Divya Drishti 30 November 2019 Written Update In Hindi

Divya Drishti 30 November 2019 Aaj के Episode में आप सब देखेंगे कि कैसे दिव्या मुरारी के प्रताप से बहुत ही ज्यादा खुश हो जाती है और उसे गिफ्ट देने की कोशिश करती है और उसके गिफ्ट पैक करके उसके कमरे में ले जाती है जब मुरारी अपने कपड़े बदल रहा होता है इतनी देर में वहां पर दिव्या पहुंच जाती है और मुरारी को कपड़े बदलते हुए देख लेती है तभी वह अपना मुंह फेर लेती है लेकिन उससे पहले उसे मुरारी के शरीर पर एक निशान दिखाई दे जाता है तभी वह मुरारी से उस निशान के बारे में पूछती है मोरारी सोचता है कि कहीं ऐसा तो नहीं दिव्या ने मेरे पीठ पर नंबर लिखा हुआ है उसे देख लिया हो मुरारी दिव्या से पूछता है कि आखिर कौन सा निशान दिव्या बताती है कि तुम्हारे शरीर पर एक निशान है जो बिल्कुल एक हुक की तरह दिखता है मुरारी दिव्या को बताता है कि वह तो मेरी बचपन में चोट लग गई थी उसका ही निशान है दिव्या कहती है कि मैं तुम्हारे लिए गिफ्ट लेकर आई हूं क्योंकि तुमने नरक लोक में मुझे बचाया था।

दृष्टि रक्षित से नाराज होकर कमरे से निकल जाती है और गुस्से में जब वहां से जा रही होती है तभी दृष्टि को किसी के रोने की आवाज सुनाई देती है तभी वह कहती है कि आखिर कौन रो रहा है तभी वह कमरे में छुपकर जब देख रही होती है वहां पर पिशाचनी बैठ कर रो रही होती है तभी दृष्टि कहती है कि आखिर यह क्यों रो रही है इतनी देर में दृष्टि के नजर पिशाचनी के हाथों पर पड़ जाती है पिशाचनी के हाथों पर वही जले हुए हुक जैसे निशान बना होता है तभी दृष्टि कहती है कि इतना बड़ा निशान है किस चीज का और आखिर यह चोटिला को लगी कैसे इतना देखकर दृष्टि डिसाइड करती है कि वह यह सारी बातें रक्षित को जाकर बता देगी और जैसे ही वह कमरे में जाती है और वहां पर जाकर देखती है कि रक्षा सोने का नाटक कर रहा है तभी वह कहती है कि आखिर यह सो भी रहे हैं या फिर मुझे देखकर नाटक कर रही है इसे पता लगाने का सिर्फ एक ही तरीका है।

दृष्टि रक्षित को उठाने के लिए नाटक करने लगती है और कहती है कि चलो अब रक्षित तू सो गए हैं अब मुझे डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं है अब मैं जो चाहे वह कर सकती हूं दृष्टि लैपटॉप पर जाकर बैठ जाती है और क डेटिंग वेबसाइट खोल लेती है और कहती है कि मैं एक अच्छा सा फोटो अपलोड कर देती हूं जिससे हो सकता है मेरे पास कोई लड़का हैंडसम सा डेटिंग के लिए मुझसे पूछी ले तभी वह फोटो को डिसाइड कर रही होती है तभी रक्षित नींद से जाग जाता है और कहता है कि यह तो सचमुच डेटिंग वेबसाइट पर अपनी फोटो अपलोड कर रही है रक्षित उठता है और दृष्टि के पास चला जाता है और उससे कहता है कि तुम यह क्या कर रही हो तभी दृष्टि रक्षित से कहती है कि तुम यह बताओ कि मेरी फोटो अच्छी लग रही है मैं इसी को अपलोड कर देती हूं।

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रक्षित यह सब देखकर गुस्से में आ रहा होता है और जलन के मारे वह अपने हाथों में पानी का गिलास लेता है और जानबूझकर उस लैपटॉप पर गिर देता है दृष्टि रक्षित से नाराज हो जाती है और वहां से यह कह कर चली जाती है कि वह अब दिव्या के ही कमरे में जाकर सोएगी दिव्या के कमरे में सोने के लिए दृष्टि वहां से चली जाती है और जब वह दिव्या की कमरे में सो रही होती है इतनी देर में दृष्टिकोण सपना दिखाई देता है उस सपने में दृष्टि के पीछे कुछ वाईकर दृष्टि के पीछे लग जाते हैं और उसे घेर लेते हैं दृष्टि डर जाते और दिव्या को बताने के लिए जैसे ही उसे उठा रही होती है तभी वह देखती है कि दिव्या उसके बगल में नहीं है तभी वह घबरा जाती है और वहां से उठकर जैसी जा रही होती है तभी वहां पर दिव्या आ जाती है और दृष्टि से टकरा जाती है।

