Divya Drishti – 26 October 2019 – Written Update in Hindi – Divya Life In Danger

Divya Drishti 26 October 2019 Written Update

दिव्य दृष्टि के आज के एपिसोड में आप सब देखेंगे कि कैसे सारे घर वाले मिलकर ओजस्विनी को डांट रहे होते हैं और उस पर इल्जाम लगाते हैं कि तुम शीतल के साथ मिलकर सारे घर वालों को धोखा दे रही हो तभी ओजस्विनी बताती है कि मैंने कोई धोखा नहीं दिया है मैं नहीं जानती कि आखिर मैं उसके लिए काम क्यों कर रही हूं मुझे तो लगता है उसने मेरे ऊपर कोई जादू किया है तभी सारे घर वाले नहीं मानते और उसे बाहर जाने के लिए बोल देते हैं इतनी देर में वहां पर दिव्य दृष्टि और रक्षत और उसकी मां कहां पर आ जाती है और रक्षक पूछता है कि आखिर हुआ क्या तभी सारे घर वाले ओजस्विनी के बारे में बताते हैं कि इसी की वजह से शीतल और पाताली को पता चला था

कि हम हैं कहां तभी रक्षत की नजर ओजस्विनी के कंगन पर पड़ जाती है और कहता है कि मुझे नहीं लगता कि ओजस्विनी चाची ऐसा कर सकती हैं शीतल के बस में है जी इसी की वजह से ही वह सब कर रही है मैं यह जादू अच्छी तरीके से जानता हूं इसके बाद रामू स्कड़े को निकलता है और बाहर फेंक देता है और कहता है कि अब सब कुछ ठीक है अब किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा और जी जादू भी खत्म हो चुका है इतनी देर में दिव्या बस कुचला नहीं लगती है इतनी देर में पता नहीं बस के ऊपर आ जाती है और कहती है कि तुम्हें क्या लगता है मुझे से

इतनी जल्दी तुम्हें छुटकारा मिल जाएगा ऐसा कभी भी नहीं होगा तुम्हें क्या लगता है यह जादू बार फेंकने से मुझे पता नहीं चल पाएगा कि तुम वह कहां मैंने तो दिव्यदृष्टि को इस बस में ही चढ़ते हुए देख लिया था और रात होने में अभी काफी टाइम है इसी बीच में दिव्य दृष्टि को खत्म कर दूंगी और मेरे मकसद यहां आने का पूरा हो जाएगा इसके बाद दृष्टि सारे घरवालों से कहती है कि अब आप सब को डरने की कोई जरूरत नहीं है और यहां पर कोई भी नहीं आएगा क्योंकि हम उन दोनों से काफी दूर आ चुके हैं वह हमारे पीछे नहीं है इतनी देर में सारे घर वाले संतुष्ट होकर अपनी अपनी जगह जाकर बैठ जाते हैं और आरक्षत से लेट रहे होते हैं इतनी देर में एक-एक करके सारे घर वालों को पाटा लीडर आने लगती है

कभी अपने पैर दिखाकर कभी अपने बालों को दिखाकर तो कभी अपना हाथ दिखा कर जिसकी वजह से एक-एक करके सारे घर वाले चिल्लाने लगते हैं तभी दृष्टि उन्हें समझाती है कि आपके दिल का बहन है ऐसा कुछ भी नहीं है यहां पर पता नहीं है अभी पाताली का चेहरा घरवालों के सामने आ जाता है इसके बाद ओजस गैरों सो जाती है तभी दृष्टि कहती है कि इसका मतलब पाताली इसी बस की छत पर है अभी सारे घर वाले डरने लगते हैं और चिल्लाने लगते हैं इसके बाद पता नहीं कहती है कि इनकी डर की वजह से ही तो मेरी ताकत बढ़ती है

सभी दृष्टि सारे घरवालों से कहती है कि आप सब इतना मत डरिए आप सब के डर की वजह से ही पाताले की हिम्मत है बढ़ती है और उसकी शक्तियां भी बढ़ रही है इसके बाद सारे घर वाले कहते हैं कि हम कैसे ना डरे वह है ही इतनी डरावनी इसके बाद दृष्टि खिड़कियों पर अपना जादू चला देती है जिसकी वजह से सारे घरवालों से कहती है कि मैंने सारी खिड़कियों पर अपना जादू कर दिया है इसकी वजह से पाताली अंदर नहीं घुस पाएगी तभी दिव्या के सामने पाताली आ जाती है तभी दृष्टि कहती है कि अगर ऐसी खेलने का इतना ही शौक है तो चलो खेल खेलते हैं इसके बाद दिव्या को इधर-उधर करके लगती है तभी पाताली को गुस्सा आ जाता है और गुजरने वाली होती है तभी वह गुस्से में बस की छत को तोड़ देती है तब व्यक्ति है और सारे घर वालों को एक-एक करके बाहर की तरफ निकाल देती है

