Divya Drishti – 19 October 2019 – Written Update In Hindi – Natak Aaj Ka

divya drishti natak aaj ka एपिसोड में आप सब को देखेंगे कि कैसे बिजासनी दृष्टि को बेवकूफ बनाकर रक्षत को आखिरकार अपने पास बुला ही लेती है जैसे ही प्रशासनिक हाथ रक्षत लगता है उसे वक्त पिशाचिनी रक्षत के शरीर में से पाताली का दिल निकाल कर जैसे ही पिशाचिनी पाताली के शरीर में उस दिल को लगाने वाली होती है इतनी देर में वहां पर दिव्य दृष्टि आ जाते हैं और पिशाचिनी को रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन जैसे ही पाताली का दिल उसके शरीर के पास आता है पापा जी को होश आ जाता है और वह दिव्या और दृष्टि के सामने आकर खड़ी हो जाती है और उन्हें अपनी शक्तियों की मदद से बंदी बना लेती है और उन दोनों को बाहर सबके सामने ले कर चली जाती है तभी पिशाचिनी वहां पर सारे घरवालों को बुला लेती है इतनी देर में वहां पर सारे घर वाले एक जैसी ड्रेस को पहन कर आ जाते हैं तभी पिशाचिनी सारे घर वालों को एक से कपड़े पहने हुए देखकर चौक जाती है।

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इतनी देर में सारे घर वाले पिशाचिनी दिव्य दृष्टि को छोड़ने के लिए बोलते हैं इतनी देर में दरवाजे की घंटी बस जाती है तभी रक्षत की मां आगे बढ़ती है और दरवाजा खोल देती है और वहां पर कुछ औरतें हल्ला करते हुए घर के अंदर आ जाती हैं और उनके हाथों में आग के मिट्टी के कलश होते हैं जिनमें से दुआ निकल रहा होता है और वही औरतें पिशाचिनी और पाताली के गोल गोल घूमना शुरू कर देती हैं दोहे की वजह से दोनों को बहुत ही ज्यादा प्रॉब्लम होने लगती है और वह सब को रोकने की बहुत कोशिश करती हैं इतनी देर में रक्षत की मां दिव्य दृष्टि को उन्हीं जैसे कपड़े पहनने के लिए बोल देती हैं तभी वहां से दिव्यदृष्टि कपड़े पहनने के लिए चली जाती हैं इसके बाद पिशाचिनी को जब गुस्सा आता है तो उनमें से एक औरत का गला पकड़ लेती है।

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तभी वहां पर दिव्य दृष्टि कपड़ों को बदलकर वहां पर पहुंच जाती हैं और अपनी शक्तियों से पिशाचिनी को हटा देती हैं इसके बाद सारे घर वाले और दिव्य दृष्टि उसी मिट्टी के कलर्स को लेकर पिशाचिनी के गोल गोल घूमना शुरू कर देती है इतनी देर में पाताली को गुस्सा आ जाता है और वह चलाना शुरु कर देती है तभी रोमी वहां से सारी औरतों को बाहर निकाल देता है तभी वहां पर दिव्या दृष्टि जब पाताली से लड़ रही होती है लेकिन उनकी शक्तियां कमजोर पड़ जाती हैं इसके बाद पाताली अपनी शक्तियों का इस्तेमाल दोनों पर कर देती है और उन दोनों से कहती है कि जिस काम के लिए मैं यहां पर आई थी वह काम तो मैं आज ही पूरा कर दूंगी इतनी देर में वहां पर रक्षत आ जाता है अनजान के भेष में तभी पिशाचिनी उसे देख कर चौक जाती है और कहती है कि इसका मतलब तुम्हें सब कुछ पहले से ही याद आ गया था तो तुम मुझे धोखा दे रही थी इसके बाद रक्षत अब दृष्टि पिशाचिनी और पाताली को रोकने की कोशिश करती हैं तभी वहां पर दिव्या अपने उड़ने वाले सफेद चादर को वहां पर बुला लेती है।

पिशाचिनी उसे देख कर चौक जाती है अभी दिव्या उस पर सारे घर वालों को खड़ा होने के लिए बोल देती है तभी सारे घर वाले उस पर खड़े हो जाते हैं तभी रक्षत दृष्टि को अपनी गोद में उठाकर उसी समय चादर पर चल जाता है और वहां से जाने की कोशिश करता है इतनी देर में वहां पर पाताली अपने साथियों को बुला लेती है और उन्हें रोकने की कोशिश करती है लेकिन वह रोकने में नाकामयाब हो जाते हैं और वह सब वहां से निकल जाते हैं इसके बाद सारे घर वाले जब उस सफेद चादर पर उड़ कर जा रहे होते हैं अभी सारे घर वाले सोचते हैं कि आखिर हम सब आगे करें भी तो क्या करें हमें किसी ने किसी तरह आज रात निकालनी ही होगी क्योंकि आज रात हमारी शक्तियां बहुत ही ज्यादा कमजोर है

