Divya Drishti – 3 November 2019 – Written Update In Hindi

Divya Drishti 3 November 2019 Aaj के Episode में आप जब देखेंगे कि कैसे नाटक जब जवाब पर हो रहा होता है तभी तिलक गब्बर का रूप रखकर वहां पर आ जाती है तभी सारे घर वाले उसे देखकर सभी चौक जाती हैं तभी मां पर रक्षत की मां आती है और उस पिशाचनी से कहती है कि अगर तू कब पर है तू मैं ठाकुर हूं इतनी देर में वहां पर रक्षत और मुरारी आ जाते हैं पिशाचनी उन दोनों को देखकर उनसे कहती है कि ठाकुर तभी वहां पर अक्षय स्कीम आती है और उससे कहती है कि गब्बर तो मैं हूं ठाकुर तो मैं हूं।

पाताली इतनी देर में वहां पर आती है और सब से कहती है कि असली ठाकुर तो वहां पर है आइए मैं सबको दिखाती हूं तभी तो पाताली अपने साथ सारे घरवालों को पुल की साइड ले जाती है पाताली वहां पर जो पुल के ऊपर जो बुरी टंकी होती है उसमें दिव्या होती है तभी ऊपर की तरफ दिव्या को निकाल देती है सारे घर वाले बाहर आकर लड़ने लगते हैं पिशाचनी मुरारी के पीछे पड़ जाते हैं और उसे मारने की कोशिश करती है तभी दिव्य दृष्टि और रक्षा सामने आ जाते हैं और पिशाचनी को रोकने की कोशिश करते हैं तभी मौका पाकर मुरारी वहां से भागने की कोशिश करता है इतनी देर में वहां पर अक्षता जाता है वह मुरारी को रोक लेता है तभी पिशाचनी भी उस पर अटैक कर देती है।

पाताली पिशाचनी को रोकने की कोशिश करती है इतनी देर में पिशाचनी पाताली को धक्का दे देती है पाताली दिव्या के रूप में जैसे वहां से गिरने वाली होती है इतनी देर में दृष्टि आगे बढ़ती हो और पता लिखो बचाने की कोशिश करती है पता नहीं की वजह से ही सृष्टि के पैर कितने लगते हैं और वहां से गिरने लगती है इतनी देर में रक्षत अन्य शक्तियों का इस्तेमाल करता है और दृष्टि को बचा लेता है मुरारी उन सब को देख कर कहता है कि आखिर यहां पर क्या हो रहा है सब के पास इतनी सारी शक्तियां कैसे हैं।

मुरारी जहां से भाग रहा होता है तभी रक्षा तुझे रोक लेता है रक्षा तो उससे पूछता है कि आखिर तुम कहां जा रहे हो तभी रक्षत को वह बताता है कि ऊपर की तरफ दिव्या लटकी हुई है सारे घर वाले दिव्या को देखकर जल जाते हैं तभी दृष्टि दिव्य के दूधों को देख कर चौक जाती है मुरारी कहता है कि दिव्या दूध कैसे हैं तभी सारे घर वाले उसकी बातों का जवाब नहीं दे पाते तभी पाताली अपने असली रूप में आ जाते हैं और कहती हैं कि अपनी बहन को बचाना चाहती हो तो बचा कर दिखाओ इसके बाद उसे नीचे गिराने की कोशिश करती है तभी अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके उसे बचा लेती है तभी पाताली वहां पर जो झूमर टांगा होता है उसे अपनी शक्तियों से निकालती हो और दिव्या की तरफ ले जाती है तबीयत दृष्टि अपने दूसरे हाथ का इस्तेमाल करती है और उसे वहां से हटा देती है।

मुरारी इतनी देर में पूल के अंदर जाता है और दिव्या को पकड़ लेता है सारे घर वाले दिव्या को सही सलामत देखकर बहुत ही है ना खुश हो जाते हैं तभी सारे घर वाले मुरारी से कहते हैं कि तुम दिव्या को कमरे में लेकर चले जाओ मुरारी जब दिव्या को लेकर कमरे में जा रहा है इतनी देर में पिशाचनी सारे घर वालों को बताती है कि जिसे तुम अपना घर का सदस्य मान रहे हो असल में वह कोई आपके घर का सदस्य नहीं है बल्कि वह तो एक चोर है सारे घर वाले यह बात सुनकर चौक जाते हैं ।

