Divya Drishti – 27 October 2019 – Written Update In Hindi

दिव्य दृष्टि की आज का एपिसोड में आप सब देखेंगे कि कैसे सारे घर वाले मिलकर दिव्य दृष्टि का बर्थडे बना रहे होते हैं और उस पार्टी में शिवानी और पाताली शामिल होने के लिए कहते हैं और एक कंपटीशन भी रख पाते हैं जिसमें शिवानी ने एक चाल चली होती है दिव्य दृष्टि के हाथों को जलाने की लेकिन उस पार्टी के दौरान शिवानी का प्लान फेल हो जाता है और दिव्य दृष्टि के हाथों से वह दोनों स्टिक नीचे गिर जाती हैं शिवानी और पाताली जैसे दिव्य दृष्टि को यह बात बताने के लिए आती है इतने में उन दोनों के हाथों में भी स्टिक नहीं होती .

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दिव्य दृष्टि शिवानी से कहती है कि तुम्हारे हाथों में भी स्टिक नहीं है तो इसका फैसला कैसे होगा कि वह दोनों में से कौन जीता और कौन हारा इतने में शिवानी और पाताल गुस्सा होकर वहां से चली जाती हैं दिव्य दृष्टि साथ मिलकर जब केक काटते हैं इतने में दिव्या को फिर से सपना दिखाई देने लगता है कि वहां पर काफी सारा हनेरा हो चुका है और वहां पर वही आदमी दिव्या के पास आता है और दिव्या को गले से लगा लेता है दिव्या यह सब देख कर चौक जाती है.

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इतने में पार्टी के दौरान रक्षत के पास फोन आता है और रक्षत को बताया जाता है कि शेखर मिल चुका है यह बात सुनकर रक्षत बहुत ही अदा खुश हो जाता है और सारे घरवालों को यह बात बता देता है दिव्या की हालत सही नहीं होती है तब दृष्टि उसे अपने कमरे में लेकर जाती है रक्षत जैसे ही एक को यह सारी बातें बताता है तबीयत बहुत ज्यादा खुश हो जाती है और कहती है कि मेरा बच्चा मिल चुका है तभी रक्षत उनसे कहता है कि पहले हमें वहां जाकर देखना होगा कि वही हमारा असली सीकर है या नहीं.

दिव्या की तबीयत खराब होने के कारण रक्षत की चाची कहती है कि दिव्या की तबीयत खराब है दिव्या हमारे साथ कैसे जाएगी तभी रक्षत मना कर देता है कि नहीं दिव्यदृष्टि जा नहीं रहेंगे वह हमारे साथ ही जाएंगे तभी रक्षत की मां रक्षत की चाची को वहीं पर रहने के लिए बोल देती है और उनसे कहती है कि तुम्हें यहां पर रहकर शिवानी और पाताली पर नजर रखनी होगी इतना कहकर रक्षत दृष्टि के कमरे में जाता है और उससे कहता है कि हमें शेखर के बारे में पता लग चुका है इसलिए हमें वहां पर चलना होगा लेकिन तुम दिव्या की हालत को देखकर यहां पर रुक सकती हो .

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दृष्टि कहती है कि मैं और दिव्या आप ही के साथ चलेंगे हो सकता है दिव्या बाहर जाने से उसका मूड फ्रेश हो जाए रक्षत ऐश और दिव्य दृष्टि और अपनी मां को लेकर गाड़ी में वहां से निकल जाता है इतने में सब गांव में पहुंच जाते हैं और वहां पर जाकर शेखर का पता लगाने लगते हैं इतने में एक बच्चा गांव का एक पेड़ पर चढ़ जाता है और वहीं पर लटक जाता है इतने वहां पर एक आदमी आता है और उस बच्चे को बचा लेता है तभी दिव्या को फिर से वही सपना दिखाई देने लगता है और उसे सपने में दिव्या को इस बार उसका चेहरा दिखाई दे जाता है दिव्या यह सब देख कर चौक जाती है.

