Divya Drishti – 2 November 2019 – Written Update In Hindi

Divya Drishti 2 November 2019 Aaj के Episode में आज तक देखेंगे कि कैसे पाताली जब गार्डन में घूम रही होती है वहां पर पिशाचनी आ जाती है पिशाचनी पाताली से पूछती है कि तुम यहां पर क्या कर रही हो तबीयत पाताली पिशाचनी से कहती है कि मैं यहां पर कुछ औषधि लेने के लिए आई थी तभी भूत जब जाती है तभी पाताली बताती है कि मुझे सर्दी हो रही है इसलिए मैं यहां पर पत्तिया लेने के लिए आई हूं पाताली पेड़ में से पत्ते लेकर वहां से चली जाती है। दिव्या जब अपने कमरे में तैयार हो रही होती है तभी वहां पर शेखर आ जाता है दिव्या शेखर से कहती है कि हमेशा दरवाजा नौकर के अंदर आना चाहिए था शेखर इस बात के लिए माफी मांगता है और दिव्या से कहता है कि मैं यहां से चला जाता हूं तभी दुबे कहती है कि नहीं तुम रुको वैसे भी मुझे कुछ काम है मुझे झांसी जाना है दिव्या इतना कहकर वहां से चली जाती है शेखर कहता है कि मुझे यहां पर अपने औजार को ढूंढना है।

पिशाचनी जब गार्डन में होती है तभी उसकी नजर उसी सुरंग पर पड़ जाती है तभी वह कहती है कि आखिर से सुरंग कहां जा रही है सुरंग में अंदर चली जाती है और कहती है कि यह तो एक सुरंग है और जाकर जा खा रही है और यह किसने बनाई है यह तो जादुई सुरंग है तभी पिशाचनी आगे बढ़ने लगती है और देखती है कि आगे तो कोई रास्ता है ही नहीं इतनी देर में शेखर देवरी में पहुंच जाता है और अपने हथियार चल सुरंग को खोजने रखता है थोड़ी देर के बाद ही शेखर को कोई आवाज लगा देता है तभी शेखर अपने औजार को वहां से निकाल लेता है पिशाचनी यह कहती है कि आखिर जैसे आवाज किस चीज की आ रही है तभी वह देखने लगती है और अपनी जादुई शक्तियों का इस्तेमाल करके मुझे पता लगाने की कोशिश करती है कि आखिर दूसरी तरफ है कौन तभी सीना आखिरकार पता लगाई लेती है कि दूसरी तरफ कोई और नहीं बल्कि शेखर है और वह देवरी में स्वर्ग का रास्ता बना रहा है ।

पिशाचनी कहती है कि आखिर यह सुरंग का करनी क्या वाला है थोड़ी देर के बाद पाताली शेखर के कमरे में जाती है और वहां से शेखर के बाल ले आती है और अपने कमरे में आ जाते हो और वहां पर उन पतियों की मदद से एक लिक्विड बनाने लगती है उस लिक्विड की मदद से वहां पर एक पतियों की रानी वहां पर आ जाती है और पता नहीं उसके नाम को सोच सोच कर आ सकती है तभी वह कहती है कि मेरी ध्यान से बात सुनो इस लिक्विड को बनाने के लिए तुम्हें यह सब करना होगा तभी पाताली को वह सारी बातें बता देती है पाताली से कहती है कि सिर्फ शरीर को यह बदल सकता है तुम्हारे अंदर की आत्मा को नहीं बदल सकता और इसका असर कुछ ही टाइम तक ही रहेगा।

पाताली उस लिक्विड को पी लेते हैं और उसका रूप दिव्या का बन जाता है शेखर रक्षत की मां के कमरे में जाता है और उनसे कहता है कि आपको मां बुला रही है बड़ी मां इसके बाद रक्षित की मां यह बात सुनकर बहुत ज्यादा खुश हो जाती है और वहां से इतना सुन कर चली जाती है शेखर अलमारी की तरफ चला जाता है और वहां पर सारे गैरों को देख कर चौक जाता है और कहता है कि मुझे तो जाकर काफी सम्मान मिल चुका है तभी शेखर उस सारे गहनों को अपने बैंक में डालना शुरू कर देता है इतनी देर में वहां पर रोमी कमरे में आ रहा होता है इतनी देर में शेखर अलमारी में छुप जाता है रूमी जैसे ही कमरे में आता है और देखता है कि यहां पर तो कोई भी नहीं है रूमी वहां से उल्टा लौट जाता है।