रक्षत पिशाचनी से कहता है कि तुम ऐसे कैसे मेरे भाई पर इल्जाम लगा सकती हो तभी पिशाचनी कहती है कि अगर मेरी बात पर भरोसा नहीं हो रहा है तो तुम इसके बैक को चेक कर लो तब यह कहता है कि हम तेरी बात पर भरोसा क्यों करें हमें तो तुझ पर बिल्कुल भरोसा नहीं है पिशाचनी कहती है कि इसमें एक तो चोरी की है और यहां से सारे को लेकर भागने वाला था और यहां से भागने के लिए इसने एक सुरंग भी बनाई है मैं तो सिर्फ इसलिए कह रही हूं कि सुरंग का रास्ता मेरे देवरी से होकर जाता है।

सारे घर वाले यह बात सुनकर चौक जाते हैं तभी दिव्या मुरारी के पास जाती है और उससे कहती है कि अभी तुम मुझसे रात रात भर के लिए और चारों को मांगते थे कौन रात को बागवानी करता है तभी मुरारी कहता है कि मैं रात को भी बागवानी करता हूं जब मुझे नींद नहीं आती तो मैं यही सब करता हूं तुम्हें मेरी बात पर भरोसा नहीं है तो मैं तुम्हें दिखा देता हूं कि मैंने पौधे भी लगाए हैं मैं अपने यहां पर भी था तो ऐसे ही करता था जब मुझे नींद नहीं आती थी तभी दृष्टि कहती है कि हम इस मैटर को यहीं साफ कर देते हैं शेखर तुम अपना वेब चेक करा दो तभी शेखर यह बात सुनकर चौक जाता है रक्षा तुझसे कहता है की दृष्टि तुम मेरे भाई पर इल्जाम लगा रही हो तभी दृष्टि कहती है कि मैं इल्जाम नहीं लगा रही हूं।

रक्षत कहता है कि तुम मेरे भाई पर ही तो इल्जाम लगा रही हूं चेक करने का मतलब क्या होता है तभी दृष्टि कहती है कि मैं पिशाचनी को यह साबित करना चाहती हूं कि वह गलत है कोई और नहीं दिव्य दृष्टि मुरारी से कहती है कि तुम अपना बैग चेक करा दो तभी रक्षित कहता है कि शेखर तुम अपना बैग चेक करा दूं फिर मना कर देता है कि मैं बात नहीं करूंगा इसमें गहने नहीं है रक्षत के ज़िद करने की वजह मुरारी अपना बैग चेक करा देता है।

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पिशाचनी आगे बढ़ती है और उस बैग को ले लेती हो और उसे बैगों को खाना नहीं लगती है सारे घर वाले उसे बैग में रुई को देख कर कहते हैं कि कहां है इसमें गहने तभी मुरारी कहता है कि गहने चुराने का प्लान मेरा नहीं था बल्कि इसी का था यह चाह रही थी कि मुझे गलत साबित कर दे और जिस तारी गानों को लेकिन जहां से चली जाए सारे घर वाले पिशाचनी से कहते हैं कि जब मुरारी का बैग चेक हुआ है तो तुम्हारा भी जरूर होना चाहिए तभी पिशाचनी कहती है कि मेरे पास तो बेगी नहीं है कि मैं जूते ले चुराऊंगी।

मुरारी पिशाचनी कहता है कि तुम्हारे पास नहीं है लेकिन तुम्हारे पास तुम्हारे कपड़े तो है इंसान जरूरी नहीं है कि सामान को बैग में ही छुपाए तभी पिशाचनी कहती है कि तुम जानते नहीं हो कि मैं कौन हूं सारे घरवालों की जिद करने की वजह से पिशाचनी अपने बेड को जैसे ही उतारती है तभी वहां से गहने निकलने लगते हैं पिशाचनी यह सब देख कर चौक जाती है और वहां से सारे घरवालों से कहती हैं कि मैंने कोई गैर नहीं नहीं चुराए तुम सब जानते हो कि मैं पिशाचनी हूं मुझे कह नहीं चलाने की कोई जरूरत नहीं है।