दिव्या दृष्टि से पूछती है कि आखिर क्या बात है दी अब कहां जा रही थी और इतनी डरी हुई क्यों है दृष्टि जैसे ही अपने सपने के बारे में दिव्या को बताने वाली होती है तभी दिव्य दृष्टि को रोक लेती है और उससे कहती है कि आप मेरे साथ चलिए मुझे आपको कुछ दिखाना है तभी दिव्य दृष्टि को वहां से ले जाती है बिना उसकी बात सुने मुरारी जब अपने कमरे में सो रहा होता है तभी 12 बजते ही वह नींद से उठता है और कहता है कि आज मेरा जन्मदिन है और वह आईने में देखकर अपने आपको जन्मदिन की बधाई देना शुरू कर देता है तभी वहां पर सारे घर वाले आ जाते हैं केक को लेकर और मुरारी को जन्मदिन की बधाई देते हैं मुरारी कहता है कि आखिर इन सब को कैसे पता कि आज ही मेरा बर्थडे है कैसा इत्तेफाक है इनके शेखर का और मेरा बर्थडे एक ही दिन है ऐसा कैसे हो सकता है।

मुरारी के काटता है और सारे घर वाले मुरारी को गिफ्ट देते हैं सारे घर वाले डाइनिंग टेबल पर जब बैठ कर नाश्ता कर रहे होते हैं तभी वहां पर रक्षित की मां आ जाती है और सारे घर वालों को अपनी पुरानी हवेली के बारे में बताती है कि वहां पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है हमारी पुरानी हवेली पर हमारी पुरानी हवेली बहुत ही ज्यादा अच्छी है और उसके साथ मेरी कितनी यादें जुड़ी हुई है तभी वह दुखी हो जाती है इतना कहकर वहां से वह चली जाती है रक्षित दृष्टि दिव्या और मुरारी रक्षित की मां के पास जाते हैं वह पुरानी हवेली की कुछ फोटोग्राफ्स देख रही होती है तभी वह दुखी होकर कहती हैं कि इस हवेली से हमारी काफी ज्यादा यादें जुड़ी हुई है रक्षित बताता है कि वहां पर एक आम का पेड़ भी हुआ करता था जिस पर मैं चढ़कर आम तोड़ा करता था तभी वहां पर मुरारी आ जाता है और वह रक्षित को बताता है कि नहीं आम के पेड़ पर मैं खड़ा करता था और आपको आम तोड़ कर दिया करता था।

दृष्टि कहती है कि यही तुम्हें सोचो कि आखिर इन में इतनी हिम्मत आ कैसे गई और फिर पड़ गई रक्षित डिसाइड करता है कि मैं और मुरारी पुरानी हवेली को बचाने के लिए उसी गांव में जाएंगे और पुरानी हवेली को बचाएंगे दृष्टि कहती है कि हम क्यों नहीं जा सकते तभी रक्षित कहता है कि नहीं हम दोनों ही जाएंगे लड़कियां नहीं जाएंगे दृष्टि यह बात सुनकर गुस्से में आ जाती है और वहां से चली जाती है दृष्टि डिसाइड करती है कि रक्षित के साथ जरूर जाएगी और इतना कहकर वहां से चली जाती है दृष्टि दिव्य से कह जाती है कि सिर्फ मैं जाऊंगी तू नहीं जाएगी दिव्या कहती है कि मैं भी जाना चाहती हूं तभी वह और दृष्टि में जाती हैं और रक्षित की मां को बना लेती हैं कि रक्षित के साथ दृष्टि का जाना कितना जरूरी है तभी रक्षित की मां दृष्टि को जाने की इजाजत दे देती हैं लेकिन दिव्या को मना कर देती है कि वह उनके साथ नहीं जाएगी थोड़ी देर के बाद वह कहती है कि नहीं मैं तो जरूर जाऊंगी इसके लिए मुझे कुछ करना होगा।