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तभी रक्षत करता है मेरे पास एक तरीका है इसके बाद रक्षत सारे घरवालों को नीचे लेकर जाता है और सब उसे कहता है कि हम ऐसा करते हैं अलग-अलग जगह चले जाते हैं मैं लेकिन दिव्य दृष्टि के पास रहूंगा लेकिन तुम सारे घर वाले एक साथ रहना अगर पिशाचिनी तुम्हारे पास आ जाती है तो तुम सारे घर वाले उसे सारी सच्चाई बता देना कि हम हैं कहां तभी सारे घर वाले चौक जाते हैं तभी रक्षत बताता है कि अगर ऐसा करने से पहचानी हमारे पीछे आती है तो आप लोग सबसे हो जाओगे लेकिन रक्षत अपनी मां को अपने साथ ले जाता है और कहता है कि अगर मैं यहां पर रही तो वह पिशाचिनी को कभी बताएंगे ही नहीं कि हम हैं कहां इसलिए मां हमारे साथ ही जाएगी इतनी देर में वहां पर रोमी एक गाड़ी को लेकर आ जाता है और उसमें सारे घर वालों को बैठने के लिए बोल देता है तभी दिव्य दृष्टि वहां पर अपने बहन को बुलाते हैं और उस पर बैठकर निकल जाते हैं और उधर दूसरी तरफ पिशाचिनी पाताली का इंतजार कर रहे होती है अभी पाताली वहां पर आ जाती है तभी पिशाचिनी उससे कहती है कि अच्छा तो तुम तैयार होने के लिए गई थी।

अभी पता नहीं कहती है कि हमें किसी ना किसी तरह उसने सबको ढूंढना ही होगा तभी पिशाचिनी पाताली को बताती है कि उन शेरगिल परिवारों में से एक मेरा खबरी है तभी पिशाचिनी अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करती है और पाताली को बताती है कि जो मैं करने जा रही हूं जिसकी वजह से जो शेरगढ़ परिवारों में से मेरा खबरी है वह चमकने लगेगा और मुझे पता चल जाएगा कि आखिर पूरा परिवार है कहां तभी पिशाचिनी अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करती है और एक जादुई गोला बना लेती है और उसे वहां से भेज देती है और वह घोड़ा सीधे गाड़ी के पीछे लग जाता है और सीधे सिमरन की मां के अंदर चला जाता है

जिससे सिमरन की मां का कड़ा चमकने लगता है तभी पिशाचिनी को आखिरकार पता चल ही जाता है कि सारे घर वाले हैं कहां इतनी देर में रक्षत दिव्य दृष्टि जिस जगह जाते हैं उसी जगह रोमी सारे घरवालों को लेकर वहां पर पहुंच जाता है और सब से कहता है कि हम यहां पर सिर्फ इसलिए आए हैं कि मैं दी को अकेला नहीं छोड़ना चाहता तभी सारे घर वाले रोमी की बात मान जाते हैं इसके बाद रोमी सारे घरवालों के साथ एक बस में सवार हो जाता है इतनी देर में दिव्य दृष्टि और रक्षत और उसकी मां जैसे ही अंदर जाते हैं वहां पर कोई प्रोग्राम चल रहा होता है तभी वहां पर एक लड़की आती है और रक्षत और दृष्टि से कहती है कि तुम दोनों का अभी प्रोग्राम शुरू होने ही वाला है और तुम इतनी लेट हो गए तभी दृष्टि के मन में ख्याल आता है कि

वह इस प्रोग्राम में शामिल हो जाती है तभी वह उस लड़की से कहती है कि हम ट्रैफिक में फस गए थे इसलिए लेट हो गए इसके बाद वह लड़की उन दोनों को चेंजिंग रूम में भेज देती है इसके बाद रक्षत और दृष्टि एक ही रूम में कपड़े चेंज करने के लिए पहुंच जाते हैं इसके बाद वहां पर पिशाचिनी पाताली केसर वहां पर पहुंच जाती है तभी पिशाचिनी पाताली से कहती है कि सारे घर वाले सब यहीं पर है और मुझे तो ऐसा लगता है कि यह सारे परिवार वालों ने एक खेल खेला है ताकि सारे घर वालों में से आधे लोग अलग चले जाएं और आधे लोग अलग चले जाएं यह उनका प्लान है अभी पिशाचिनी अपनी शक्तियों से आखिरकार पता लगा ही लेती है कि सारे घर वाले बस में है तभी वह पाताली से कहती है कि तुम यहां पर खड़े रहकर इन सब को देखो मैं जाकर अंदर देखती हूं इसके बाद पिशाचिनी अंदर चली जाती है लेकिन इतनी देर में दिव्या की नजर उस पर पड़ जाती है दिव्या उससे छूटने की कोशिश करती है इतनी देर में वहां पर रक्षत और दृष्टि आ जाते हैं तभी दिव्या उन दोनों को बताती है कि यहां पर पिशाचिनी पहुंच चुकी है तभी उधर दूसरी तरफ पाताली पूरी बस में आग लगा देती है और कहती है कि अब मैं जानती हूं कि यह सारे घर वाले गर्मी की वजह से बाहर जरूर निकाल कर आएंगे लेकिन सारे घर वालों को पता लग जाता है कि बाहर पाताली आ चुकी है इतनी देर में सारे घर वालों को गर्मी लगना शुरू हो जाती है और सब बाहर की तरफ निकलने की कोशिश करते हैं ।

