहां पर सारे सामान को बिखरा हुआ देखकर और दिव्या को ना पाकर चिंता करने लगता है वहां पर उस किताब में आग लगता हुआ देखता है उस आग को बुझा देता है।

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रक्षित जब संगीत का पीछा कर रहा होता है तभी अचानक वहां पर चिंकी घबराते हुए रक्षित के पास आती है और उसके गले पर कुछ पंजों के निशान बने होते हैं तभी वह रक्षित से डरते हुए कहती है कि अभी मेरे ऊपर किसी ने हमला किया है वह एक पंछी था यह बात सुनकर रक्षित उससे पूछता है कि तुम पर हमला हुआ कहां था चिंकी रक्षित को सुमिंग पुल के पास लेकर जाते हैं और उसे बताते हैं कि मेरे ऊपर यही पर हमला हुआ था रक्षित कहता है कि लेकिन यहां पर तो कोई भी ऐसा स्वराग नहीं है जिससे पता लग सके कि तुम पर यहीं पर हमला हुआ है चिंकी इतनी देर में वहां पर उस लाल पंख को लेती है और फेंक देती है और रक्षित को बताती है कि देखो रक्षित वह क्या है रक्षित उसे लाल पंख को उठाता है और कहता है कि इसका मतलब चिंकी पर हमला करने वाला कोई और नहीं बल्कि लाल चकोरी है तभी अचानक रक्षित को उसे म्यूजिक की आवाज आने लगती है और थोड़ी देर के बाद बंद हो जाते हैं तभी वहां पर शिखर आ जाता है और रक्षित को बताता है कि दिव्य दृष्टि अपने कमरे में नहीं है तुम मेरे साथ चलो और पूरा कमरा बिखरा हुआ है यह बात सुनकर रक्षित से कमरे में चला जाता है वहां पर जाकर देखता है कि दिव्या और दृष्टि कमरे में नहीं है और उस किताब को शिखर रक्षित को दिखाता है और उसे बताता है कि इस किताब में आग लगी हुई थी क्या तुम्हें इस किताब के बारे में पता है यह दिव्या की किताब है रक्षित कहता है कि हां मैं जानता हूं कि दिव्या की किताब है शिखर रक्षित को बताता है कि मैंने इस कमरे से पिशाचनी को निकलते हुए देखा है रक्षित कहता है कि इसका मतलब इस सबके पीछे कोई और नहीं बल्कि पिशाचनी ही है रक्षित पिशाचनी को ढूंढने के लिए वहां से निकल पड़ता है और पिशाचनी को जाते हुए देख लेता है पिशाचनी इतनी देर में रक्षित की आवाज को सुनकर रुक जाती है और अपने चेहरे पर वही घाव बना लेती है और रक्षित के सामने ड्रामा करने लगती है डरने का रक्षित अपने हाथों में तलवार ले लेता है और पिशाचनी पर हमला करने वाला होता है और उसे कहता है कि तुम ही थी जिसने दिव्या के कमरे में जाकर उसकी किताब में आग लगाई है बताओ दिव्य दृष्टि आकर है कहां पिशाचनी डरने का ड्रामा करती है और रक्षित से कहती है कि तुम मुझे मारना चाहते हो तो तुम मुझे मार दो वैसे भी मैं डर डर कर नहीं जीना चाहती रक्षित उसकी हालत को देखकर कुछ भी समझ नहीं पाता तभी शिखर कहता है कि लेकिन यह थोड़ी देर पहले तो बिल्कुल ही ठीक थे लेकिन अब यह नाटक क्यों कर रही है तभी शिखर रक्षित के पास आता है और उससे कहता है कि चलो छोड़ो हमें दिव्य दृष्टि को ढूंढना है यह बात सुनकर शिखर और रक्षित वहां से चले जाते हैं रक्षित जब वहां से जा रहा होता है और वह अपनी तलवार को फेंक देता है लेकिन इतनी देर में वहां पर चिंकी उस तलवार को पकड़ लेती है।

