Divya Drishti Tv Show

Divya Drishti Written Update 28 December 2019 In Hindi

Divya Drishti 5 January 2020
Written by Rajeev

Divya Drishti Written Update 28 December 2019 Today Episode में आप सब देखेंगे कि कैसे दिव्य दृष्टि अतीत में जाते हैं और वहां पर जाकर परछाई के बारे में पता लगाने की कोशिश करते हैं अतीत में जाकर दिव्य दृष्टि वहां पर उस पर छाई के पास जाते हैं लेकिन इतनी देर में वह परछाई लाल चकोर के रूप में आ जाती है जिसकी वजह से दिव्यदृष्टि उसकी असली रूप को नहीं देख पाती थोड़ी देर के बाद दिव्य दृष्टि लाल चौकोर पर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करती है लेकिन उस पर उस शक्तियों का कोई असर नहीं हो पाता लाल चकोर इतनी देर में वहां से चली जाती है दिव्य दृष्टि इतनी देर में अतीत से दोबारा वापस आ जाती हैं थोड़ी देर के बाद दिव्या अपने कमरे में उस किताब को पढ़ रही होती है अचानक वहां पर शिखर आ जाता है

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और दिव्या से बात करने की कोशिश करता है दिव्या अभी भी शिखर से नाराज होती है शिखर दिव्या से कहता है कि मैं तो सिर्फ तुम्हारा धन्यवाद करने के लिए यहां पर आया था तुमने मेरा साथ जो दिया और डाइनिंग टेबल पर भी तुमने मेरा साथ दिया दिव्या कहती है कि मैंने तुम्हारा साथ सिर्फ इसलिए दिया क्योंकि मोम को अच्छा लगता मोम तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करती हैं इसलिए मैंने मॉम की वजह से ही तुम्हारा साथ दिया है शिखर उस किताब के बारे में दिव्या से पूछता है लेकिन दिव्या उसे कुछ भी बताने से मना कर देती है शिखर दिव्या से कहता है कि जिस दिन तुम्हें मुझ पर और मेरी बातों पर भरोसा हो जाएगा उस दिन तुम खुद मुझे यह किताब दिखाओ गी तभी वहां पर दृष्टि आ जाती है और शिखर से कहती है कि वह दिन कभी भी नहीं आएगा मुझे तुम पर बिल्कुल भरोसा नहीं है शिखर इतना सुनकर वहां से जब जा रहा होता है तभी दृष्टि उसके मुंह पर ही दरवाजा बंद कर देती है।

दृष्टि दिव्य से कहती है कि तुम इस पर बिल्कुल भरोसा मत करना और इस किताब को तो तुम बिल्कुल भी शिखर को मत दिखाना यह बात सुनकर दिव्य दृष्टि से कहती है कि मैं इस किताब को कभी भी नहीं दिखाऊंगी आपको ऐसा लगता है मेरे बारे में कि मैं इस किताब को शिखर को दिखाऊंगी दृष्टि कहती है कि मैं तुझ पर कोई इल्जाम नहीं लगा रही हूं बस तुझसे कह रही हूं कि तू इमोशन में आकर इस किताब को शिखर को मत दिखा देना क्योंकि मुझे उस पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है और एक बार मेरी बात मान कर देख तो तू भी उस पर भरोसा मत कर दिव्य दृष्टि से कहती है कि भी हो सकता है शिखर जो भी कह रहा है वह सही है मैं उसकी बातों पर भरोसा करती हूं दृष्टि कहती है किंतु अच्छी तरीके से जानती है कि वह नरक लोक से आया है यह बात उसने हम सबसे छुपाई थी दृष्टि दिव्य से कहती है कि मैं उस पर सिर्फ इसलिए भरोसा करती हूं क्योंकि उसने हमसे कुछ भी नहीं छुपाया उसने हमें सच सच बताया था कि वह नरक लोक से आया है और बचपन से ही वहां पर रहा है इसलिए मुझे उसकी बातों पर भरोसा है दृष्टि कहती है कि लेकिन मुझे उसकी बातों पर भरोसा नहीं है क्योंकि वह चाहता तो मुझे या हम सब में से किसी को यह बात बता सकता था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया जब उसकी चोरी पकड़ी गई थी तब उसने यह बात सबके सामने मानी थी।