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तभी दृष्टि वहां से भागते हुए आती है और कहती है कि उसे बचाओ दिव्या यह बात सुनकर चौक जाती है और दृष्टि के पीछे चलने लगती है तभी रक्षत और दृष्टि उस बच्चे के पास पहुंचते हैं और उस बच्चे से कहते हैं कि तुम अंकल का हाथ छोड़ दो हम मैं नीचे से तुम्हें पकड़ लूंगा इतने में वह बच्चा हाथ को छोड़ देता है और रक्षत उसे पकड़ लेता है इतने में रक्षत आदमी के पास जाता है और उसे अपना हाथ देकर उसे नीचे उतार देता है.

रक्षत उस आदमी से उस पते के बारे में पूछता है तभी वह आदमी बताता है कि हां यह पता तो मैं जानता हूं आइए मैं आप सब को लेकर चलता हूं तभी वह आदमी एक गांव में उन सब को लेकर जाता है और वहां पर एक घर को दिखा देता है और वहां से कहता है कि अब मैं चलता हूं और वहां से चला जाता है इतने में रक्षा पर सारे घर वाले जैसे ही उस घर के बाहर खड़े रहते हैं और देखते हैं कि जो दरवाजे पर ताला लगा हुआ है तभी वहां पर जो कुछ बच्चों से पूछा जाता है तो वह बच्चे बताते हैं कि यहां पर जो भैया रहते हैं वहां पर नहीं है बल्कि वह तो वहां पर है आइए मैं आपको लेकर चलता हूं.

रक्षत सारे घर वालों के साथ वहां पर पहुंच जाता है और वह बच्चा वही आदमी को दिखा देता है रक्षा को सारे घर वाले यह सब देख कर चौक जाते हैं तभी रक्षत उस आदमी के पास जाता है और उससे कहता है कि जिस घर का पता तुमने हमें बताया था तुम भी उसी घर में रहते हो यह बात तुमने हमें क्यों नहीं बताई तभी वह आदमी कहता है कि आपने सिर्फ घर के बारे में पूछा था उन घर के लोगों के बारे में नहीं पूछा था.

रक्षत उसे बताता है कि इसका मतलब तुम ही हो जिसे हम यहां पर ढूंढने के लिए आए हैं तब वह आदमी चौक जाता है रक्षत उससे कहता है कि तुम बचपन में यहां पर आए थे तभी वह कहता है कि हां मैं यहां पर बचपन में आया था तभी रक्षत बताता है कि हां बचपन में तुम खो गए थे तभी वह आदमी कहता है कि मेरी मां ने जिन्होंने मुझे पाल पोस कर बड़ा किया है उन्होंने पेपर में ऐड भी दिया था लेकिन कोई मुझे लेने के लिए नहीं आया.

ऐश कहती है कि हम यहां पर इसलिए नहीं आ पाए क्योंकि हमारे घर में कोई नकली से लेकर रह रहा था और उसके बारे में हमें कुछ दिनों पहले ही पता लगा और हमने फिर तुम्हें ढूंढना शुरू कर दिया और तुम हमें मिल गए तभी सारे घर वाले शेखर के मां के पास जाते हैं जिन्होंने उसे पाल पोस कर बड़ा किया होता है और उससे आज्ञा लेते हैं शेखर को ले जाने की तभी वह रो रही होती हर कहती है कि मैंने ऐसे बड़े लाड प्यार से पाला है आप सब इसका बहुत ही अदा ख्याल रखिए मुझे यह बात पता थी कि एक न एक दिन यह मेरे से दूर हो जाएगा.

शिवानी जैसे ही अपनी देवरी में होती है तभी वहां पर एक कौवा नरक का अखबार लेकर आता है और शिवानी के सामने आकर खड़ा हो जाता है शिवानी कुछ भी समझ नहीं पाती और कहती है कि जरूर इस अखबार में ऐसा कुछ है जो मुझे पढ़ना चाहिए शिवानी उस अखबार को लेने की कोशिश करती है लेकिन कब इर्द-गिर्द घूमने लगता है तभी वहां पर पाताली आ जाती है और उसका हुए को देखकर हंसने लगती है और कहती है कि यह तो नरक का खबर है यह जहां पर क्या कर रहा है तभी वह नरक का अखबार एक-एक करके खबरों को बताने लगता है.