दिव्य दृष्टि जब उस गुफा में होती है तभी अचानक किताब में आग बुझने की वजह से दृष्टि को सब कुछ दिखाई देने लगता है दृष्टि दिव्या को बताती है कि दिव्या मुझे सब कुछ दिखाई दे रहा है तू भी अपनी आंखें खोल ले और यहां पर सारी आग बुझ चुकी है दिव्या जब अपनी आंखें खोल कर देखती है सारी आग बुझ चुकी होती है और उसे भी सब कुछ दिखाई देने लगता है दिव्या और दृष्टि आगे बढ़ती है और वहां पर दिव्या कहती है कि मां आखिर है कहां दृष्टि दिव्या को दिखाती है कि वह सब वहां पर है हमें वही पर चलना चाहिए दिव्य दृष्टि उस जगह जाने की कोशिश करती है तभी अचानक वहां पर एक अध्यक्ष दीवार की वजह से वहां जा नहीं पाती दृष्टि कहती है कि जहां पढ़ते एक अंतरिक्ष दिवार है इसका मतलब कोई यह नहीं चाहता कि हम उसे लाल चकोर के चेहरे को देखें दिव्या कहती है कि दी मुझे बहुत ही ज्यादा डर लग रहा है हमें यहां से चलना चाहिए दृष्टि कहती है कि हमने पहली बार भी कोशिश की थी लेकिन हमारे यहां से निकल नहीं पाए ठीक है तो हम एक और बार कोशिश करके देख लेते हैं दिव्य दृष्टि फिर से बाहर जाने की कोशिश करती हैं लेकिन वह जा नहीं पाती दृष्टि कहती है कि देखा मैंने कहा था कि हम यहां से निकल नहीं पा रहे हैं दिव्या और भी ज्यादा घबरा जाती है और दृष्टि से कहती है कि इसका मतलब हम यहां से निकल नहीं पाएंगे दृष्टि कहती है कि इन सब को देख कर ऐसा लगता है कि हमारी मां की किताब केसर किसी ने छेड़छाड़ की है यह सब उसकी वजह से ही हो रहा है और किसी ने आकर उस किताब को बचाया है जिसकी वजह से सारी आग बुझ चुकी है लेकिन हम यहां से निकल नहीं पा रहे हैं हमें आगे चलकर देखना होगा दिव्य दृष्टि जैसे ही आगे बढ़ती है तभी एक संदूक से टकरा जाती है दृष्टि जब संदूक को देखती है तभी वह दिव्या को बताती है कि हमने यहां पर किसी चीज की आवाज सुनी थी मुझे तो लगता है वह इसी संदूक की आवाज थी दिव्य दृष्टि उस संधू को खोल कर देखती है लेकिन उसमें कुछ भी दिखाई नहीं देता दृष्टि कहती है कि मुझे तो लगता है एक यही रास्ता है बाहर निकलने का हमें इसके अंदर जाना होगा और हम बाहर निकल जाएंगे हो सकता है दिव्या कहती है कि अगर हम कहीं फस गए तो हमें यह रिक्स नहीं लेना चाहिए दृष्टि कहती है कि तुझे यहां आस-पास कोई भी दरवाजा नजर आ रहा है इसका मतलब जो लाल चकोर था वह इसी में से होकर गया है हमें भी यहां से निकलना चाहिए वरना हम यहां से कभी भी नहीं निकल पाएंगे दिव्य दृष्टि उस संदूक के अंदर चली जाती है और सीधे किचन में उस संधू के जरिए आ जाती है।

शिखर रक्षित को बताता है कि पिशाचनी जो भी कह रही थी वह झूठ कह रही थी जब वह दिव्या के कमरे से निकली थी वह एकदम ठीक थी लेकिन अब उसके शरीर पर होगा वह झूठ बोल रही है मैं सच बोल रहा हूं वह उस कमरे से ही बाहर निकली थी और उसी ने उस किताब को जलाया है रक्षित उसकी बातों पर भरोसा नहीं करता और कहता है कि मुझे तुम्हारी बातों पर भरोसा नहीं है दिव्य दृष्टि उस गुफा में से उस संधू के जरिए जब किचन में आती है तभी वहां पर एक छोटा संदूक होता है उसी में से वह दोनों निकल कर आती है दिव्य दृष्टि उस छोटे संदूक को देख कर चौक जाती है और कहती है कि हम इस छोटे संदूक में से निकल कर आए हैं इसलिए देर वहां पर रक्षित और शिखर पहुंच जाते हैं और दिव्य दृष्टि की हालत को देखकर चौक जाते हैं रक्षित दृष्टि के पास आता है और दृष्टि उसे गले से लगा लेती है रक्षित दृष्टि से कहता है कि तुम्हें इतनी चोट कैसे लगी है और तुम यहां पर कैसे आए तभी शिखर दिव्या के पास चला जाता है और उससे उसकी हालत के बारे में पूछता है दिव्या उसे कहती है कि मैं बिल्कुल ठीक हूं इतनी देर में दिव्य दृष्टि उसे छूटे संदूक के बारे में बता रही होती है और जैसे ही उसे दिखाती है लेकिन इतनी देर में छोटा संदूक वहां से गायब हो जाता है दिव्य दृष्टि कहती हैं कि यहां पर एक छोटा संदूक रखा हुआ था वह जाने कहां गायब हो गया पिशाचनी जैसे देवरी में जाती है वहां पर लाल चकोरा जाती है पिशाचनी लाल चकोर को सिर झुका कर खड़ी हो जाती है तभी लाल चकोर को बताती है कि मैंने आपका काम कर दिया है अब दिव्य दृष्टि उस किताब से कभी भी बाहर नहीं निकल पाएंगे क्योंकि मैंने उस किताब को जला दिया है उसके आने और जाने का रास्ता मैंने बंद कर दिया है।