दिव्य दृष्टि अपने कमरे में बात कर रही होती है तभी वहां पर पिशाचनी के चिल्लाने की आवाज आती है दिव्य दृष्टि सोच में पड़ जाती है कि आखिर यह किसकी आवाज़ है सारे घर वाले भी आवाज को सुनकर वहां पर आ जाते हैं पूरे घर में अंधेरा होने की वजह से किसी को भी कुछ भी दिखाई नहीं देता है तभी वहां पर दिव्यदृष्टि आ जाते हैं और कहते हैं कि यहां पर हमें लाइट को जलाना होगा दिव्यदृष्टि वहां पर किसी के उड़ने की आवाज को सुन लेते हैं और कहते हैं कि यह तो किसी के पंखों की आवाज है थोड़ी देर के बाद वहां पर दिव्य दृष्टि रोशनी करती हैं तो वहां से वह पंखों की आवाज चली जाती है दिव्य दृष्टि कहती हैं कि अचानक पंख की आवाज बंद कैसे हो गई वहां पर जब देखा जाता है पिशाचनी कोने में रो रही होती है और चिल्ला रही होती है सारे घर वाले वहां पर आते हैं और उसकी हालत को देखकर चौक जाते हैं क्योंकि पिशाचनी को काफी ज्यादा चोट लगी होती है और वह जोर जोर से चिल्ला रही होती है कि मुझे छोड़ दो रक्षित कहता है कि इसको कमरे में लेकर चले जाओ पिशाचनी को कमरे में जब ले जाते हैं तभी वहां पर शिखर कुछ ऐसी चीज देख लेता है जिसे देख कर चौक जाता है और उसे उठा लेता है सारे घर वाले जब पिशाचनी को कमरे में छोड़ते हैं और उसकी हालत को देखकर उसे संभालने की कोशिश करते हैं लेकिन पिशाचनी घबराई हुई होती है पिशाचनी की हालत को देखकर दृष्टि कहती है कि यहां पर राशि नहीं है आखिर राशि है कहां सारे घर वाले डर जाते हैं तभी रोमी कहता है कि यहां पर तो चिंकी भी नहीं है तभी सारे घर वालों को चिंकी पर शक होने लगता है सारे घर वाले राशि को ढूंढने के लिए वहां से निकल जाते हैं दिव्य दृष्टि रक्षित जब वहां से जा रहे होते हैं शिखर उन तीनों को रोक लेता है और उनसे कहता है कि मुझे आप सबको कुछ दिखाना है।