दिव्या शेखर के कमरे में जाती है और उसे बना लेती है कि उसे भी मुझे लेकर चलना चाहिए क्योंकि दृष्टि दी और रक्षित एक साथ मिलते हैं तो वो झगड़े के सिवा कुछ नहीं करते तुम वहां पर बोर हो जाओगे इसलिए मेरा चलना बहुत ही ज्यादा जरूरी है मैं तुम्हारे साथ चलना चाहती हूं मुरारी बिना बात सुने ही वहां से चला जाता है दृष्टि जब सामान को पैक कर रही होती है तभी रक्षित वहां पर आ जाता है और दृष्टि से कहता है कि तुम मेरे साथ क्यों चलना चाहती हो दृष्टि कहती है कि तुम यह नहीं समझ रहे हो कि मैं क्या चाहती हूं मैं तो सिर्फ यह चाहती थी कि हम दोनों टाइम स्पेंड करें लेकिन तुम्हारे सर मैं तो कोई बात ही नहीं रही है तुम कुछ सोचते भी नहीं हो तभी दृष्टि रक्षित से नाराज हो जाती है और उससे झगड़ा करने लगती है तभी वहां पर दिव्या रक्षित की मां को और चाची को ले आती है और उन दोनों को दिखाती है कि यह देखो यह दोनों तो हमेशा लड़ते ही रहेंगे इसलिए मुझे तो इनके साथ चलना ही होगा दोनों दिव्या को भी जाने की इजाजत दे देते हैं।

जैसे ही चारों गांव में पहुंचते हैं गांव में एक नया सरपंच बना होता है तभी जैसे ही वहां पर सब पूछते हैं तभी वह सब चारों को बताते हैं कि तुम सब अच्छे मौके पर आए हो क्योंकि जहां पर एक नया सरपंच बना है तभी वह सरपंच आगे आता है शायद चारों जने उसे बधाई देते हैं सरपंच बनने की तभी वहां पर एक दुल्हन और दूल्हा जाते हैं और लेडीस बताती है कि इसकी अभी अभी शादी हुई है इसलिए तो पूरे गांव का खाना यहीं पर है तुम चारों को यहीं पर आज खाना खाना होगा तभी वहां पर एक बच्चा आ जाता है और रक्षित और दृष्टि से कहता है कि भैया और भाभी नमस्ते और दिव्या और मुरारी से कहता है कि भैया भाभी नमस्ते तभी वह दोनों चौक जाते हैं और उस बच्चे से मना कर देते हैं कि हम दोनों भैया और भाभी नहीं है।

थोड़ी देर के बाद चारों जब सरपंच के पास बैठे होते हैं तभी वहां पर चारों पांचों भाई करा जाते हैं उसे आता हुआ देख सारे गरबा गांव वाले इधर-उधर भागने लगते हैं दिव्य दृष्टि रक्षित और मुरारी करो उसे गांव वालों को बचाने की कोशिश करते हैं और वह वायकर वहां से लड़ कर भाग जाते हैं रक्षित दृष्टि को ले जाकर अपनी हवेली दिखाता है और दृष्टि को बताता है कि हम यहां पर हमेशा छुपन छुपाई का खेल खेला करते थे हमें वह खेल बहुत ही ज्यादा पसंद था और मैं जैसे ही छुपता था तो शेखर हमेशा चीटिंग करके मुझे ढूंढ लेता था और मैं जानता हूं कि वह हमेशा चीटिंग करता था शेखर भी दिव्या को यह सारी बातें बता रहा होता है जैसे ही सुबह होती है चार हो गांव में दोबारा वापस आ जाते हैं और हर एक घर के आगे मटकी को टंगा हुआ देखते हैं दृष्टि कहती है कि यह मटकी तो हर एक घर में टंगी हुई है और यह मटकी तो अस्थियों वाली मटकी है लेकिन हर घर में क्यों टंगी हुई है हमें इसके बारे में पूछ लेना चाहिए तभी वहां पर एक बूढ़ी औरत आ जाती है तभी वह चारों से कहती है कि मैंने तुम सब के लिए पोहा बनाया है तुम आकर पोहा खा लो तभी वह चारों मना कर देते हैं तभी वहां पर वह दुल्हन घर में झाड़ू लगा रही होती है जुड़े में तभी दिव्या और दृष्टि पूछते हैं कि यह तुलना अभी तक दुल्हन वाले कपड़े क्यों पहने हैं तभी वह बूढ़ी दादी बताती है कि हमारे गांव में एक रिवाज है जो भी दुल्हन यहां पर आती है वह दो रात जोड़े में ही रहती है आज के बाद कलेजी जुड़ा दुल्हन उतार देगी।