मुरारी जगह अपने कमरे में होता है तभी वहां पर अक्षता जाता है और मुरारी से माफी मांगने लगता है कि मैंने भी तुम पर यकीन नहीं किया और मैंने तुम्हें बैक चेक कराने के लिए बोला था भी मुरारी कहता है कि आप है मुझे नाराज होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपने मुझ पर कोई शक नहीं किया आप तो बस उस इलाका मुंह चुप कराना चाहते थे माफी तो सिर्फ उसे मांगने चाहिए जैसे ना मुझ पर बिल्कुल यकीन नहीं किया और पता नहीं वह आखिर मेरे से क्या चाहती हैं मुझसे इतनी नफरत क्यों करती है मैं जब भी देखता हूं वह मेरे खिलाफ ही होती है तभी रक्षत कहता है कि ऐसी कोई बात नहीं है तभी वहां पर रक्षत की एस चाची आ जाती है और कहती है कि हाथ दिव्या को मेरे बेटे से माफी मांगनी चाहिए उसने जिस तरह से मेरे बेटे पर यकीन नहीं किया रक्षित कहता है कि दिव्या जरूर माफी मांगेगी।

दिव्य दृष्टि से कहती है कि दी मुझे मुरारी से माफी मांग लेनी चाहिए क्योंकि गलती मेरी थी मैंने उस पर यकीन नहीं किया दृष्टि कहती है कि तेरी कोई गलती नहीं थी कि तेरी जगह अगर कोई और भी होता तो इस पर यकीन नहीं करता वह अभी अभी हमारे घर पर आया है तो हम उस पर ऐसे कैसे भरोसा कर सकते हैं तुझे माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है तभी वहां पर रक्षत मुरारी को लेकर आ जाता है और दृष्टि से कहता है कि क्यों दिव्या माफी क्यों नहीं मांगेगी तभी दृष्टि कहती है कि नहीं वह माफी नहीं मांगी थी तभी दोनों के बीच बहस शुरू हो जाती है दिव्या और मुरारी उन दोनों को रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन वह दोनों झगड़ा ही करते रहते हैं।

मुरारी उन दोनों को कहता है कि आप दोनों पहले तो झगड़ा मत कीजिए और मुझे बताइए कि आखिर पिशाचनी और पाताली का क्या चक्कर है और इन सब पर इतनी सारी शक्तियां क्यों है और आप सब पर भी इतनी सारी शक्तियां कैसे हैं आप सब ने यह सब किया तभी दिव्य दृष्टि और रक्षत मुरारी को समझाने के लिए वहां पर रोमी को भी बुला लेते हैं तभी रोमी वहां पर आकर कहता है कि मुझे यहां पर क्यों बनाया है तभी वह सब बताते हैं कि मुरारी यह हमारे बारे में जानना चाहता है इसलिए मैंने भी तुम्हें बुला लिया है ताकि अच्छी तरीके से हम इसे बता सके ।

दिव्या और रूमी जब एक दूसरे से बातें कर रहे होते हैं तभी मुरारी कहता है कि अब इन दोनों का क्या चक्कर है यह दोनों भी इस तरह से ही लड़ रहे हैं क्या यह दोनों भी इनके बीच में पति-पत्नी वाला कोई कनेक्शन है तभी दिव्य मना कर देती है इसके बाद दिव्य मुरारी को बेड पर बैठ आती है और उसे बताती है कि मैं तुम्हें सारी चीजें प्लेन कर देती हूं तभी वहां पर बोर्ड को लेकर आती है और उस पर सब कुछ लिख देती है कि कौन किसकी पत्नी है और कौन किसका क्या लगता है दिव्य दृष्टि और रोमी के बारे में जब बता रही होती है तभी वह कहता है कि रूम दृष्टि का भाई है तो तुम्हारा भी भाई हुआ मतलब तुम दोनों के बीच में भाई बहन का रिश्ता है।