सारे घर वाले जब चिंकी के कमरे में जाते हैं वहां पर जाकर देखते हैं कि राशि और चिंकी चेस खेल रहे होते हैं राशि की मां राशि को अपने पास बुलाती है और उससे पूछती है कि तुम ठीक तो हो राशि बताती है कि हां मां मैं बिल्कुल ठीक हूं आखिर हुआ क्या है मैं तो यहां पर चिंकी के साथ खेल रही थी राशि की मां राशि को कुछ भी नहीं बताती रोमी कहता है कि मुझे रक्षित जीजू को बता देना चाहिए कि चिंकी और राशि हमें मिल चुके हैं रक्षित को जैसे ही चिंकी और राशि के बारे में पता लगता है तभी रक्षित तीनों को बता देता है कि चिंकी और राशि तो कमरे में चेस खेल रहे थे और वह बिल्कुल ठीक है हम बेकार में ही विचार ही उस नई लड़की पर शक कर रहे हैं तभी दृष्टि यह बात सुनकर रक्षित से लड़ने लगती है और उससे कहती है कि तुम्हारी जिंदगी में मेरे सिवा कोई भी बेचारी लड़की नहीं होनी चाहिए यह लड़ाई को देखकर शिखर उन दोनों को रोकता है दृष्टि फिर से शिखर पर गुस्सा करने लगती है और उससे कहती है कि तुम हमारे बीच में मत बोलो और तुम यह बताओ कि आखिर तुम क्या बताना चाहते थे शिखर अपनी जेब में से एक लाल कलर का पंख निकालता है और दिव्य दृष्टि और रक्षित को देता है और उन्हें दोनों तीनों को बताता है कि यह मुझे उस जगह पर मिला था जिस जगह हमें पिशाचनी इस हालत में मिली थी मैंने यह पंख वहां पर देखा था और मैंने इसे उठा लिया दिव्यदृष्टि जब उसको देखती है तभी वह कहती हैं कि यह तो लाल कलर का पंख है कहीं ऐसा तो नहीं है उसी लाल चकोर का काम है।

थोड़ी देर के बाद पिशाचनी जब अपने कमरे में सो रही होती है तभी वहां पर पिशाचनी को देखने के लिए रक्षित की मां और चाची आ जाते हैं और पिशाचनी को देखने लगते हैं और उसके बारे में बात करते हैं कि आखिर इसकी हालत है किसने ऐसी कर दी होगी तभी पिशाचनी को इतनी देर में होश आ जाता है और वह रक्षित की चाची का गला पकड़ लेती है और उससे कहती है कि यह जोत मेरी हालत हुई है वह तूने ही की है मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगी रक्षित की मां और चाची घबरा जाती है और उस कमरे से बाहर निकल जाती हैं दिव्य दृष्टि किचन में होती है दिव्या लाल चकोर के बारे में बात करती है दृष्टि दिव्य से कहती है कि जब हम अतीत में गए थे वहां पर जाकर हमने उस लाल चकोर को देखा था लेकिन उसके असली रूप को देखने से पहले यह वह लाल चकोर चिड़िया में बदल गई थी हम उसकी शक्ल ही नहीं देख पाए उसके बारे में हमें पता लगाना ही होगा दिव्या कहती है कि इसका बस एक ही तरीका है हमें उस गुफा में जाना ही होगा दृष्टि शिखर पर भरोसा करने के लिए दिव्या से मना कर देती है कि हम उस पर भरोसा नहीं कर सकते तभी दिव्या उससे कहती है कि दी लेकिन मैंने खुद देखा था शिखर के हाथों से उस जगह पर रोशनी निकल रही थी इसका मतलब वही हमारी मदद कर सकता है उस गुफा में जाने के लिए तभी वहां पर शिखर रक्षित और रोमी आ जाते हैं शिखर उन दोनों से पूछता है कि आप दोनों को मेरी क्या मदद की जरूरत है दृष्टि शिखर को कुछ भी बताने से मना करती है लेकिन दिव्य दृष्टि की एक भी नहीं सुनती और शिखर को बताने लगती है कि आखिर उस गुफा में जाने के लिए हमें तुम्हारी मदद की जरूरत पड़ेगी यह बात सुनकर दृष्टि भी दिव्या की बातों में आ जाती है और कहती है कि ठीक है तो मैं तुम्हें बता देती हूं और उस गुफा के बारे में बताने लगती है कि हमें उस गुफा के अंदर जाने के लिए तुम्हारी मदद की जरूरत है शिखर उन तीनों की मदद करने के लिए मान जाता है रोमी कहता है कि मैं यहां पर रहकर नजर रखूंगा।