पिशाचनी लाल चकोर के साथ होती है तभी इतनी देर में वहां पर चिंकी आ जाती है और लाल चकोर के सामने अपना सिर झुका देती है और लाल चकोर को बताती है कि मुझे रक्षित का हथियार मिल चुका है अब हम उसी के हथियार से उसका सामना करेंगे दिव्य दृष्टि को हम खत्म करके ही रहेंगे तभी लाल चकोर गुस्से में आ जाती है और दोनों को अपनी चोंच से मारने लगती है और उन दोनों को बताती है कि दिव्य दृष्टि को सिर्फ मैं ही खत्म करूंगी यह बात सुनकर पिशाचनी चौक जाती है और कहती है कि दिव्य दृष्टि को आप ही खत्म करेंगे तो ठीक है तो आप ही खत्म करना दिव्य दृष्टि को दिव्य दृष्टि रक्षित और शिखर जब एक कमरे में होते हैं तभी वहां पर रक्षित की मां आ जाती है और दिव्य दृष्टि के बारे में कहती है कि तुम दोनों की हालत को देख कर मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम दोनों फिर से उस गुफा में गए हो मैंने तुम दोनों से कितनी बार मना किया है कि उस गुफा में मत जाना लेकिन कोई भी मेरी बात नहीं सुनता है और उस गुफा में चला जाता है दृष्टि रक्षित की मां से कहती है कि हम वहां पर अब नहीं जाएंगे रक्षित की मां दिव्य दृष्टि और रक्षित को अपने पास बुलाती है और उन तीनों से कहती है कि तुम तीनों उस गुफा में नहीं जाओगे तुम तीनों मुझसे वादा करो लेकिन तीनों रक्षित की मां से वादा नहीं करते तभी रक्षित की मां और भी ज्यादा डर जाती है और रोने लगती है कहती है कि कोई भी मेरी बात नहीं मानता है जब मैं कह रही हूं कि वह गुफा में नहीं जाना है तो नहीं जाना है तभी दिव्या रक्षित की मां की हालत को देखकर उनसे वादा कर देती है कि बड़ी मां मैं आपसे वादा करती हूं कि हम उस गुफा में नहीं जाएंगे रक्षित की चाची कहती है कि अब दिव्या ने तो वादा कर दिया है अब तुम दोनों की बारी है वादा करने की तभी दोनों वादा कर देते हैं कि हम दोनों भी उस गुफा में नहीं जाएंगे तभी रक्षित की चाची दिव्या से कहती है कि जाओ ऐश तुम्हारी चिंता कर रही है एक बार तुम उससे भी जाकर मिल लो दिव्या यह बात सुनकर वहां पर चली जाती है थोड़ी देर के बाद जब वह अपने कमरे में आती है और अपनों को देख रही होती है तभी इतनी देर में सीकर वहां पर आ जाता है दिव्या के चोट पर दवाई लगाने के लिए।