दिव्या यह बात सुनकर उसे कहते हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं है रोमी सिर्फ दृष्टि दी का ही भाई है मेरा भाई नहीं है तभी मुरारी यह बात सुनकर चौक जाता है और उन सब से कहता है कि मेरा तो दिमाग खराब हो रहा है मैं तो यहां से भाग रहा हूं मेरा मतलब है मैं तुम्हारे से जा रहा हूं मुरारी वहां से निकलता है और अपनी सुरंग की तरफ चला जाता है और तिरंगे के पास जाकर खड़ा होकर कहता है कि अब मैं इस सुरंग को भर देता हूं तभी वह प्यार को निकालता है और उसे सुरंग को भरने के लिए कह देता है ।

पिशाचनी इतनी देर वहां पर पहुंच जाती है और मुरारी उसे देख कर चौक जाता है पिशाचनी उसे पूछती है कि आखिर तुम यहां पर किस मकसद से आए हो मुरारी इस बात का कोई जवाब नहीं देता पिशाचनी को इतनी देर में कुछ आवाज सुनाई देती है तभी वह कहती है कीजिए आवाज किस चीज की आ रही है तभी मुरारी अपने हाथों में हथियार को ले लेता है इतनी देर में ही सिला उस हथियार को उसके हाथ लगने से पहले अपने हाथों में ले लेती हो और उस पर 401 लिखा होता है पिशाचनी यह सब देख कर चौक जाती है मुरारी हथियार को लेकर वहां से चला जाता है।

पिशाचनी जैसा ही अपनी देवरी में जाती है तभी उस नंबर के बारे में सोच रही होती है इतनी देर में पाताली उस भागने वाले कैदी के बारे में जो बात कर रही होती है तभी पता नहीं क्यों भूल से उसका नंबर निकल जाता है कि 401 बहुत ही ज्यादा क्यूट हो सकता है इसके बाद पाताली की बातों को सुनकर पिशाचनी समझ आती है कि जो नर्क से भागा है कैदी है मुरारी ही हो सकता है मुझे यह बात पता लगानी होगी मुरारी के बारे में पता लगाने के लिए पिशाचनी बहुत सारी कोशिश करती हैं लेकिन को कोशिशों में फेल हो जाती है।

पिशाचनी मुरारी के कमरे में जाती है मुरारी उसे देख कर चौक जाता है और उससे पूछता है कि तुम यहां पर क्या कर रही हो पिशाचनी उससे कहती है कि क्यों मै नहीं आ सकती मुरारी कहता है कि मुझे नींद आ रही है मैं सोने के लिए जा रहा हूं तुम यहां से जाओ तभी पिशाचनी कहती है कि कोई बात नहीं तुम सो जाओ मैं तुम्हें लोरी गा कर सुना देती हूं तभी वहां से मुरारी कमरे में से चला जाता है और सीधे दृष्टि और रक्षत के कमरे में चला जाता है तभी वह उन सब से पूछता है कि आप यह सब जादूगर कैसे लेते हैं तब एक-एक करके सब जादू दिखाने लगते हैं इतनी देर वहां पर पिशाचनी पाताली के संग वहां पर आ जाती है और अपने हाथों में खुजली वाला पाउडर लेकर मुरारी पर फेंक देती है मुरारी को शरीर पर खुजली होने लगती है इतनी देर में मुरारी से कहा जाता है कि तुम जाकर साबर ले लो ताकि तुम अच्छी तरीके से ठीक हो जाओगे मुरारी वहां से साबर लेने के लिए चला जाता है।

रक्षत दिव्या जी कहता है कि यह दवाई ले जाकर शेखर को दे दो देखा वहां से उसको लेकर चली जाती है तभी दृष्टि उस बात पर रक्षत पर बरसने लगती है कि तुमने मेरी बहन को ही क्यों भेजा मुरारी जब अपने कपड़ों को चेंज कर रहा होता है वहां पर पिशाचनी पाताली आ जाते हैं और मुरारी के पीठ पर 401 लिखा हुआ देख रहे होते हैं लेकिन वह देख नहीं पाते इतनी देर में वहां पर दिव्या जाती है तभी वह अपने कंधे पर तोलिया रख लेता है जिसकी वजह से पाताली और पिशाचनी कुछ भी देख नहीं पाती दिव्या उसे दवाई को देकर वहां से चली जाती है।

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