रक्षित अपनी मां को उस गुफा के बारे में बताने के लिए जाता है कि हम चारों उस गुफा में जा रहे हैं तभी रक्षित की मां यह बात सुनकर परेशान हो जाती है और रक्षित से कहती है कि नहीं तुम वहां पर नहीं जाओगे क्योंकि वह जगह मानुष है वहां पर मेरे पिता की मृत्यु हुई थी और मैं तुम्हें उस गुफा में नहीं जाने दूंगी रक्षित अपनी मां को समझाने लगता है लेकिन रक्षित की मां एक भी बात सुनने के लिए राजी नहीं होती दृष्टि रक्षित की मां को समझाने की कोशिश करती है लेकिन रक्षित की मां दृष्टि की एक भी नहीं सुनती और दृष्टि उनसे झूठ बोल देती है कि हम कहीं भी नहीं जाएंगे थोड़ी देर के बाद रक्षित की मां अपने कमरे में जब सो रही होती है तभी वहां पर रक्षित आ जाता है और अपनी मां से माफी मांगता है तभी वहां पर राशि आ जाती है और रक्षित के कंधे पर हाथ रख देती है और उनसे पूछती है कि भाई आप यहां पर तभी रक्षित अपनी बहन को बाहर ले जाता है और उसे सारी बातें बता देता है कि हम उस गुफा में जा रहे हैं वहां पर दिव्या और दृष्टि भी होते हैं राशि उन तीनों से कहती है कि पर आपने तो मां से कहा था कि आप उस गुफा में नहीं जाएंगे दृष्टि कहती है कि हमने मां से झूठ बोला है क्योंकि वह बहुत ही ज्यादा घबराई हुई थी और वह हमारी बात सुनने के लिए मान ही नहीं रही थी हमारा उस गुफा में जाना बहुत ही ज्यादा जरूरी है राशि उनकी बात मान जाती है और उनसे कहती है कि ठीक है लेकिन आपको मुझे रिश्वत देनी होगी दिव्या राशि को न्यू ब्रांड का हाइलाइटर देने की बात करती है राशि यह बात सुनकर बहुत ही ज्यादा खुश हो जाती है तीनों इतनी देर में वहां से निकल जाते हैं शिखर बाहर तीनों का इंतजार कर रहा होता है रक्षित शिखर से कहता है कि हम तुझे अपने साथ लेकर तो जा रहे हैं लेकिन यह मत समझना कि मैं तुम पर भरोसा करता हूं इतना कहकर चारों वहां से निकल जाते हैं।

चारों उस गुफा के पास पहुंचते हैं और अपना अपना हाथ हाथों के निशानों पर रख देते हैं दिव्य दृष्टि और रक्षित का हाथ चमकने लगता है लेकिन शिखर का हाथ नहीं चमकता यह सब देखकर रक्षित चौक जाता है थोड़ी देर के बाद ही शिखर का हाथ भी चमकने लगता है दिव्या कहती है कि मैंने कहा था कि शिखर का हाथ जरूर चमकेगा लेकिन चारों का हाथ लगने की वजह से गुफा का दरवाजा फिर भी नहीं खुल पाता तभी दृष्टि शिखर पर इल्जाम लगाती है कि यह सब तुम्हारी वजह से ही हो रहा है शिखर इस बात को सुनकर चौक जाता है दृष्टि उस पर इल्जाम लगाती है कि यह जो हाथ चमक रहा है इसमें भी तुम्हारी कोई ना कोई साजिश है क्योंकि तुम नरक लोक से आए हो तुमने इस हाथ को चमकाने के लिए कुछ ना कुछ तरकीब लगाई होगी शिखर कहता है कि इसमें मेरी कोई चाल नहीं है इसके बारे में तो मुझे कुछ पता भी नहीं था मैंने कुछ भी नहीं किया है चिंकी और राशि जब एक कमरे में सो रही होती हैं अचानक चैन की नींद से उठती है और अपने हाथों में जो लाल चकोर का चिन्ह बना होता है उसे टच करती है तभी लाल चकोर सामने आ जाती है और वह वहां से उठकर चली जाती है सारे घर वाले जब अपने अपने कमरे में सो रहे होते हैं तभी अचानक पिशाचनी की आवाज आने लगती है उस जोर जोर से चिल्ला रही होती है कि कोई भी जिंदा नहीं बचेगा तभी वहां पर सारे घर वाले पिशाचनी के कमरे में आते हैं पिशाचनी की हालत को देखकर सारे घर वाले घबराने लगते हैं रक्षित की मां कहती है कि रक्षित है कहां पर तभी वो रक्षित के कमरे में जाती है और सारे घर वालों को पता लग जाता है कि रक्षित शिखर दिव्या और दृष्टि घर में नहीं है यह सब देखकर रक्षित की मां चौक जाती है और सब को एक कमरे में इकट्ठा होने के लिए बोल देती है।