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शेखर देवरी की तरफ जब जा रहा होता है तभी रास्ते में रक्षत मिल जाता है और शेखर से कहता है कि तुम कहां पर जा रहे हो चलो कुछ काम है रक्षत शेखर को लेकर किचन में चला जाता है किचन में नाटक की तैयारी कर रहे होते हैं तभी वहां पर से करा जाता है और उनकी हेल्प करने लगता है से करवाने से वहां से जाने की कोशिश करता है लेकिन कोई भी उसे जाने नहीं देता पाताली दिव्या का जब रूम पर रख रही होती है तभी वहां पर पिशाचनी आ जाती है और पाताली के रूप को देखकर कहती है कि यह तुमने क्या किया और उस पर जादू करना शुरू कर देती है लेकिन पाताली पर कोई असर नहीं होता तभी पाताली पिशाचनी पर जादू कर देती है जिसकी वजह से पिशाचनी पिंजरे में बंद हो जाती है और वहां से निकलने की कोशिश करती है लेकिन वह निकल नहीं पाती थोड़ी देर के बाद कोशिश करने के बाद ही वहां से निकल जाती है और सीधे को टीवी में जाती है टीवी में यह सब से चेक कर दी है कि आखिर वह सुरंग बनाई कहां पर है तभी पिशाचनी को वह सुरंग दिखाई दे जाती है और कहती है कि आखिर जिसे करने सुरंग बनाई क्यों है मुझे इस बात का पता लगाना ही होगा।

कुछ देर के बाद से देवरी मैं आ जाता है और पिशाचनी कहती है कि यह देवरी में आ रहा है देखती हूं कि आखिर ये करता क्या है तभी पिशाचनी अपनी जादुई शक्तियों से ऊपर उड़ने लगती है शेखर वह देवरी में आता है और उस तरंग को और भी ज्यादा कूदने लगता है और कहता है कि अब मैं यहां से आसानी से निकल जाऊंगा इतनी देर में शेखर को कोई आवाज देने लगता है ऐसे कर वहां से उड़ चला जाता है पिशाचनी को आखिरकार पता लगी है जाता है किसी का घर का क्या मकसद है क्योंकि वह उसके बैग में गहने देख लेती है और कहती है कि यह तो एक नंबर का चोर है

शेखर जैसे ही बाहर आता है नाटक कि जब सारे मेहमान देखने के लिए आ जाते हैं तभी से कर अपने गहनों को लेकर दोबारा देवरी की तरफ जाने की कोशिश कर रहा होता है तभी उसे दिव्य मिल जाती है और उससे कहती है कि तुम्हें तुम्हारी मां कितनी देर से ढूंढ रही है तुम जाओ उनके पास लेकर अपनी मां के पास चला जाता है और सारे मेहमानों से मिलने लगता है मौका पाकर से कर वहां से चला जाता है थोड़ी देर के बाद वहां पर पाताली दिव्या का रूप रखकर आ जाती है और देखती है कि आखिर शेखर कहां है तभी वह शेखर के पीछे चली जाती है ।

शेखर जैसे ही कमरे में जाता है और वहां पर पाताली दिव्या का रूप रखकर आ जाती है और से कर उससे कहने लगता है कि मैं कहीं नहीं भाग रहा था बस मैं यहां पर कुछ काम से आया था तभी वह कहती है कि मैंने कब कहा कि तुम भाग रहे हो तभी से कर थोड़ी देर के बाद उससे कहता है कि मुझे प्यास लग रही है तुम मेरे लिए पानी ले आओ तभी दिव्या की हंसकर पाताली कहती है कि मैं तुम्हारे लिए पानी यहीं पर महा देती हूं पाताली बाहर तब किसी को जब ढूंढ रही होती है तभी वहां पर दिव्या शेखर को ढूंढते हुए आ जाती है तभी पता नहीं कहती है कि यह जहां पर क्या कर रही है इसके बाद पाताली वहां से कहीं छुप जाती है।

दिव्या जैसे करके कमरे की तरफ बढ़ रही होती है तभी वह देखती है कि उसके जैसे कपड़े किसी और ने भी पहने हुए क्योंकि दिव्या उसकी चुन्नी देख लेती है और उसकी तरफ बढ़ने लगती है लेकिन इतनी देर में पाताली वहां से गायब हो जाती है दिव्या कहती है कि मैंने यहां पर किसी को तो देखा था किसी ने मेरी तरह कपड़े पहने हुए हैं लेकिन आखिर क्यों तभी वहां पर दृष्टि आ जाती है और दिव्या से पूछती है कि तू जहां पर क्या करें या बाहर प्रोग्राम शुरू होने ही वाला है तभी वहां पर सिमरन दिव्या जैसे कपड़ों को लेकर आ जाती है और दृष्टि से कहती है कि लाइए भाभी इस पुतले को मुझे दे दीजिए मैंने कपड़े पहना देती हूं तभी दिव्य उनको पढ़ो को देखकर कहती है कि शायद मैंने यही कपड़े देखे होंगे।