शिवानी की नजर एक पेज पर पड़ जाती है तभी जवानी उस खबर को जब पड़ती है उस खबर में लिखा होता है कि नरक में से एक कैदी फरार हो चुका है तभी शिवानी यह बात सुनकर चौक जाती है इतने में सारे घर वाले उस आदमी को लेकर घर पर पहुंचते हैं लेकिन दिव्य कुछ भी समझ नहीं पाती तभी सारे घर वाले उसको लेकर अंदर आते हैं सभी उसका वेलकम करते हैं और उससे सारे घरवालों से मिल जाते हैं पाताली जैसे ही उस आदमी को देखती है और उसे देखकर कहती है कि यह तू ही बड़ा ही क्यूट है.

ऐश शेखर को सारा घर दिखा रही होती है तभी ऐश इतने में शेखर को वहां पर अकेला छोड़ कर चली जाती है तभी वहां पर पाताली आती है और उससे टकरा जाती है सीकर पाताली को देखकर उससे पूछता है कि तुम कौन हो पाताली उसे देखकर खुश हो जाती है लेकिन उसे बिना बताए वहां से चली जाती है इतने में वहां पर ऐश आ जाती है और सीकर को वहां से ले जाती है सारे घर वाले शेखर को फ्रेश होने के लिए बोल देते हैं.

शेखर जैसे ही खाने के लिए नीचे आता है तभी बुकलेट को लेकर नीचे बैठ जाता है तभी सारे घर वाले उसे टेबल पर बैठने के लिए बोलते हैं तभी वह शेखर टेबल पर बैठ जाता है तभी सारे घर वाले कहते हैं कि तुम्हें कुर्सी पर बैठना है शेखर वहां से उतरता है और कुर्सी पर बैठ जाता है और हाथ से खाना खाने लगता है तभी सारे घर वाले यह सब देखकर हाथ से खाना खाने लगते हैं ऐश दिव्या को खाने का बोल उठाने के लिए बोलती है और शेखर को जब दिव्या दे रही होती है तभी शेखर का हाथ दिव्या के हाथों में लग जाता है तभी दिव्या कहती है कि मेरे पेट में दर्द हो रहा है मैं यहां से जा रही हूं.

दृष्टि दिव्य के पीछे चली जाती है और उससे पूछती है कि आखिर क्या बात है जो तुम मुझसे छुपा रही हो तभी दिव्यदृष्टि को सारी बातें बता देती है कि उसे सपने में शेर दिखाई दिया था पता नहीं क्यों दृष्टि कहती है कि तुम घबराओ मत मैं तुम्हारी हमेशा साथ हूं और मैं तुम्हारी हमेशा साथ रहूंगी शेखर यह बात सुन लेता है और कहता है कि इस घर की सबसे कमजोर कड़ी मुझे मिल चुकी है मुझे सी का इस्तेमाल करना है शेखर अपने कमरे में जाता है और वहां से कुछ सामान को निकाल रहा होता है तभी रक्षत उसके कमरे में आ जाता है और उसे कुछ कपड़े देता है .

शेखर रक्षत से कहता है कि मुझे बहुत तेज नींद आ रही है मैं सो रहा हूं तभी रक्षत वहां से कपड़ों पर चला जाता है शेखर अपने कबर्ड से घर का नक्शा निकालता है और कहता है कि मैं इस घर में सिर्फ चोरी करने के लिए आया था इनका बेटा खो गया था और मैं नकली बेटा बनकर आया हूं घर से काफी चीजों को चुराकर मैं यहां से चला जाऊंगा और उधर सारे घर वाले जब शेखर के बारे में बात कर रहे होते हैं तभी वहां पर पाताली आ जाती है और यह बात सुन लेती है.

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