सारे घर वाले जब एक कमरे में आते हैं तभी थोड़ी देर के बाद रक्षित की मां कहती है कि लेकिन यहां पर राशि क्यों नहीं है सारे घर वाले कहते हैं कि हमें राशि को ढूंढना होगा रक्षित की मां राशि को ढूंढने के लिए वहां से निकल जाती है शिखर की मां रक्षित को फोन लगाती है और उनसे कहती है कि तुम चारों हो कहां जल्दी से घर पर आ जाओ यहां पर कुछ भी ठीक नहीं है और राशि भी नहीं मिल रही है रक्षित यह सब सुनता है तभी वह चौक जाता है और चारों वहां से निकल जाते हैं थोड़ी देर के बाद सारे घर वाले जब राशि को ढूंढ रहे होते हैं तभी अचानक राशि के चिल्लाने की आवाज आती है सारे घर वाले स्विमिंग पूल के पास आ जाते हैं सुमिंग पुल के ऊपर राशि लटकी हुई होती है सारे घर वाले राशि को देख कर चौक जाते हैं और राशि की मां अपना होश खो बैठती है और उसके पास जाने की जिद करने लगती है सारे घर वाले राशि की मां को संभाले लगते हैं तभी वहां पर दिव्य दृष्टि रक्षित और शिखर पहुंच जाते हैं दिव्या अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करती है और राशि को नीचे लाने की कोशिश करती है रक्षित स्विमिंग पूल के अंदर चला जाता है और राशि को अपनी गोद में ले लेता है राशि को जब बाहर निकाला जाता है रक्षित की मां राशि को होश में लाने की कोशिश करती है लेकिन राशि होश में नहीं आ पाती दिव्य कहती है कि यह राशि क्यों नहीं उठ रही है जबकि बड़ी मां राशि को इतना उठाने की कोशिश कर रही है दिव्या जब राशि को देखती है राशि की सांसे चल नहीं रही होती यह बात बड़ी मां को बताने की कोशिश करती है बड़ी मां दिव्या पर चिल्ला जाती है कि मेरी बेटी को कुछ भी नहीं हुआ है तुम शांत रहो रक्षित जब राशि की सांसे चेक करता है तभी वह अपनी मां से कहता है कि मां अब राशि इस दुनिया में नहीं है वह हमें छोड़ कर जा चुकी है यह बात सुनकर राशि की मां अपना होश खो देती है।