लेकिन रोमी उन सब को रोक लेता है और कहता है कि हमें कुछ और तरीका ढूंढना चाहिए तभी वहां पर सारे घर वाले इधर-उधर चीजों को ढूंढना शुरू कर देते हैं तभी वहां पर सारे घरवालों को एक दिखाई देता है जिसमें बर्फ रखी रहती है और कुछ पानी की बोतलें भी दिखाई दे जाती हैं तभी उन चीजों की मदद से आग को बुझा देते हैं तभी पाताली को गुस्सा आ जाता है और वह सब को बाहर निकलने के लिए बोलती है तभी बहार सिमरन की मां बाहर आ जाती है और पाताली को बताती है कि यहां पर दिव्य दृष्टि नहीं है तभी पाताली कहती है कि लेकिन तुम्हारी वजह से यह तो मैं यहां पर पहुंची हूं तुम्हारा कड़क चमक रहा है लेकिन अब दिव्य दृष्टि है कहां यह तो मुझे बताओ तभी सिमरन की मां बताती है कि दिव्य दृष्टि अंदर की तरफ है तभी पता ली अंदर चली जाती है इसके बाद सारे घरवालों को सिमरन की मां पर शक हो जाता है और उनसे सवाल जवाब करना शुरू कर देते हैं और उसे कहते हैं कि इसका मतलब तुम इनके साथ मिली हुई हो तभी सिमरन की मां रोने लगती है और उधर दूसरी तरफ जैसे ही सारे घर वाले कहते हैं कि पिशाचिनी अगर जहां पर है तो पाताली जरूर सारे घर वालों के पास होगी हमें कुछ करना चाहिए तभी वहां पर पाताली आ जाती है तभी चारों की नजर उस पर पड़ जाती है और वह छुप जाते हैं इसके बाद वहां पर पिशाचिनी पहुंच जाती है और पाताली के पास आकर खड़ी हो जाती है और उससे पूछती है कि तुम्हें तो मैं बाहर बस के पास खड़ी करके आई थी ।

तभी पता नहीं बताती है कि उस बस में घरवालों के सिवा और कोई वजूद ही नहीं था तभी पिशाचिनी बताती है कि हमने जिस इंसान पर हमने चमक का इस्तेमाल किया था उसी की वजह से ही तो हम यहां पर पहुंचे हैं तभी पाताली कहती है कि हमें पहले उन चारों को ढूंढ लेना चाहिए तभी दोनों दिव्य दृष्टि को ढूंढने के लिए इधर उधर चले जाते हैं तभी दृष्टि कहती है कि पिशाचिनी किस चमक की बात कर रही थी तभी रक्षत कहता है कि अभी इन बातों का टाइम नहीं है हमें चलना चाहिए और उधर दूसरी तरफ काल देवता अपने साथियों को सजा देते हैं कि अब तुम को सजा मिलेगी क्योंकि तुम सब दिव्य दृष्टि को पकड़ने में नाकामयाब हुए हो इसलिए मैं यहां पर किसी एक जने को बुलाऊंगा और वही तुम सब को सजा देगा आपके जेल में से एक जने को बुलाते हैं और उसे कहते हैं कि इन सब को तुम्हें सजा देनी है और जहां से भागने की कोशिश बिल्कुल भी मत करना तभी वह आदमी वहां पर एक चमकती हुई चीज को देखता है और उसे अपने हाथों में उठा कर अपनी जेब में रख लेता है इसके बाद वह आदमी अपने हाथों में काल देवता का डंडा अपने हाथों में लेता है और सब को दंड देने की कोशिश करता है लेकिन इसकी वजह से उसके हाथों में चोट लग जाती है और वही चोट दिव्या के हाथों में भी लग जाती है तभी दिव्या उस चोट को देख कर चौक जाती है।

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