शेखर फिर से देवरी में जाता है और वहां पर जाकर अपनी सुरंग में उसी हथियार को फेंक देता है तभी वह हथियार लाल रोशनी दिखाने लगता है और तभी शेखर कहता है कि इसका मतलब दूसरी तरफ कोई ना कोई है तभी शेखर को वहां पर दिखाई देता है कि रोमी पुलिस वालों से बात कर रहा है तभी वह कहता है कि आखिर यह पुलिस वालों से क्या बात कर रहा है रूम में पुलिस वालों से बात कर रहा होता है कि हम यहां पर पार्टी करना चाहते हैं इसलिए मुझे आपको इन्फॉर्म करना था।

जैसे ही प्रोग्राम शुरू होता है वहां पर दिव्या को बुलाया जाता है जब शेखर को वहां पर बुलाया जाता है तभी वहां से लेकर गायब होता है इतनी देर में शेखर की मां उसे लेने के लिए वहां से चली जाती है शेखर को ढूंढ लेती है इसे कर वहां से भागने की कोशिश कर रहा होता है तभी शेखर की मां कहती है कि तुम्हारा नाम आना हो चुका है चलो शेखर अपने उसे बैकोको बोरी में डाल देता है और वहां से चला जाता है और जैसे ही प्रोग्राम शुरू होता है तबीयत दिव्या और शेखर एक साथ नाटक करना शुरू कर देते हैं।

थोड़ी देर के बाद जब ब्रेक होता है तभी दिव्या जब अपने कमरे में होती है वहां पर दृष्टि आ जाती है और दिव्या से कहती है कि तुम्हारे लिए मैं पानी लेकर आती हूं तभी दिव्या की हालत को देखकर दृष्टि पूछती है कि आखिर क्या बात है तुम इतनी परेशान क्यों हो तभी दिव्या बताती है कि पता नहीं सीकर के साथ में अनकंफरटेबल होती हूं ऐसा लगता है कि वह मुझसे फ्लर्ट करने की कोशिश कर रहा है दृष्टि कहती है कि मैं उससे बात करके देखूंगी तू रुक जा मैं तेरे लिए पानी लेकर आती हूं तभी दिव्या वहां पर रुक जाती है इतनी देर में पाताली वहां पर आ जाती हो और पाताली उस गिलास में गैरों से की दवाई मिला देती है और वहां से चली जाती है दिव्या जैसे ही उस गिलास को देखती है और कहती है कि यहां पर पानी को छोड़कर जा चुकी है तभी वह दिव्या उस पानी को पी लेती है और वहीं पर गैरों सो जाती है तभी वहां पर पाताली आ जाती है और वहां से दिव्या मानकर बार चली जाती हो प्रोग्राम में शामिल हो जाती है।

प्रोग्राम जैसे ही दोबारा शुरू होता है तभी वहां पर शेखर को बुलाया जाता है शेखर महाशय देवरी में जाने की कोशिश कर रहा होता है तभी वहां पर शेखर की मां आ जाती है उसे कर को दोबारा वहां से ले कर चली जाती है जैसे कर दो बार उसे बैग को शिवपुरी में रखकर वहां से चला जाता है शेखर को जेल में बंद करने का जब नाटक चल रहा होता है तभी वहां पर पाताली दिव्या का रूप नाटक आती है और ऐसे रिजेक्ट करने लगती हैं सारे घर वाले उसके नाटक को देखकर चौक ने लगते हैं शेखर देखता है कि वहां पर अंधेरा हो चुका है मैं यहां से मौका पाकर निकल सकता हूं तभी से कर वहां से निकल जाता है और उस बैग को वहां से उठाकर बकरा होता है तभी वहां पर पिशाचनी जाती है उसे करते हुए देख लेती है और कहती है कि यह तो यहां से भागने की कोशिश कर रहा है मुझे यहां से कुछ करना ही होगा थोड़ी देर के बाद पिशाचनी वहां पर गब्बर का रूप रखकर आ जाती है और सबके सामने नाटक करना शुरू कर देती है सारे घर वाले को देख कर चौक जाते हैं तभी वहां पर का रक्षत आ जाती है और पिशाचनी से कहती है कि तू अगर गब्बर है तो मैं ठाकुर हूं सारे मेहमान उस नाटक को देख कर हंसने लगते हैं।

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