रक्षित की मां राशि की हालत को देखकर जब अपना होश होती है तभी वह रक्षित को चांटा मार देती है और कहती है कि मैंने तुझसे मना किया था उस मनहूस गुफा में जाने के लिए लेकिन तूने मेरी एक भी नहीं मानी और उस गुफा में चला गया अब तू ही देखकर आखिर तेरी वजह से यह सब हो क्या गया है तू मेरी नजरों से दूर चला जा यह बात सुनकर रक्षित भी टूट जाता है सारे घर वाले राशि के अंतिम संस्कार की तैयारी करते हैं और राशि को जलाकर जब रक्षित घर में आता है वह अपने होश खो देता है और कमरे में बैठकर राशि की तस्वीर को देख देख कर रोने लगता है दिव्या जब अपने कमरे में राशि को लेकर रो रही होती है तभी वहां पर शिखर आ जाता है और दिव्या से कहता है कि मैं यहां पर इसलिए आया हूं क्योंकि मैं सारे घर वालों को दिलासा देना चाहता हूं लेकिन कोई भी मुझे पसंद नहीं करता है इसलिए मैं सिर्फ दिलासा देने की कोशिश कर रहा हूं तुम सब का साथ देकर शिखर दिव्या के पास आकर बैठता है और उससे बात करने की कोशिश करता है थोड़ी देर के बाद वहां पर दृष्टि आ जाती है शिखर और दिव्या को एक साथ देख लेती है शिखर दृष्टि से कहता है कि मैं तो बस जा ही रहा था और शिखर इतनी देर में वहां से चला जाता है दृष्टि दिव्य से पूछती है कि यहां पर क्यों आया था दिव्य दृष्टि से कहती है कि ऐसे ही आया था दृष्टि फिर से दिव्या को समझाती है कि मैंने तुझसे कहा है कि इससे जितना हो सके उतना दूर रहना मुझे इस पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है दिव्य दृष्टि से कहती है कि मैं हमेशा दी आपकी बातों पर भरोसा करती हूं एक बार आप मेरी बातों पर भरोसा करके देखो और शिखर को एक चांस दो यह बात सुनकर दृष्टि चौक जाती है।

दृष्टि रक्षित के कमरे में जाती है उसकी हालत को देखकर उसे समाने लगती है रक्षित अपने ऊपर सारा इल्जाम लेता है कि जो भी राशि के साथ हुआ है वह मेरी वजह से हुआ है मां ने मुझसे तो मना किया था कि मैं उस गुफा में नहीं जाऊं लेकिन मैंने अपनी मां की एक भी नहीं सुनी और मैं उस गुफा में चला गया और उसकी वजह से ही राशि अब हमारे साथ नहीं है दृष्टि रक्षित से कहती है कि इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है हम तो सिर्फ कुछ पता लगाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन हमें क्या पता था कि आखिर यह सब हो जाएगा तुम सारा इल्जाम अपने ऊपर मत लो इसमें तुम्हारी कोई भी गलती नहीं है रक्षित थोड़ी देर के बाद अपनी मां के कमरे में जाता है और उन्हें संभालने की कोशिश करता है लेकिन रक्षित की मां रक्षित से बहुत ही ज्यादा नाराज होती है और उसे कमरे से जाने के लिए बोल देती है रक्षित अपनी मां की हालत को देखकर कमरे से बाहर चला जाता है और अपने कमरे में जाकर राशि के तस्वीर के आगे कैंडल जला देता है तभी वहां पर रक्षित की चाची आ जाती है और रक्षित से कहती है कि तुमने अच्छा नहीं किया जबकि भाभी ने तुमसे मना किया था वहां पर जाने के लिए फिर भी तुमने उनकी बात नहीं मानी और तुम उस जगह पर चले गए रक्षित चाची से कहता है कि मैं क्या करूं मेरा वहां पर जाना बहुत ही जरूरी था कुछ दिनों से जो हमारे घर में हो रहा है वह सब सही नहीं हो रहा है उसी का पता लगाने के लिए हमें वहां पर जाना था तभी चाची कहती है कि फिर तुम्हें वहां पर जाकर कुछ पता लगाया नहीं है रक्षित बताता है कि नहीं वहां पर हमें कुछ भी पता नहीं लग पाया है क्योंकि हम उस गुफा के अंदर ही नहीं जा पाए आप मेरा एक काम करेंगे आप मां को संभालेंगे क्योंकि उनकी हालत सही नहीं है चाची इतना सुनकर वहां से रक्षित की मां के कमरे में चली जाती है।

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Rajeev Kumar Saini