दिव्य दृष्टि और रक्षित को कुछ अच्छा नहीं लगता और वहां से वह चले जाते हैं जब चारों अपने कमरे की तरफ जा रहे होते हैं तभी दृष्टि रक्षित से कहती है कि हम तो यहां पर शेखर को यह कहकर लेकर आए थे कि हम गांव में जाकर एंजॉय करेंगे लेकिन यहां पर तो इंजॉय के बदले हम प्रॉब्लम हो का पिटारा लेकर बैठ गए हैं तभी तीनों शेखर के पास जाते हैं और उससे पूछते हैं कि आखिर तुम इस गांव में सबसे पहले क्या करते थे और क्या सबसे ज्यादा अच्छा लगता था तभी शेखर बताता है कि हमें तो छुपन छुपाई का खेल बहुत ही ज्यादा अच्छा लगता था रक्षित शेखर से कहता है कि आखिर तुम वहां पर क्या देख रहे हो शेखर बताता है कि मैं वहां पर यह देख रहा हूं कि मुझे ऐसा लग रहा है कि उसके पीछे कुछ छुपाया गया है रक्षित कहता है कि हां वहां पर कुछ छुपाया गया था लेकिन यह बात तुम्हें कैसे पता वहां पर तो मैंने ही कुछ छुपाया था जब हम दोनों छुपन छुपाई का खेल खेलते थे तो तुम हमेशा चीटिंग करते थे और तुम्हें पकड़ने के लिए मैंने एक वीडियो कैमरे से सब कुछ रिकॉर्ड किया था और वहां पर गाड़ दिया था तभी चारों उस वीडियो रिकॉर्डिंग की कैमरे को निकालते हैं और डिसाइड करते हैं कि वह कैमरे को देखेंगे और उसे लॉज में ले जाते हैं।

लॉज में जाकर उसको देख रहे होते हैं तब वहां पर गुड़ी लेडीस आ जाती है वह चारों को बताती है कि यहां पर भाई कराने वाले हैं हम मेरे बेटा वहां पर गया था और उसने बताया था कि वह वायकर कुछ बात कर रहे हैं हमें कुछ करना होगा तभी वह चारों डिसाइड करते हैं कि हमने फुटेज बाद में देखेंगे पहले हमें करो को देख लेना चाहिए तभी वह बूढ़ी आंटी वहां से चली जाती है दिव्य दृष्टि डिसाइड करती है कि वह से लड़ने के लिए जाएंगी और शेखर और रक्षित गांव में रुक कर गांव वालों की रक्षा करेंगे दिव्य दृष्टि वहां से चली जाती हैं तभी वह वीडियो जो चल रही होती है अचानक वह खराब हो जाती है थोड़ी देर के बाद रक्षित अपनी शक्तियों की मदद से एक तलवार को लेता है और शेखर को दे देता है और उसे कहता है कि तुम्हारे पास शक्तियां नहीं है तो तुम इस तलवार का यूज करोगे तभी वह तलवार टीवी पर जाकर लग जाती है अचानक वो टीवी चलना शुरू हो जाती है वह फोटो जैसे ही दिखाई जा रही होती है तभी रक्षित उस वीडियो में दो बकरा होता है तभी वहां पर एक बच्चा आता है और शेखर को बता देता है कि आखिर रक्षित कहां पर रुका हुआ है तभी वह दोनों गौर से देखते हैं और कहते हैं कि यह तो वही बचा है जो मैंने गांव में देखा था तभी वहां पर जो भी हर एक इंसान होता है वह गांव में होता है तभी वह कहते हैं कि आखिर यह गांव वाले इस फुटेज में कैसे दिखाई दे सकते हैं क्योंकि यह गांव वाले तो हमने कल ही देखे हैं और जो काफी साल पुरानी है इसका मतलब गांव वाले पहले ही मर चुके हैं और उनके घर के सामने जो मटकिया ठनी हुई है वह उन्हीं की अस्थियां है।

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