दिव्या वहां पर जब शिखर को देखती है उसे देखकर गुस्सा करने लगती है तभी शिखर कहता है कि मैं जानता हूं कि तुम मेरी बातों पर भरोसा नहीं करती हो लेकिन मैं सच बोल रहा हूं मैं जब तुम्हारे कमरे में गया था तुम वहां पर नहीं थी और मैंने उस किताब को जलते हुए देखा और मैंने उस पर पानी डालकर उस आग को बचाया था और इसी दौरान मेरा हाथ भी जल गया दिव्या कहती है कि मुझे कुछ भी लेना देना नहीं है कि तुमने कब क्या किया शिखर कहता है कि तुम चाहो तो मेरा इंतिहान भी ले सकती हो ताकि तुम मुझ पर भरोसा कर सकूं ऐसा मैं क्या करूं जिससे तुम्हारा भरोसा मुझ पर हो जाए दिव्या कहती है कि हो गया तुम्हारा तुम कमरे से जा सकते हो शिखर कहता है कि ठीक है तो मैं इस कमरे से जा रहा हूं शिखर इतनी देर में कमरे से बाहर चला जाता है रक्षित जब अपने कमरे में होता है तभी कह रहा होता है कि मैं कुछ तो बोल रहा हूं तभी वहां पर दृष्टि आ जाती है और रक्षित से पूछती है कि क्या हुआ तुम इतनी चिंता मैं क्यों हूं तभी रक्षित बताता है कि मुझे ऐसा लग रहा है मैं कुछ तो बोल रहा हूं सृष्टि कहती है कि कहीं तो मोबाइल तो नहीं बोल रहे हो तभी सुरक्षित बताता है कि नहीं मैं मोबाइल तो नहीं बोल रहा हूं लेकिन मैं कुछ तो बोल रहा हूं तभी रक्षित को याद आ जाता है कि वह अपनी तलवार को बोल रहा है रखकर वह उस तलवार को भूल गया है उसके बारे में जब सोच रहा होता है इतनी देर में दिव्या वहां पर चिंकी के हाथों में उस तलवार को देख लेती है और उसका पीछा करने लगती है चिंकी एक कमरे में जाती है तभी अचानक वहां से वह गायब हो जाती है और वहां पर कुछ जले हुए भी होते हैं दिव्या के किताब के उस कमरे में जाती है वहां पर चिंकी को ना देख कर उससे आवाज लगाने लगती है और सोचती है कि ऐसा तो नहीं चिंकी के पास जादुई शक्तियां है और वहां पर जब दिव्या की नजर उनकी किताब के पन्नों पर पड़ती है और वह कहती है कि यह तो मां की किताब के जले हुए पन्ने हैं इसका मतलब मेरा शक सही है।

रक्षित दृष्टि जब उस तलवार के बारे में जब सोच रहे होते हैं तभी वहां पर दिव्या कमरे में आ जाती है और रक्षित को बताती है कि मैं जानती हूं तुम्हारी तलवार कहां पर है मैंने उस तलवार कोचिंग की के हाथों में दिखाएं और वह तलवार को लेकर कमरे में गई थी और अचानक वहां से गायब हो चुकी है और मैंने वहां पर कुछ जले हुए उसी किताब के पन्ने भी देखे थे इसलिए मुझ पर तू उसे शक हो रहा है कि वह पिशाचनी के साथ मिली हुई है यह बात सुनकर दृष्टि कहती है कि मुझे उस लड़की पर शक है दिव्या बिल्कुल सही कह रही है रक्षित कहता है कि हमें इतनी जल्दी इस नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए आखिर उस लड़की ने हमारी जान भी बचाई थी दिव्य दृष्टि रक्षित से कहती हैं कि तुम यहां पर चिंकी को ढूंढो हम देवरी में जाकर देखते हैं जब चिंकी देवरी में जाती है तभी वहां पर पिशाचनी उसके हाथों में तलवार को देख लेती है और चिंकी को डांट नहीं लगती है कि यह क्या बेवकूफी है तुम इस तलवार को इस तरह से लेकर क्यों बोल रही हो अगर तुम्हारे हाथों में तलवार को किसी ने देख लिया तो चिंकी कहती है कि किसी को भी कुछ भी पता नहीं लगेगा पिशाचनी इतनी देर में चिंकी के हाथों से उस तलवार को ले लेती हो और चिंकी को नीचे धक्का मार देती है और तलवार को आग से जल आने लगती है चिंकी कहती है कि आखिर तुम भी कर क्या रही हो तभी पिशाचनी चिंकी पर हमला कर देती है तभी वहां पर इतनी देर में दिव्य दृष्टि पहुंच जाते हैं पिशाचनी कहती है कि मैं जान पूछ कर ही तुम्हारे साथ ऐसा बर्ताव कर रही थी ताकि दिव्य दृष्टि को तुम पर शक ना हो पाए दृष्टि जब उस तलवार को जलते हुए देखती है तभी वह पिशाचनी से कहती है कि इस तलवार को छोड़ो तभी पिशाचनी कहती है कि मैं तलवार को खत्म करके ही रहूंगी दृष्टि उस तलवार को लेने की कोशिश करती है लेकिन पिशाचनी ऐसा करने नहीं देती तभी दिव्या की नजर वहां पर पट्टी हुए पन्ने पर पड़ जाती है और वह सीता से कहती है कि तुम नहीं हमारे कमरे में आकर उस किताब में आग लगाई थी पिशाचनी कहती है कि इसका मतलब तुम्हें पता चल चुका है लेकिन तुम कुछ भी नहीं कर सकती दिव्य दृष्टि को किताबों के पन्ने के बारे में बताती है दृष्टि किताबों के पन्नों को लेने की कोशिश करती है लेकिन वह पिशाचनी इतनी देर में उनको अपने हाथों में ले लेती है।

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