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और उन सब से कहती है कि सब अपनी आंखें बंद कर लेना अपनी आंखें बंद कर लेते हैं एक एक करके सारे घर वाले उसे बस से बाहर निकल जाते हैं दिव्य दृष्टि और रक्षत जब बस के अंदर होते हैं तभी पाताली बस पर जादू कर देती है और वह तीनों से नहीं निकल पाते तभी पता नहीं सारे घर वालों के सामने जाती है और उन्हें मारने की कोशिश करती है तभी सारे घर वाले हिम्मत झूठ आते हैं और पाताले के सामने आंखों को खोल कर खड़े हो जाते हैं तभी पाताली उन सब की हिम्मत को देख कर चल जाती है और उन पर अपना जादू नहीं कर पाती तभी दिव्य दृष्टि और रक्षत अपनी शक्तियों से उस जादू को तोड़ते हैं और बस के बाहर आ जाते हैं तभी दिव्य दृष्टि अपनी जादू का इस्तेमाल पाताली पर करती है तभी पाताली उनसे कहती है कि मैं तुमको नहीं छोडूंगी इतनी देर में रक्षत दिव्यदृष्टि मिलकर अटाली पर हमला करते हैं तभी पाताली नीचे गिर जाती है तभी दृष्टि पाताली से कहती है कि एक बार पीछे पलट कर तो देखो तभी पाताली पीछे पलटकर देखती है तो सुबह हो जाती है तभी पता नहीं क्यों जाती है

इसके बाद दोनों दृष्टि अपने दादू का इस्तेमाल उससे करती है इतनी देर में पाताली रात हो गायब हो जाती है इतनी देर में ही सारे घर वाले एक दूसरे से गले मिल रहे होते हैं तभी रक्षत दृष्टि को अकेले में लेकर जाता है और उसे जन्मदिन की बधाई देता है और उसे गले से लगा लेता है तभी दिव्या की नजर दृष्टि और रक्षत पर पड़ जाती है इसके बाद दिव्य इमोशनल हो जाती है इसके बाद दिव्या के अचानक आसपास से सारे घर वाले और बस सब गायब हो जाते हैं तभी इस दिव्य कहती है कि आखिर यह सारे घर वाले और बस अचानक से गायब कहां हो गई तभी दिव्या वहां पर देखती है कि अंधेरा दोबारा हो चुका है और वहां पर काफी सारा धुआं उठने लगा है और वहां पर एक आदमी आता है और वह दिव्य आवाज लगाता है इसके बाद दिव्य डर जाती है और चिल्लाते हुए उड़ती है तभी वह देखती है कि वह घर पर है

और उसका डॉक्टर इलाज कर रहा है तभी डॉक्टर बताता है कि दिव्या का ब्लड प्रेशर लो हो गया था इसकी वजह से ही दिव्य गैरों सो गई थी लेकिन अब वह पूरी तरह से ठीक है इसके बाद सारे घर वाले एक-एक करके वहां से चले जाते हैं तबीयत दृष्टि दिव्य से पूछती है कि आखिर बात क्या हुई है तुम मुझे बताओ क्या तुमने कुछ देखा है अभी दिव्य दृष्टि को बात नहीं बता पाती और कहती है कि मैं नहीं जानती कि आखिर मैंने देखा क्या था कुछ समझ में नहीं आया इसके बाद दृष्टि जब अपने कमरे में जाती है तभी रक्षत दृष्टि से पूछता है दिव्या कैसी है तभी दृष्टि बताती है कि अभी दिव्या ठीक है लेकिन मैं जानती हूं कि दिव्या परेशान है शेखर की वजह से तब रक्षत कहता है कि मैंने चेक कर के बारे में पता लगाना शुरू कर दिया है मैंने कुछ डिटेक्टिव को हायर किया है और उन्हें पता लगाने के लिए बोला है तभी रक्षत दृष्टि से पूछता है कि तुम मुझे बताओ कि आखिर तुम्हें क्या पसंद है तुम अपने जन्मदिन वाले दिन क्या सोचती हो तभी दृष्टि बताती है कि मैंने और दिव्या हमेशा यह सोचा था कि हमारे जन्मदिन पर बहुत बड़ी पार्टी होगी और

वहां पर बहुत बड़ा केक भी होगा इतना सुनकर रक्षत वहां से चला जाता है इसके बाद दृष्टि में होती है तभी वहां पर रक्षत की मां जाती है और उन दोनों से कहती है कि तुम दोनों बाहर नहीं आ सकती तभी वह दरवाजे लगाकर वहां से चली जाती है इतनी देर में ही दिव्या की आंख लग जाती है और उसे फिर से कमरे में दिखाई देने लगता है और फिर से वही आदमी दिखाई दे जाता है तभी दिव्या उसके पास जाती है और उसका चेहरा देखने की कोशिश करती है लेकिन इतनी देर में ही दिव्य नींद से जाग जाती है तभी दृष्टि पूछती है कि आखिर क्या तुमने कुछ देखा है तभी दिव्य दृष्टि को कुछ बताने वाली होती है तभी नीचे से आवाज आ जाती है कि 5 मिनट के अंदर तुम दोनों को यहां पर आना है

इसके बाद काल देवता जैसे ही नरक लोक में वापस आते हैं और देखते हैं कि सारे लोग वहां पर सब गैरों से अभी वह देखता है कि जेल में से वह आदमी तो गायब है इतनी देर में शीतल जब देवरी में होती है तभी वहां पर पाताली आ जाती है बुरी हालत में तभी शीतल उससे पूछती है कि क्या तुमने अपना काम किया तभी पाताली कहती है कि नहीं मैं अपना काम नहीं कर पाई वह दोनों अभी तक जिंदा है तभी पाताली घबराने लगती है और कहती है कि अगर यह बात काल देता को पता लग गई तू काल देवता मेरी क्या हालत करेंगे इतनी देर वहां पर एक आग का सर्कल बन जाता है तभी पाताली कहती है कि लगता है

यहां पर कॉल देता आ रहे हैं तभी शीतल कहती है कि नहीं मुझे नहीं लगता कि कल देवता आ रहे हैं क्योंकि अगर वह आती है तो जरूरी नहीं कि वह आग का सर्कल बनी मुझे तो लगता है वहीं नरक से भाग गया है तभी पाताली पूछती है कि आखिर कौन है वह इसके बाद शीतल कहती है कि वह तो मैं भी पता लगाने की कोशिश कर रही हूं तभी शीतल को कुछ ख्याल आता है उस आग के सरकार को देखकर और वहां पर 2 जोड़ी डांडी की लेकर आती है और एक जोड़ी पाताली को दे देती है और कहती है कि

इस वीडियो को हम इस आग में रखेंगे और जे डांडिया बहुत ज्यादा गरम हो जाएगा और इसकी वजह से दिव्य दृष्टि से खेलेंगे तो उनके हाथ जल जाएंगे और वह दोनों अपने हाथों से जादू नहीं कर पाएंगे तभी पाताली और शीतल आग में उन दोनों की जोड़ी को डाल देती है और वह काफी ज्यादा गर्म हो जाती है तभी पाताली कहती है कि अगर इसके बारे में उन दोनों को पता लग गया तो तभी शीतल कहती है कि ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि मैं अपने जादू से इस पर ऐसा जादू कर दूंगी जिससे डांडिया चमकने लगी और उन दोनों को ऐसा लगेगा कि मैं लाइट लगी हुई है इसके बाद दिव्य दृष्टि जैसे ही पार्टी में आती है और देखती है कि पार्टी बहुत ही खूबसूरत है और वहां पर काफी खूबसूरत केक भी रखा हुआ है तभी दिव्यदृष्टि बहुत ही खुश हो जाती है इतनी देर में दिव्य दृष्टि जैसे ही उसके को काटने की आगे बढ़ती हैं

तभी रक्षत की मां उन दोनों को रोकती है और उन दोनों से कहती है कि तुम दोनों बहुत ही ज्यादा लकी हो क्योंकि नवरात्रि चल रहे हैं और इन्हीं दिनों में तुम दोनों का जन्म हुआ था इसलिए हमने सोचा है कि यहां पर एक डांस भी होगा इसलिए हमने कुछ दिए हैं तभी वहां पर देवियां दृष्टि बहुत ज्यादा खुश हो जाते हैं तभी वहां पर शीतल और पाताली पहुंच जाते हैं और कहते हैं कि हम भी इस पार्टी में शामिल होंगे तभी दृष्टि और दिव्या उन दोनों को वहां से जाने के लिए बोल देती है तभी शीतल कहती है कि

अगर तुम दोनों ने हमें इस पार्टी में शामिल नहीं किया तो या तो हम इस पार्टी को खराब कर देंगे या तो फिर हमें इस पार्टी में शामिल करो इतनी देर में शीतल अपने हाथों से डांडिए को और डांडिया के साथ रख देती है तभी दृष्टि कहती है कि यहां पर एक कंपटीशन होगा और उस कंपटीशन में जो भी जीता है वह इसी घर में रहेगा और जो हारेगा वह इस घर से निकल जाएगा क्या तुम्हें यह शर्त मंजूर है तभी शीतल इस शर्त को मान लेती है और डांस प्रोग्राम शुरू हो जाता है तभी ओजस्विनी सबके हाथों में उस डांडिया को दे देती है और सब डांस करना शुरू कर देते हैं थोड़ी देर के बाद दिव्य दृष्टि के हाथों में जो डांडी होते हैं वह गर्म होना शुरू हो जाते हैं तभी शीतल कहती है कि गरम हो जाएंगे और इन दोनों पूरी तरह से जल जाएंगे इतनी देर में ही वह डांडिया लाल होने लगते हैं और दिव्य दृष्टि के हाथ जलना शुरू हो जाते हैं और उन दोनों के हाथों से नीचे गिर जाते हैं और अचानक से उन दोनों पर पानी का गिलास गिर जाता है तभी दृष्टि की नजर उस पर पड़ जाती है

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